नितिन कसलीवाल लंदन संपत्ति: ₹1400 करोड़ के बैंक फ्रॉड में ED की कार्रवाई
नितिन कसलीवाल लंदन संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक हाई-प्रोफाइल भारतीय बैंक धोखाधड़ी जांच में बड़ी सफलता हासिल करते हुए लंदन के सबसे पॉश इलाके बकिंघम पैलेस के पास स्थित एक लग्जरी प्रॉपर्टी को अपना केंद्र बिंदु बनाया है। एजेंसी के इंदौर सब-ज़ोनल ऑफिस ने 30 दिसंबर, 2025 को एक प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया, जिसके तहत लगभग ₹150 करोड़ की इस अचल संपत्ति को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के कड़े प्रावधानों के तहत कुर्क किया गया है।
यह कार्रवाई भारत के बैंकिंग इतिहास के एक बड़े डिफॉल्टर के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की गई सबसे महत्वपूर्ण कानूनी घेरेबंदी मानी जा रही है।
टेक्सटाइल टाइकून और एस कुमार्स का पतन
इस पूरी कार्रवाई के केंद्र में नितिन कसलीवाल लंदन संपत्ति और उनका पारिवारिक स्वामित्व है। नितिन शंभुकुमार कसलीवाल, जो कभी भारत के प्रसिद्ध टेक्सटाइल ब्रांड ‘एस कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड’ (SKNL) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर थे, आज जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।
कसलीवाल पर आरोप है कि उन्होंने भारतीय बैंकों के एक कंसोर्टियम के साथ करीब ₹1,400 करोड़ की धोखाधड़ी की है। एक समय में कपड़ा उद्योग का दिग्गज माना जाने वाला यह नाम अब देश के टॉप 50 बैंक डिफॉल्टरों की सूची में शामिल है, जिसके चलते ED ने उनकी विदेशी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी निवेश का मायाजाल
ED की जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि एस कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड द्वारा बैंकों से लिए गए फंड को व्यापारिक उद्देश्यों के बजाय विदेशी निवेश के झूठे बहाने भारत से बाहर ‘डायवर्ट’ किया गया था। एजेंसी का आरोप है कि इसी डायवर्ट किए गए पैसे का इस्तेमाल बाद में विदेश में महंगी अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया।
इन संपत्तियों के वास्तविक मालिकाना हक को छिपाने के लिए प्राइवेट ट्रस्टों और ऑफशोर कंपनियों का एक बेहद जटिल और लेयर्ड ढांचा तैयार किया गया था, ताकि भारतीय जांच एजेंसियां अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) तक आसानी से न पहुंच सकें।
टैक्स हेवन देशों में छापेमारी और डिजिटल सबूत
यह बड़ी जब्ती 23 दिसंबर, 2025 को ED द्वारा किए गए व्यापक तलाशी अभियानों का परिणाम है। PMLA की धारा 17 के तहत की गई इस कार्रवाई में जांचकर्ताओं ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए थे।
इन उपकरणों के विस्तृत फोरेंसिक और डिजिटल विश्लेषण से एक ऐसे नेटवर्क का पता चला जो ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI), जर्सी और स्विट्जरलैंड जैसे टैक्स हेवन देशों तक फैला हुआ था।
नितिन कसलीवाल लंदन संपत्ति को इसी गुप्त नेटवर्क के जरिए प्रबंधित किया जा रहा था, जिसका मुख्य उद्देश्य फंड के वास्तविक स्रोत को धुंधला करना था।
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कैथरीन ट्रस्ट और ऑफशोर कंपनियों का गहरा जाल
जांचकर्ताओं ने पाया कि इस पूरे मनी लॉन्ड्रिंग ढांचे के केंद्र में ‘कैथरीन ट्रस्ट’ (जिसे पहले सूर्या ट्रस्ट के नाम से जाना जाता था) मौजूद था। इस ट्रस्ट के प्राथमिक लाभार्थी नितिन कसलीवाल और उनके परिवार के सदस्य ही हैं।
इस ट्रस्ट ने ‘कैथरीन प्रॉपर्टी होल्डिंग लिमिटेड’ (CPHL) नामक कंपनी पर नियंत्रण रखा हुआ था, जो जर्सी और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में पंजीकृत थी। इसी CPHL के पास लंदन की उस बेशकीमती संपत्ति का मालिकाना हक था जिसे अब ED ने अटैच किया है। यह लेयर्ड फ्रेमवर्क जानबूझकर कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए बनाया गया था।
बकिंघम पैलेस के पास ₹150 करोड़ की आलीशान कोठी
प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार, 31 दिसंबर 2025 को आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि अटैच की गई अचल संपत्ति की कीमत ₹150 करोड़ है और यह लंदन के प्राइम एरिया में बकिंघम पैलेस के ठीक बगल में स्थित है। ED के अधिकारियों के अनुसार, यह ज़ब्ती अपराध से मिली रकम का पता लगाने और उसे सुरक्षित करने की दिशा में एक मील का पत्थर है।
नितिन कसलीवाल लंदन संपत्ति का यह अटैचमेंट अब तक की सबसे हाई-प्रोफाइल विदेशी संपत्ति जब्ती मानी जा रही है, जो यह स्पष्ट संदेश देती है कि आर्थिक अपराधी विदेशों में भी अपनी अवैध संपत्ति सुरक्षित नहीं रख पाएंगे।
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अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आगामी कानूनी प्रक्रिया
प्रोविजनल अटैचमेंट के बाद अब ED अंतरराष्ट्रीय सहयोग तंत्र (International Cooperation Mechanism) के तहत यूके की कानून प्रवर्तन और न्यायिक अथॉरिटीज़ के साथ समन्वय करेगी। इसका उद्देश्य अटैच की गई संपत्ति पर भौतिक कब्जा हासिल करना है।
चूंकि बैंक लोन फ्रॉड का यह मामला ₹1,400 करोड़ का है, इसलिए एजेंसी अब अन्य विदेशी न्यायालयों में भी इसी तरह की कार्रवाई करने की तैयारी में है। ED अपनी समकक्ष विदेशी एजेंसियों के संपर्क में है ताकि मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून के आपराधिक प्रावधानों को पूरी सख्ती से लागू किया जा सके।
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भविष्य की जांच और अन्य संपत्तियों पर नजर
एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि नितिन कसलीवाल लंदन संपत्ति की कुर्की के बाद भी जांच का दायरा कम नहीं हुआ है। अधिकारी अब अतिरिक्त संपत्तियों की पहचान करने, फंड फ्लो के अंतिम छोर तक पहुंचने और बैंक फंड की मनी लॉन्ड्रिंग की पूरी सीमा का पता लगाने में जुटे हैं।
जैसे-जैसे जांच गहरी होगी, कई अन्य विदेशी संस्थाएं और बेनामी संपत्तियां जांच के घेरे में आ सकती हैं। देश के बड़े डिफॉल्टरों के खिलाफ ED का यह कड़ा रुख बैंकिंग सेक्टर में धोखाधड़ी करने वालों के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
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