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मोदी सरकार: बुलडोजर राज, बेघर गरीब और मानवाधिकार हनन

मोदी सरकार बेघर गरीब

‘रोटी कपड़ा और मकान, मत छीनो “संघी” श्रीमान’ – यह जनता की पुकार है! मोदी सरकार और बेघर गरीब के बीच की खाई अब बुलडोजर के साये में और गहरी होती जा रही है। बुलडोजर राज का यह काला अध्याय भारतीय लोकतंत्र पर एक ऐसा दाग है जो शायद ही कभी मिट पाएगा।

हाउसिंग एंड लैंड राइट्स नेटवर्क (HLRN) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो सालों (2022-2023) में 1,50,000 से अधिक घरों को ध्वस्त कर दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप 7,38,000 से ज्यादा लोग सड़कों पर धकेल दिए गए।

यह आंकड़ा केवल सरकारी क्रूरता का आईना नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का प्रमाण भी है, जहाँ गरीबों के घरों को “अतिक्रमण हटाओ” के बहाने रौंदा जा रहा है।

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संविधान और कोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना

जनता से डरों! यह ध्वस्तीकरण सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का खुला उल्लंघन है, जो बिना नोटिस और बिना पुनर्वास के अंजाम दिया जा रहा है। यह सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 21 “जीवन का अधिकार” का अपमान है।

HLRN के अनुसार, ध्वस्त किए गए 94% मामले स्लम-क्लियरेंस, सौंदर्यीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के नाम पर हुए, जबकि केवल 41% मामलों में ही पुनर्वास की व्यवस्था की गई। क्या यह “सबका साथ, सबका विकास” है, या फिर “पूंजीपतियों का साथ, सबका विनाश”, यानि गरीबों का सफाया?

11 वर्षों की बर्बरता: लाखों हुए बेघर

पिछले 11 वर्षों (2014-2025) में मोदी सरकार और बेघर गरीब के बीच का संघर्ष और भी भयावह हो जाता है। HLRN के अनुसार, 2017 से 2023 तक ही 16.8 लाख से अधिक लोग बेघर हुए, और कुल घरों की संख्या 3 लाख से ऊपर पहुंच गई।

आंकड़ों पर गौर करें तो: 2017 में 53,700 घर, 2018 में 41,730 (जिससे 2 लाख से ज्यादा प्रभावित), 2019 में 22,250, 2020 में 36,812 (कोविड महामारी के दौरान 1.73 लाख बेघर), 2021 में 36,486 (3.31 लाख प्रभावित), 2022 में 46,371, और 2023 में 1,07,449 घर ध्वस्त किए गए, जो यह स्पष्ट करते हैं कि बुलडोजरों की गूंज हर साल तेज होती गई है।

2024 में भी यह सिलसिला जारी रहा, जब गुजरात के अहमदाबाद में चांदोला झील क्षेत्र में 10,000 से अधिक घरों और व्यावसायिक संरचनाओं को ध्वस्त किया गया, जिसमें मुस्लिम समुदाय के उपासना स्थल मस्जिदें भी शामिल थीं।

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‘बुलडोजर जस्टिस’ का सांप्रदायिक निशाना

इस क्रूरतम अभियान का सबसे काला चेहरा मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों पर लक्षित करना है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 के अप्रैल-जून में ही सरकार द्वारा किए गए 128 ध्वस्तीकरण से 617 मुसलमान बेघर हुए। ये कार्रवाईयाँ सांप्रदायिक हिंसा या विरोध प्रदर्शनों के बाद “सामूहिक सजा” के रूप में की गईं।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ का “बुलडोजर जस्टिस” बेरहमी से मुसलमानों के घरों को निशाना बनाता रहा, जबकि हिंदू संपत्तियों को अछूता छोड़ दिया गया। 2023 में मुसलमान 44% मामलों में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, उसके बाद आदिवासी (23%), ओबीसी (17%) और दलित (5%)।

क्या यह संयोग है कि राम मंदिर उद्घाटन के बाद हिंसा और तोड़फोड़ बढ़ गई? यह हिंदुत्व की आड़ में मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की साजिश है।

2024-2025 में भी, गुजरात के बेयट द्वारका में 250 से अधिक मुस्लिम घरों और उनके पूजा स्थलों को “पर्यावरण संरक्षण” के नाम पर रौंदा गया, जबकि पीढ़ियों से रहने वाले मछुआरों को कोई पुनर्वास नहीं मिला। असम में 2025 में 2,000 मुस्लिम परिवारों को बिजली प्लांट के लिए बेघर किया गया, केवल 50,000 रुपये के मुआवजे के साथ।

महिला, बच्चे और आजीविका की तबाही

इस बुलडोजर राज का प्रभाव महिलाओं और बच्चों पर और भी घातक है। HLRN रिपोर्ट बताती है कि ध्वस्तीकरण से महिलाओं की आजीविका, स्वास्थ्य और सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं, परिवार भूखे सोते हैं, और लिंग-आधारित हिंसा बढ़ जाती है। 2023 में 5,15,752 लोग बेघर हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भारी संख्या में थे।

दिल्ली के खोरी गांव (2022 में 700 घरों का ध्वस्तीकरण) या लखनऊ के अकबरनगर जैसे स्थानों पर मांएं अपने बच्चों को गोद में लिए बुलडोजरों के आगे खड़ी रहीं। 2021 के एक अध्ययन के अनुसार, विस्थापन के बाद महिलाओं में IPV (इंटिमेट पार्टनर वायलेंस) की दर 88% बढ़ जाती है, और स्वास्थ्य व्यय दोगुना हो जाता है, जिनमें थायरॉइड, जॉन्डिस और मानसिक बीमारियां आम हो जाती हैं।

2025 में दिल्ली के वजीरपुर और मद्रासी कैंप में 370 से अधिक परिवारों को बेघर करने से गर्भवती महिलाओं को खुले में प्रसव कराना पड़ा। मोदी सरकार और बेघर गरीब के बीच की यह त्रासदी “महिला सशक्तिकरण” के दावे को झूठा साबित करती है।

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‘विश्व गुरु’ की छवि और मानवाधिकारों का उल्लंघन

दुनिया के अन्य किसी लोकतंत्र में अपने ही नागरिकों के विरुद्ध जबरन बेदखली का ऐसा घिनौना चेहरा कहीं नहीं दिखता। अमेरिका में कानूनी प्रक्रिया सख्त है, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका (जहाँ ग्रूटबूम मामले में आवास को मौलिक अधिकार माना गया), और केन्या भी पुनर्वास नीतियां अपनाते हैं।

लेकिन भारत में, बुलडोजर “विनाश” का प्रतीक बन गया। G20 से पहले दिल्ली में 2.78 लाख लोगों को बेघर किया गया। जबरन बेदखली अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन है, जिस पर UN ने भी भारत को चेतावनी दी है कि यह “मानवाधिकार उल्लंघन” है।

2025 तक, HLRN के अनुमान से, कुल प्रभावितों की संख्या 20 लाख को पार कर चुकी है, जो “हाउसिंग फॉर ऑल” के नारे को एक क्रूर मजाक बना देती है।

तानाशाही का नंगा नाच और अदालती अवमानना

सरकार का बचाव कि ये “अवैध निर्माण” हैं, एक खोखला बहाना है। HLRN के अनुसार, 94% तोड़फोड़ स्लम-क्लियरेंस, सौंदर्यीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर हुई, बिना सर्वे या सहमति के। अमित शाह और योगी जैसे नेता इसे “माफिया राज खत्म” कहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि गरीबों पर “राज” चलाने वाला बुलडोजर माफिया सत्ता में काबिज है।

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाइयों को असंवैधानिक ठहराया था, जिसमें 15 दिनों का नोटिस, वीडियो रिकॉर्डिंग और अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी अनिवार्य की गई थी।

बावजूद इसके 2025 में भी दिल्ली में 27,000 लोगों को बेघर कर दिया गया। प्रयागराज में अवैध तोड़फोड़ पर कोर्ट ने UP सरकार को 60 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया। मोदी सरकार और बेघर गरीब का यह मुद्दा अब सिर्फ विकास का नहीं, बल्कि तानाशाही का नंगा नाच है।

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लोकतंत्र को बचाने का अंतिम आह्वान

यह बुलडोजर राज देश को एक विभाजित और असमान समाज की ओर धकेल रहा है। गरीबों को बेघर कर “स्मार्ट सिटी” बनाने का सपना झूठा है, यह अमीरों का शहर बनाने की साजिश है। 2025 में UN विशेषज्ञों ने भारत को चेतावनी दी कि मुसलमानों पर लक्षित ये तोड़फोड़ और ध्वस्तीकरण “भेदभावपूर्ण” हैं।

एमनेस्टी की 2024 रिपोर्ट साफ कहती है: ये तोड़फोड़ “नफरत की मुहिम” हैं। HLRN की मांग स्पष्ट है: राष्ट्रीय मोरेटोरियम लगाओ, पुनर्वास सुनिश्चित करो, और अनौपचारिक बस्तियों को वैधता दो।

2025 के दिल्ली ड्राइव में 3,000 से अधिक घर ध्वस्त किए जा चुके हैं, वह भी बिना नोटिस के। अब समय आ गया है कि सुप्रीम कोर्ट, विपक्ष और सिविल सोसायटी मिलकर इन जनविरोधी कार्यों को रोकें, वरना भारत का “विश्व गुरु” का सपना गरीबों के घरों पर चलाए जा रहे बुलडोजर की धूल में दफन हो जाएगा।

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