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“भारत की GDP ग्रोथ ” अनुमान और इकोनॉमिक सर्वे की बड़ी बातें

भारत की GDP ग्रोथ

संसद में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, अगले वित्त वर्ष में भारत की GDP ग्रोथ अनुमान 6.8-7.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए इस दस्तावेज में कहा गया है कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी इकोनॉमी का दर्जा बरकरार रखेगा।

हालांकि, 2026-27 के लिए यह अनुमान मौजूदा वित्त वर्ष के 7.4 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ा धीमा है, जिसका मुख्य कारण ग्लोबल उतार-चढ़ाव और कंजम्पशन-इन्वेस्टमेंट के बदलते डायनामिक्स हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हालिया रिफॉर्म्स ने देश की मीडियम-टर्म ग्रोथ पोटेंशियल को 7 प्रतिशत के करीब पहुंचा दिया है, जो पहले 6.5 प्रतिशत था।

कृषि निर्यात: $100 बिलियन का लक्ष्य और पॉलिसी चुनौतियां

सर्वे के मुताबिक, भारत का एग्रीकल्चर, मरीन प्रोडक्ट्स और फूड एक्सपोर्ट अगले चार वर्षों में $100 बिलियन तक पहुंचने की क्षमता रखता है। वित्त वर्ष 2025 में यह आंकड़ा $51.1 बिलियन था। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कृषि उत्पादक है, लेकिन वैश्विक निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 2024 में मात्र 2.2 प्रतिशत रही है।

सर्वे में चेतावनी दी गई है कि बार-बार पॉलिसी बदलने (जैसे एक्सपोर्ट बैन या न्यूनतम निर्यात मूल्य) से सप्लाई चेन बाधित होती है। एक वरिष्ठ संपादक के शब्दों में कहें तो, ‘खोए हुए विदेशी बाजार आसानी से वापस नहीं मिलते’, इसलिए निर्यात-उन्मुख विकास के लिए एक स्थिर नीति अनिवार्य है।

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राजकोषीय लोकलुभावनवाद और राज्यों की वित्तीय चिंताएं

इकोनॉमिक सर्वे ने राज्यों के बढ़ते रेवेन्यू घाटे और ‘कैश ट्रांसफर’ की राजनीति पर कड़ा रुख अपनाया है। वित्त वर्ष 2019 में 19 राज्य रेवेन्यू सरप्लस में थे, जो वित्त वर्ष 2025 में घटकर केवल 11 रह गए हैं। राज्यों का रेवेन्यू घाटा GDP के 0.1% से बढ़कर 0.7% हो गया है।

बिना शर्त कैश ट्रांसफर (UCTs) की योजनाओं में पांच गुना बढ़ोतरी हुई है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़कों जैसे कैपिटल खर्च पर बुरा असर पड़ रहा है। सर्वे ने आगाह किया है कि यह ट्रेंड भारत की कुल राजकोषीय विश्वसनीयता (Fiscal Credibility) को चोट पहुँचा सकता है।

टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: संभावना और जोखिम

रिपोर्ट में AI को भविष्य की इकोनॉमी के लिए महत्वपूर्ण माना गया है, लेकिन इसके साथ जुड़े वित्तीय जोखिमों की भी पहचान की गई है। वैश्विक स्तर पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बहुत ज्यादा कर्ज (Leverage) के साथ निवेश किया जा रहा है, जो 2008 जैसे संकट का कारण बन सकता है।

भारत में AI ट्रेनिंग डेटा के मामले में ग्लोबल हिस्सेदारी केवल 2% है, जबकि अमेरिका 40% पर है। सर्वे का सुझाव है कि भारत को बड़े मॉडल के बजाय छोटे, सेक्टर-विशिष्ट मॉडल और डेटा क्यूरेशन पर ध्यान देना चाहिए। यहाँ भारत की GDP ग्रोथ अनुमान को स्थिर रखने के लिए टेक्नोलॉजी का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल जरूरी है।

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अमेरिकी टैरिफ, रुपया और वैश्विक व्यापार की चुनौतियां

अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण भारतीय रुपया करीब 5 प्रतिशत गिरा है। सर्वे के अनुसार, रुपये की मौजूदा वैल्यूएशन भारत के मजबूत इकोनॉमिक फंडामेंटल्स को सही तरह से नहीं दर्शाती है। हालांकि, अंडरवैल्यूड करेंसी अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कुछ हद तक कम जरूर करती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वे पर टिप्पणी करते हुए इसे ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की तस्वीर बताया है। अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता इस साल खत्म होने की उम्मीद है, जिससे बाहरी मोर्चे पर अनिश्चितता कम होगी।

स्टार्टअप इकोसिस्टम: महंगा कैपिटल और एग्जीक्यूशन डिसिप्लिन

स्टार्टअप्स के लिए अब ‘सस्ता और आसान’ फंडिंग का दौर खत्म होता दिख रहा है। सर्वे के अनुसार, भारत में कैपिटल की ऊंची लागत एक स्ट्रक्चरल समस्या है। घाटे में चल रहे वेंचर्स के लिए अब टिक पाना मुश्किल होगा; अब केवल वे ही स्टार्टअप टिकेंगे जिनके पास ‘एग्जीक्यूशन डिसिप्लिन’ और ‘प्रॉफिटेबिलिटी’ होगी।

भारत की GDP ग्रोथ अनुमान को मजबूती देने के लिए स्टार्टअप्स को मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई-चेन सॉफ्टवेयर जैसे ‘गुड्स-बेस्ड’ निर्यात इकोसिस्टम पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई है।

नया इनकम टैक्स कानून और स्वदेशी की रणनीति

1 अप्रैल से लागू होने वाला नया इनकम टैक्स कानून टैक्सपेयर्स के लिए स्ट्रक्चरल क्लैरिटी और सहजता लाने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसके अलावा, सर्वे ने ‘स्वदेशी’ को एक अनुशासित रणनीति के रूप में अपनाने की वकालत की है। आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर अब रणनीतिक जरूरतों (Strategic Essentials) पर ध्यान देने की बात कही गई है।

‘नेशनल इनपुट कॉस्ट रिडक्शन’ के जरिए उत्पादन लागत घटाने और विदेशी तकनीकी निर्भरता कम करने पर जोर दिया गया है, ताकि भारत की GDP ग्रोथ अनुमान के लक्ष्यों को बिना किसी बाहरी बाधा के हासिल किया जा सके।

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डिजिटल एडिक्शन और स्वास्थ्य पर कड़े कदम

रिपोर्ट में सामाजिक मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। “डिजिटल एडिक्शन” से निपटने के लिए सोशल मीडिया एप्स पर उम्र के आधार पर सीमा तय करने और बच्चों के लिए कंटेंट फिल्टर वाले आसान डिवाइस (बेसिक फोन) को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया है।

इसके अलावा, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (UPFs) की सुबह 6 से रात 11 बजे तक मार्केटिंग पर बैन लगाने और शिशु दूध उत्पादों के विज्ञापनों पर रोक लगाने की सिफारिश की गई है। सर्वे का स्पष्ट संदेश है कि एक स्वस्थ और जागरूक कार्यबल ही दीर्घकालिक आर्थिक विकास की नींव है।

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