IIT मद्रास में जयशंकर ने पाक को दी चेतावनी कहा अंजाम भुगतने को रहे तैयार
IIT मद्रास में जयशंकर ने शुक्रवार (2 जनवरी, 2026) को पाकिस्तान को “बुरा पड़ोसी” करार देते हुए दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपने नागरिकों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। विदेश मंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि जब सुरक्षा की बात आती है, तो “कोई हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए”। उन्होंने यह तीखी टिप्पणी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में की, जिसे भारत ने पिछले साल सीमा पार आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए अंजाम दिया था। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि यदि कोई देश जानबूझकर और बिना किसी पछतावे के आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में जारी रखता है, तो भारत खामोश नहीं बैठेगा और अपनी रक्षा के लिए जो भी जरूरी होगा, वह करेगा।
ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान के खिलाफ भारत का कड़ा सुरक्षा रुख
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष उल्लेख किया। पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में एक भीषण आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 बेगुनाह लोग, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे, मारे गए थे। इस हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) का हाथ था। हमले में सीमा पार के कनेक्शन सामने आने के बाद, भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कई आतंकी कैंपों को निशाना बनाया और 100 से ज्यादा आतंकवादियों को ढेर कर दिया। इसके जवाब में पाकिस्तान ने मिसाइल और ड्रोन से हमला करने की कोशिश की, जिसे भारतीय रक्षा प्रणाली ने विफल कर दिया। जवाबी कार्रवाई में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के एयरफील्ड पर हमला किया, जिसके बाद 10 मई को युद्धविराम की घोषणा हुई।
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सिंधु जल संधि पर जयशंकर का प्रहार: आतंक और पानी साथ नहीं चलेंगे
IIT मद्रास में जयशंकर ने 1960 की सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर भारत के सख्त रुख को भी स्पष्ट किया। पहलगाम हमले के बाद भारत ने इस संधि को निलंबित कर दिया था। जयशंकर ने कहा, “दशकों पहले हमने पानी साझा करने की व्यवस्था पर सहमति जताई थी क्योंकि इसके पीछे सद्भावना की सोच थी। लेकिन अगर दशकों तक आतंकवाद जारी रहता है, तो कोई ‘अच्छी पड़ोसियत’ नहीं बचती।” उन्होंने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा कि आप यह नहीं कह सकते कि “कृपया मेरे साथ पानी साझा करें, लेकिन मैं आपके साथ आतंकवाद जारी रखूंगा।” मंत्री ने साफ किया कि अच्छी पड़ोसियत का फायदा तभी मिलता है जब नीयत साफ हो, वरना यह मेल नहीं खाता।
पड़ोसियों का वर्गीकरण: भारत के लिए ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ पड़ोसी
भारत की पड़ोसी नीति पर छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए जयशंकर ने ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ पड़ोसियों के बीच का अंतर समझाया। उन्होंने कहा कि भारत को कई तरह के पड़ोसियों का आशीर्वाद मिला है। अगर पड़ोसी अच्छा है या कम से कम हानिकारक नहीं है, तो भारत की स्वाभाविक प्रवृत्ति उसकी मदद करने और दयालु होने की होती है। उन्होंने उदाहरण दिया कि ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत भारत ने कोविड-19 के दौरान वैक्सीन भेजी, यूक्रेन संकट के समय ईंधन और भोजन की सहायता दी और श्रीलंका को उसके वित्तीय संकट में 4 बिलियन डॉलर की मदद पहुंचाई। विदेश मंत्री के अनुसार, भारत का दृष्टिकोण पूरी तरह से “सामान्य ज्ञान” पर आधारित है।
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बांग्लादेश संकट और कूटनीतिक संबंधों पर जयशंकर की स्पष्टता
हाल ही में बांग्लादेश में हुई हिंसा और विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत की भूमिका पर भी जयशंकर ने बात की। वह दो दिन पहले ही बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होकर लौटे थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शोक संदेश तारिक रहमान को सौंपा। IIT मद्रास में जयशंकर ने कहा कि अच्छे पड़ोसियों के साथ भारत निवेश करता है और साझा करता है। उन्होंने बताया कि दूसरे देशों के साथ स्पष्ट और ईमानदार बातचीत करना जरूरी है ताकि भारत के इरादों को लेकर कोई गलतफहमी न रहे। उन्होंने जोर दिया कि जब आप खुलकर बात करते हैं, तो दुनिया आपका सम्मान करती है।
पाकिस्तानी सेना और जनरल आसिम मुनीर पर सीधा निशाना
विदेश मंत्री ने पाकिस्तान की आंतरिक व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “भारत की ज्यादातर समस्याएं” पाकिस्तानी सेना से पैदा होती हैं। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि जैसे ‘अच्छे आतंकवादी’ और ‘बुरे आतंकवादी’ की चर्चा होती है, वैसे ही कुछ मिलिट्री लीडर अच्छे होते हैं और कुछ उतने अच्छे नहीं होते। इसे सीधे तौर पर पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के संदर्भ में देखा गया। जयशंकर ने दोहराया कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए बाहरी निर्देशों को स्वीकार नहीं करेगा और प्रतिक्रिया का फैसला केवल भारत ही लेगा।
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भारत: एक आधुनिक राष्ट्र-राज्य के रूप में प्राचीन सभ्यता का उदय
जयशंकर ने भारत की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत उन गिनी-चुनी प्राचीन सभ्यताओं में से एक है जो आज एक प्रमुख आधुनिक राष्ट्र-राज्य के रूप में जीवित है। भारत ने लोकतांत्रिक मॉडल को अपनी मर्जी से चुना और इसी फैसले ने लोकतंत्र को एक वैश्विक अवधारणा बनाया। IIT मद्रास में जयशंकर ने छात्रों से कहा कि हमें अपने अतीत और इतिहास का एहसास है, जो बहुत कम देशों के पास है। उन्होंने पश्चिम के साथ साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि भारत दुनिया को एक बेहतर आकार देने में सक्षम है।
IITM ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन और भविष्य की वैश्विक कूटनीति
इस कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने ‘IITM ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन’ का शुभारंभ किया। उन्होंने तंजानिया में स्थापित IIT मद्रास के कैंपस की तारीफ करते हुए कहा कि यह भारतीय विदेश नीति का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां घरेलू संस्थानों की क्षमता का उपयोग वैश्विक प्रभाव डालने के लिए किया जा रहा है। कार्यक्रम में जर्मनी, मलेशिया, सिंगापुर, यूएई, यूके और अमेरिका के संस्थानों के साथ कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। जयशंकर ने अंत में कहा कि भारत एक “मानव संसाधन शक्ति” है और हमें अपनी इसी ताकत के साथ दुनिया के मंच पर खेलना चाहिए। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का अर्थ समझाते हुए कहा कि हमने दुनिया को कभी दुश्मन नहीं माना, बल्कि हमेशा समाधान खोजने पर ध्यान दिया है।
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