एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मोदी की जापान-चीन यात्रा,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (28 अगस्त, 2025) को अपनी चार दिवसीय जापान और चीन यात्रा शुरू की। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ लगाए जाने के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव देखने को मिला है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य निवेश बढ़ाना और जापान के साथ संबंधों को मजबूत करना है, जबकि चीन के साथ सीमा तनाव को कम करना है।
जापान यात्रा: आर्थिक और तकनीकी साझेदारी पर जोर
अपनी यात्रा के पहले चरण में, प्रधानमंत्री मोदी 29 और 30 अगस्त, 2025 को जापान में रहेंगे। वह अपने जापानी समकक्ष शिगेरु इशिबा के निमंत्रण पर 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। मोदी की यह 2018 के बाद जापान की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। इस शिखर सम्मेलन के दौरान, दोनों नेता संबंधों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि यह यात्रा संबंधों में लचीलापन लाएगी और नई पहल शुरू करने का अवसर देगी।
यह उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान जापान भारत में अपने निवेश को 5 ट्रिलियन येन (लगभग 34 बिलियन डॉलर) से दोगुना करके 10 ट्रिलियन येन (68 बिलियन डॉलर) कर देगा। चर्चा के मुख्य क्षेत्रों में सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), महत्वपूर्ण खनिज और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल होंगी, खासकर हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण। मोदी ने अपने प्रस्थान वक्तव्य में कहा कि उनका प्रयास भारत-जापान सहयोग को “नए आयाम” देना होगा।
एक खास कार्यक्रम के तहत, प्रधानमंत्री मोदी और शिगेरु इशिबा 30 अगस्त को शिंकानसेन हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से मियागी प्रांत के सेंडाइ तक यात्रा करेंगे। यह यात्रा 2016 में मोदी और तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे की यात्रा की याद दिलाएगी। दोनों नेता एक सेमीकंडक्टर फैक्ट्री और पूर्वी जापान रेलवे कंपनी के तोहोकू शिंकानसेन कारखाने का भी दौरा करेंगे। वे मुंबई-अहमदाबाद शिंकानसेन परियोजना के अगले चरणों पर भी चर्चा करेंगे, जिसे 2017 में जापानी वित्त पोषण से शुरू किया गया था। इस परियोजना को 2028-29 में पूरा करने का लक्ष्य है।
प्रधानमंत्री मोदी जापानी व्यापारिक नेताओं के साथ एक मंच में भी भाग लेंगे ताकि भारत की ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ पहल में जापानी कंपनियों की भूमिका पर चर्चा की जा सके। भारत जापान से अपने लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए निवेश और संयुक्त उद्यमों को आकर्षित करने के लिए उत्सुक है।
चीन यात्रा: एससीओ शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय वार्ता
जापान के बाद, प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन जाएंगे। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) तन्मय लाल ने मीडिया को मोदी की आगामी चीन यात्रा के बारे में जानकारी दी।
तियानजिन में, प्रधानमंत्री मोदी शिखर सम्मेलन से इतर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। यह सात साल में उनकी पहली चीन यात्रा होगी। मोदी-शी वार्ता में सीमा पर तनाव कम करने, पांच साल के अंतराल के बाद सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने और व्यापार बाधाओं को कम करने की घोषणा होने की उम्मीद है। चीनी पक्ष ने भारत की उर्वरकों, सुरंग खोदने वाली मशीनों और दुर्लभ मृदा तत्वों की आपूर्ति पर चिंताओं को दूर करने पर सहमति व्यक्त की है। यह यात्रा भारत-चीन संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।
एससीओ शिखर सम्मेलन में, प्रधानमंत्री मोदी रूस और अन्य नेताओं के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। यह एससीओ शिखर सम्मेलन व्यापार, सुरक्षा और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत की विदेश नीति में एससीओ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे विश्वास है कि जापान और चीन की मेरी यात्राएं हमारे राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएंगी और क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, सुरक्षा तथा सतत विकास को बढ़ावा देंगी।”
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की जापान और चीन की यात्रा भारत की स्वतंत्र और बहुआयामी विदेश नीति को दर्शाती है। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, समृद्धि और स्थिरता के लिए भारत की प्रतिबद्धता को भी पुष्ट करेगी। यह एससीओ शिखर सम्मेलन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा जहां वह अपनी क्षेत्रीय और वैश्विक भूमिका को और अधिक प्रभावी ढंग से स्थापित कर सकता है।



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