मोदी भूटान यात्रा: ऊर्जा और रेल लिंक से भारत-भूटान साझेदारी मज़बूत।
मोदी भूटान यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और भूटान के बीच संबंधों को भावनाओं, शांति और प्रगति के मूल्यों पर आधारित बताया। थिम्पू में मीडिया को संबोधित करते हुए, भूटान में भारत के राजदूत संदीप आर्य ने बताया कि भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के साथ अपनी मुलाकात के दौरान, प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच साझेदारी को विश्वास और विकास का आधार बताया।
बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने संपर्क (कनेक्टिविटी) के महत्व पर चर्चा की और बौद्ध धर्म से जुड़े आध्यात्मिक और धार्मिक संबंधों के महत्व पर प्रकाश डाला। राजदूत ने यह भी बताया कि भूटान नरेश ने भारत से पवित्र बौद्ध अवशेषों की उपस्थिति की सराहना की, जो दोनों देशों के गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंधों को उजागर करती है।
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ऊर्जा साझेदारी को मिला नया विस्तार: समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
श्री आर्य ने आगे बताया कि ऊर्जा साझेदारी चर्चाओं की एक अन्य प्रमुख विशेषता थी। दोनों नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत और भूटान के बीच जल विद्युत साझेदारी की नींव 1970 के दशक में भूटान के चौथे राजा के कार्यकाल के दौरान रखी गई थी।
एक महत्वपूर्ण विकास के तहत, दोनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर और आदान-प्रदान किया है। इस सहयोग में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, बैटरी भंडारण, और सामान्य रूप से ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्र शामिल होंगे, जिसे एक बहुत अच्छी शुरुआत बताया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि इसी बैठक में ₹4,000 करोड़ की ऋण सहायता की घोषणा की गई, जो 40 अरब से शून्य हो जाती है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा परियोजनाओं का वित्तपोषण करना है। यह कदम द्विपक्षीय विश्वास को गहरा करता है और क्षेत्रीय प्रभाव को मज़बूत करता है।
1020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-II परियोजना का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में अपनी दो दिवसीय भूटान यात्रा के दौरान, 1,020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन करके भारत-भूटान ऊर्जा संबंधों का विस्तार किया। भारत द्वारा वित्त पोषित इस परियोजना के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इससे भूटान की जलविद्युत उत्पादन क्षमता में लगभग 40% की वृद्धि होगी।
यह देश में भारत द्वारा समर्थित पाँचवीं जलविद्युत परियोजना है जो कुल मिलाकर लगभग 3,000 मेगावाट बिजली पैदा करती है। भूटान के पूर्व ऊर्जा मंत्री लोक नाथ शर्मा के अनुसार, लगभग 1,000 मेगावाट की स्थानीय माँग को पूरा करने के बाद अतिरिक्त ऊर्जा भारत को निर्यात की जाएगी, जिससे भूटान की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।
टाटा पावर, अडानी समूह और रिलायंस पावर जैसी भारतीय निजी कंपनियों ने भी जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिए भूटान की ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
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रेलमार्ग और कनेक्टिविटी परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन
अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के साथ सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए। पड़ोसी देश की यात्रा पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटानी नेतृत्व को आश्वासन दिया कि उन्होंने भारतीय अधिकारियों को भूटान और भारत को जोड़ने वाली दो रेल परियोजनाओं का समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
सितंबर में स्वीकृत इन 89 किलोमीटर लंबे रेल संपर्कों में असम के कोकराझार और भूटान के गेलेफू के बीच, और पश्चिम बंगाल के बनारहाट और भूटान के समत्से के बीच के मार्ग शामिल हैं।
ये ₹4,033 करोड़ की लागत से बनेंगे, जिसका पूरा वित्तपोषण भारत कर रहा है। मोदी ने कहा कि संपर्क अवसर पैदा करता है और अवसर समृद्धि पैदा करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से भूटान के उद्योगों और किसानों को भारत के विशाल बाजार तक आसान पहुँच प्राप्त होगी।
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी और आव्रजन चौकियों का समर्थन
प्रधानमंत्री ने गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के स्वप्निल प्रोजेक्ट के विज़न को हर संभव समर्थन देने की बात कही। उन्होंने घोषणा की कि निकट भविष्य में, भारत गेलेफू के पास एक आव्रजन चौकी भी बनाएगा ताकि यहाँ आने वाले पर्यटकों और निवेशकों को और सुविधा मिल सके।
इसके अतिरिक्त, भारत और भूटान असम के चिरांग ज़िले के हतिसार में एक आव्रजन चौकी स्थापित करने पर भी सहमत हुए हैं, जो भूटान के गेलेफू शहर के सामने स्थित है। अधिकारियों का मत है कि गेलेफू तक बेहतर सड़क और रेल संपर्क से लोगों को गुवाहाटी हवाई अड्डे से गेलेफू जाने में मदद मिलेगी।
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बौद्ध अवशेषों से आशीर्वाद और आध्यात्मिक संबंध
भारत और भूटान के बीच गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंधों को उजागर करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के साथ थिम्पू के ताशीछोदज़ोंग में स्थानीय भिक्षुओं द्वारा भव्य स्वागत के बीच भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों से आशीर्वाद लिया।
भारत से आए ये अवशेष, जो वर्तमान में ग्रैंड कुएनरे हॉल में रखे हुए हैं, चौथे राजा की 70वीं जयंती और वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव के उपलक्ष्य में भारत के लोगों की ओर से भूटान के लिए एक विशेष संकेत के रूप में प्रदर्शनी के लिए भेजे गए हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि भिक्षुओं के मंत्रोच्चार के साथ, प्रधानमंत्री ने पवित्र अवशेषों की प्रार्थना की।
भारत और भूटान के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में, राजगीर में एक भूटानी मंदिर के निर्माण के लिए भूमिपूजन समारोह हुआ, जिसकी औपचारिक प्राण-प्रतिष्ठा इस वर्ष सितंबर में की गई।
सकल राष्ट्रीय खुशी और पूर्व नरेश का योगदान
प्रधानमंत्री मोदी ने भूटानी नेतृत्व के ‘सतत विकास और पर्यावरण सर्वोपरि’ के दृष्टिकोण की सराहना की, जिससे भूटान दुनिया का पहला कार्बन-नकारात्मक देश बनने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि भूटान अपनी 100 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न करता है।
प्रधानमंत्री ने पूर्व नरेश जिग्मे सिंग्ये वांगचुक की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे ज्ञान, सरलता, साहस और राष्ट्र के प्रति निस्वार्थ सेवा का संगम हैं। भूटानी क्षेत्र से उल्फा शिविरों को हटाने में उनकी भूमिका का उल्लेख करते हुए, मोदी ने कहा कि पूर्व नरेश ने भूटान में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति स्थापित करने और भारत-भूटान की मैत्री को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाई।
मोदी ने कहा कि पूर्व नरेश द्वारा प्रस्तुत ‘सकल राष्ट्रीय खुशी’ (GNH) का विचार आज दुनिया भर में विकास का एक महत्वपूर्ण पैमाना बन गया है, जो राष्ट्र निर्माण को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से परे मानवता की भलाई से जोड़ता है।
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भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान और भविष्य के कदम
प्रधानमंत्री मोदी को मार्च 2024 की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा के दौरान भूटान के राजा द्वारा भूटान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो से सम्मानित किया गया था। वह यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले विदेशी नेता थे, जिसने भारत-भूटान मैत्री को मज़बूत करने में उनके योगदान को मान्यता दी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने पिछले साल भूटान की पंचवर्षीय योजना के लिए ₹10,000 करोड़ के योगदान की घोषणा की थी।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार वाराणसी में भूटानी मंदिर और अतिथि गृह के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा, नई दिल्ली यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि भूटानी नागरिकों को भी भारत आने पर एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) तक पहुँच प्राप्त हो।



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