उदयपुर फाइल्स विवाद: केंद्र के कट लगाने के अधिकार पर न्यायिक पड़ताल
उदयपुर फाइल्स विवाद इन दिनों दिल्ली उच्च न्यायालय के केंद्र में है, जहाँ फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स: कन्हैया लाल दर्जी हत्याकांड’ को लेकर बहस जारी है। न्यायालय इस बात की जाँच कर रहा है कि क्या केंद्र सरकार के पास सिनेमैटोग्राफ अधिनियम के तहत फिल्म में कट लगाने का अधिकार है। यह मामला एक अहम कानूनी नजीर बनने की ओर अग्रसर है।
केंद्र की शक्तियों पर अदालत का रुख
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने केंद्र सरकार से सीधा सवाल किया है। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आपको कानून के दायरे में रहकर अपनी शक्तियों का प्रयोग करना होगा। आप इससे आगे नहीं जा सकते।” यह टिप्पणी तब आई जब अदालत को बताया गया कि केंद्र ने अपनी पुनरीक्षण शक्तियों का उपयोग करते हुए फिल्म में छह कट और एक अस्वीकरण का सुझाव दिया था।
- केंद्र की पुनरीक्षण शक्तियों पर अदालत ने सवाल उठाए।
- अदालत कानून के दायरे में रहकर काम करने पर जोर दे रही है।
- यह कानूनी प्रश्न केंद्र के अधिकारों की सीमा पर केंद्रित है।
फिल्म का प्रमाणन और वर्तमान स्थिति
फिल्म का पुन: प्रमाणन हो चुका है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के चलते निर्माताओं को प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने अभी तक फिल्म को दोबारा प्रमाणित नहीं किया है। पीठ ने यह भी कहा कि फिल्म केवल प्रमाणन के बाद ही रिलीज हो सकती है, इसलिए अभी कोई जल्दबाजी नहीं है।
- फिल्म का पुन: प्रमाणन अभी भी लंबित है।
- निर्माताओं को अभी तक प्रमाण पत्र नहीं मिला है।
- अदालत के अनुसार, रिलीज के लिए प्रमाणन आवश्यक है।
आरोपी की याचिका और निष्पक्ष सुनवाई का मुद्दा
यह पूरा मामला कन्हैया लाल हत्याकांड के आरोपी मोहम्मद जावेद की याचिका से जुड़ा है। जावेद ने फिल्म की रिलीज का विरोध किया है, उनका तर्क है कि इससे उनके चल रहे मुकदमे पर बुरा असर पड़ेगा। जावेद की वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत में दलील दी कि फिल्म की रिलीज से उनके निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन होगा। उन्होंने यह भी बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी थी, क्योंकि उनके और आरोपों के बीच सीधा संबंध नहीं पाया गया था।
- आरोपी जावेद ने फिल्म रिलीज पर आपत्ति जताई है।
- वकील ने निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का मुद्दा उठाया।
- मुकदमे पर फिल्म के संभावित प्रभाव पर चिंता व्यक्त की गई।
सिनेमैटोग्राफ अधिनियम: शक्तियों का दायरा
गुरुस्वामी ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार ने सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की वैधानिक योजना का उल्लंघन किया है। उन्होंने बताया कि अधिनियम केंद्र को सीमित पुनरीक्षण शक्तियाँ देता है। केंद्र केवल फिल्म के प्रसारण को रोक सकता है, प्रमाणन बदल सकता है, या उसे निलंबित कर सकता है। गुरुस्वामी ने दृढ़ता से कहा कि केंद्र कट सुझाने या संवाद बदलने जैसे काम नहीं कर सकता है।
- गुरुस्वामी ने केंद्र के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए।
- अधिनियम केंद्र को सीमित पुनरीक्षण शक्तियाँ देता है।
- केंद्र कट सुझाने या संवाद बदलने का काम नहीं कर सकता।
उदयपुर घटना की पृष्ठभूमि और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ
फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स: कन्हैया लाल टेलर मर्डर’ जून 2022 में उदयपुर के दर्जी कन्हैया लाल की नृशंस हत्या पर आधारित है। उनकी हत्या मोहम्मद रियाज और मोहम्मद गौस ने कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद पर नूपुर शर्मा की विवादास्पद टिप्पणी के समर्थन में एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण की थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मामले की जांच की है, और आरोपियों पर कठोर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगे हैं। यह मुकदमा जयपुर की एक विशेष एनआईए अदालत में चल रहा है। फिल्म के विषय और संभावित खतरों को देखते हुए, निर्माता अमित जानी को वाई-श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। इस सुरक्षा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 11 जवान शामिल हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्माताओं को अपनी जान के खतरे को देखते हुए पुलिस से सुरक्षा मांगने की अनुमति देने के बाद उठाया गया है।
- कन्हैया लाल की हत्या पर आधारित है यह फिल्म।
- मामले की जांच एनआईए कर रही है, यूएपीए के तहत आरोप।
- फिल्म निर्माता अमित जानी को वाई-श्रेणी की सुरक्षा मिली।
न्यायिक कार्यवाही की वर्तमान स्थिति
वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अपनी दलीलें पूरी कर ली हैं। हालाँकि, केंद्र और सीबीएफसी का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा की दलीलें अभी अधूरी हैं। अदालत इस मामले की सुनवाई 1 अगस्त, 2025 को जारी रखेगी। मोहम्मद जावेद की याचिका के अलावा, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने भी एक याचिका दायर की है, जिसकी सुनवाई उनके वकील की अनुपलब्धता के कारण नहीं हो सकी।
- अदालत में सुनवाई 1 अगस्त, 2025 को जारी रहेगी।
- जावेद की याचिका के साथ मदनी की याचिका भी लंबित है।
- वकीलों की दलीलें अभी अधूरी हैं।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और उच्च न्यायालय का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने उदयपुर फाइल्स विवाद मामले में सीधा फैसला देने से इनकार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं को केंद्र के उस पुनरीक्षण आदेश को चुनौती देने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया था, जिसमें छह संपादनों और एक अस्वीकरण के संशोधन के साथ फिल्म को प्रदर्शित करने की अनुमति दी गई थी। इस तरह, उदयपुर फाइल्स विवाद अब पूरी तरह से दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में है।
- सुप्रीम कोर्ट ने मामले को उच्च न्यायालय भेजा था।
- याचिकाकर्ताओं को केंद्र के आदेश को चुनौती देने का निर्देश।
- विवाद अब दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में है।
फिल्म की आगामी रिलीज और सेंसरशिप की चुनौतियाँ
फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स: कन्हैया लाल टेलर मर्डर’ को 8 अगस्त, 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज करने की अनुमति मिल गई है। यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हुआ, जिसने दिल्ली उच्च न्यायालय को फिल्म की रिलीज के खिलाफ चुनौतियों का समाधान करने का निर्देश दिया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप, निर्माताओं को रिलीज से पहले छह विशिष्ट बदलाव लागू करने का निर्देश दिया था। फिल्म को मूल रूप से 11 जुलाई, 2025 को रिलीज होना था, लेकिन सेंसरशिप और कानूनी बाधाओं के कारण इसमें कई बार देरी हुई।
- फिल्म 8 अगस्त, 2025 को रिलीज होने वाली है।
- मंत्रालय ने फिल्म में विशिष्ट बदलावों का निर्देश दिया।
- सेंसरशिप और कानूनी बाधाओं के कारण रिलीज में देरी हुई।



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