अजीत पवार विमान हादसा मे रोहित पवार का खुलासा विमान में था ‘फ्यूल बम’?
अजीत पवार विमान हादसा जांच अब एक नए और भयावह मोड़ पर पहुँच गई है। एनसीपी (शरद पवार) के विधायक रोहित पवार ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सनसनीखेज दावा किया कि जिस विमान में अजीत पवार सवार थे, उसमें अवैध रूप से ‘एक्स्ट्रा फ्यूल टैंक’ रखे गए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन अतिरिक्त टैंकों ने विमान को एक उड़ते हुए ‘बम’ में तब्दील कर दिया था, जिसके कारण दुर्घटना के समय इतना भीषण विस्फोट हुआ। रोहित पवार ने सीधे तौर पर नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू के इस्तीफे या निलंबन की मांग की है, जब तक कि इस मामले की पूरी जांच नहीं हो जाती।
उनके अनुसार, विमान कंपनी ‘वीएसआर एविएशन’ (VSR Aviation) और टीडीपी (TDP) के नेताओं के बीच गहरे संबंध हैं, जो निष्पक्ष जांच में बाधा डाल रहे हैं।
ब्लैक बॉक्स का ‘रहस्यमय’ डैमेज: एक्सपर्ट्स ने पूछा- पूंछ वाला हिस्सा सुरक्षित तो डेटा कैसे जला?
इस मामले में सबसे बड़ी तकनीकी उलझन विमान के ब्लैक बॉक्स को लेकर है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि Learjet 45 विमान के दोनों ब्लैक बॉक्स (DFDR और CVR) आग के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
हालांकि, विमान सुरक्षा विशेषज्ञों और रोहित पवार ने तस्वीरों का हवाला देते हुए सवाल किया है कि जब विमान का पिछला हिस्सा (Tail section), जहाँ ये उपकरण लगे होते हैं, काफी हद तक सुरक्षित है, तो ब्लैक बॉक्स इतने ज्यादा कैसे जल गए? यह विसंगति अजीत पवार विमान हादसा जांच की शुचिता पर गहरे सवाल खड़े करती है।
कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) का डेटा निकालने के लिए अब विदेशी विशेषज्ञों (Honeywell) की मदद ली जा रही है, जो इस केस की गुत्थी सुलझाने में अहम साबित हो सकता है।
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हवाई नियमों की धज्जियां: क्या विजिबिलिटी कम होने के बावजूद उड़ान भरने का था दबाव?
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है कि बारामती हवाई अड्डे पर जिस समय विमान लैंड करने की कोशिश कर रहा था, वहां ‘लो विजिबिलिटी’ (कम दृश्यता) की स्थिति थी।
बारामती एक अनियंत्रित (Uncontrolled) एयरफील्ड है जहाँ कोई आधुनिक नेविगेशनल एड्स नहीं हैं। रोहित पवार का आरोप है कि विमान कंपनी ने विजुअल फ्लाइट रूल्स (VFR) का उल्लंघन किया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब मौसम खराब था, तो पायलट ने वापस मुंबई जाने के बजाय लैंडिंग का जोखिम क्यों लिया?
अजीत पवार विमान हादसा जांच अब इस एंगल पर भी घूम रही है कि क्या पायलटों पर किसी प्रकार का दबाव था या फिर विमान के एयरवर्दीनेस (Airworthiness) सर्टिफिकेट के साथ छेड़छाड़ की गई थी।
वीएसआर वेंचर्स का ‘कनेक्शन’ और मंत्री नायडू के इस्तीफे की गूंज
रोहित पवार ने अपनी प्रेजेंटेशन में दावा किया कि वीएसआर एविएशन के मालिक और कुछ केंद्रीय मंत्रियों के बीच घनिष्ठ पारिवारिक संबंध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यही कारण है कि हादसे के 20 दिन बाद भी कंपनी के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई।
रोहित ने यहां तक कह दिया कि कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी विदेश भाग गए हैं और उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया। अजीत पवार विमान हादसा जांच को निष्पक्ष बनाने के लिए उन्होंने एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति बनाने की मांग की है, जिसमें राहुल गांधी और पवार परिवार के सदस्यों को शामिल करने का प्रस्ताव है।
उनके अनुसार, जब तक मौजूदा उड्डयन मंत्री पद पर हैं, तब तक टीडीपी और वीएसआर के संबंधों की वजह से सच सामने नहीं आ पाएगा।
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सुनेत्रा पवार की सीबीआई जांच की मांग: क्या महायुति के भीतर भी है अविश्वास?
दिलचस्प बात यह है कि केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि अजीत पवार की पत्नी और महाराष्ट्र की उप-मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलकर इस मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग की है।
सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के साथ एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया कि विमान के क्रू में आखिरी समय में हुए बदलाव और एटीसी (ATC) संचार में खामियां ‘फौउल प्ले’ (Foul play) की ओर इशारा करती हैं।
अजीत पवार विमान हादसा जांच में अब राज्य की सीआईडी (CID) के साथ-साथ केंद्रीय एजेंसियों की एंट्री लगभग तय मानी जा रही है, क्योंकि यह मामला अब राजनीतिक साख और परिवार की सुरक्षा से जुड़ गया है।
4915 घंटे की उड़ान या 8000? विमान के रखरखाव के रिकॉर्ड पर बड़ा सस्पेंस
रोहित पवार ने विमान के ‘लॉग बुक’ और तकनीकी रिकॉर्ड्स में भी बड़ी गड़बड़ी का दावा किया है। डीजीसीए (DGCA) के रिकॉर्ड के अनुसार विमान ने 4,915 घंटे पूरे किए थे, लेकिन रोहित का दावा है कि विमान वास्तव में 8,000 घंटे से ज्यादा चल चुका था और उसके इंजन पुराने हो चुके थे।
अजीत पवार विमान हादसा जांच के घेरे में अब डीजीसीए के वो अधिकारी भी हैं जिन्होंने इस विमान को उड़ान भरने की अनुमति दी थी। आरोप है कि विमान के ट्रांसपोंडर (Transponder) को भी बीच-बीच में बंद किया जाता था ताकि उसकी सही लोकेशन ट्रैक न हो सके। यह जानकारी अगर सच साबित होती है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि जानबूझकर किया गया अपराध माना जाएगा।
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बीमा का खेल: 35 करोड़ का विमान और 210 करोड़ की लायबिलिटी इंश्योरेंस
इस पूरे हादसे में ‘इंश्योरेंस एंगल’ (Insurance Angle) ने नई बहस छेड़ दी है। रोहित पवार के मुताबिक, विमान की खरीद कीमत 35 करोड़ थी, लेकिन इसकी लायबिलिटी इंश्योरेंस वैल्यू 210 करोड़ रुपये है। उन्होंने संकेत दिया कि क्या यह सब किसी बड़े वित्तीय लाभ के लिए तो नहीं किया गया?
अजीत पवार विमान हादसा जांच में अब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। विमान हादसे के बाद बीमा राशि का इतना बड़ा अंतर कई संदेह पैदा करता है, जिसकी गहराई से जांच होना बाकी है। क्या यह सिर्फ एक तकनीकी चूक थी या इसके पीछे किसी कॉर्पोरेट और राजनीतिक सिंडिकेट का हाथ है?
क्या कभी सामने आ पाएगा बारामती विमान हादसे का असली सच?
अंततः, अजीत पवार विमान हादसा जांच एक ऐसी भूलभुलैया बन गई है जहाँ तकनीकी खराबी, प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक साजिश के धागे आपस में उलझे हुए हैं।
एक तरफ ब्लैक बॉक्स का डेटा रिकवर करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ ‘साजिश’ के बढ़ते आरोप। जिस तरह से पवार परिवार के दोनों धड़े (अजीत और शरद गुट) जांच की मांग कर रहे हैं, उससे साफ है कि यह मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा हथियार बनेगा।
अब सबकी निगाहें विदेशी विशेषज्ञों की रिपोर्ट और सीबीआई की संभावित एंट्री पर टिकी हैं। क्या हमें कभी पता चलेगा कि 28 जनवरी की सुबह बारामती के आसमान में वास्तव में क्या हुआ था?
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