“ईरान युद्ध सीज़फ़ायर” ट्रंप ने ठुकराई होर्मुज़ पर संप्रभुता और युद्ध ?
ईरान युद्ध सीज़फ़ायर दुनिया की नज़रें एक बार फिर पश्चिम एशिया की तपती ज़मीन पर टिक गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ताज़ा जवाबी प्रस्ताव को ‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’ बताते हुए कड़ी आलोचना की है।
ट्रंप के अनुसार, ईरान के साथ शांति की कोशिशें फिलहाल ‘बहुत नाज़ुक हालत’ में हैं। यह बयान तब आया है जब तेहरान ने पाकिस्तान के माध्यम से एक प्रस्ताव भेजा था, जिसे अमेरिका ने उसकी शर्तों के कारण सिरे से खारिज कर दिया।
ईरान की ‘बेतुकी’ मांगें या ‘ज़िम्मेदार’ प्रस्ताव?
ईरान ने अपने प्रस्ताव को “उदार और ज़िम्मेदार” करार दिया है। तेहरान की मुख्य मांग होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाना है। ईरानी मीडिया ‘तस्नीम’ के अनुसार, प्रस्ताव में न केवल प्रतिबंधों को हटाने की बात की गई है, बल्कि ईरान ने “युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवज़े” की भी मांग की है।
इसके अलावा, ईरान चाहता है कि होर्मुज़ जलमार्ग पर उसकी संप्रभुता को वैश्विक मान्यता मिले। परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का रुख अब भी अस्पष्ट है; उसने कहा है कि वह परमाणु वार्ता को तब तक के लिए टालना चाहता है जब तक कि “सही समय” नहीं आ जाता।
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ट्रंप का जवाबी प्रहार: ‘प्रोजेक्ट फ़्रीडम’ की आहट
ईरान के अड़ियल रुख को देखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह ‘प्रोजेक्ट फ़्रीडम’ को फिर से सक्रिय कर सकते हैं। यह एक सैन्य अभियान है जिसके तहत अमेरिकी नौसेना के संरक्षण में व्यापारिक जहाज़ों को विवादित समुद्री रास्तों से गुज़ारा जाता है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर किसी एक देश का एकाधिकार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पेंटागन ने भी इस तनाव के बीच अपनी सामरिक ताकत का प्रदर्शन किया है। अमेरिका की सबसे गोपनीय और परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियों में से एक जिब्राल्टर पहुँच चुकी है, जिसे तेहरान के लिए एक सीधे संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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बाज़ार पर असर और नेतृत्व का संकट
शांति वार्ता विफल होने की खबरों के साथ ही वैश्विक तेल बाज़ारों में उबाल आ गया है। आपूर्ति बाधित होने के डर से कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
वहीं, ईरान के भीतर नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति ने तेहरान के निर्णय लेने की प्रक्रिया को और अधिक पेचीदा बना दिया है।
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान के भीतर अलग-अलग गुट अलग-अलग दिशाओं में काम कर रहे हैं, जिससे बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुँच पा रही है।
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इज़रायल-लेबनान मोर्चे पर भी भारी तबाही
एक तरफ जहाँ वॉशिंगटन और तेहरान के बीच राजनयिक युद्ध चल रहा है, वहीं ज़मीनी हकीकत और भी भयावह है। इज़रायल की लेबनान पर बमबारी जारी है।
पिछले 24 घंटों में 51 लोगों की जान जाने की खबर है, जिनमें चिकित्सा कर्मी भी शामिल हैं। हिज़बुल्ला ने भी इज़रायली सैनिकों पर जवाबी हमलों का दावा किया है।
क्या युद्ध ही एकमात्र विकल्प है?
वॉशिंगटन अब इज़रायल और लेबनान के बीच बातचीत के नए दौर को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान के साथ गतिरोध पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता फिलहाल बेअसर साबित हो रही है। यदि अगले कुछ दिनों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर कोई ठोस सहमति नहीं बनती, तो ‘प्रोजेक्ट फ़्रीडम’ के तहत सैन्य टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।ईरान युद्ध सीज़फ़ायर की घोषणा ईरान युद्ध सीज़फ़ायर शुरू।
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