पीएम मोदी नॉर्वे दौरा ऐतिहासिक स्वागत: मिला 32वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान,
पीएम मोदी नॉर्वे दौरा भारत की वैश्विक कूटनीति और ‘सॉफ्ट पावर’ ने आज नॉर्डिक देशों के राजनीतिक केंद्र ओस्लो में एक नया इतिहास रच दिया। संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड और स्वीडन की सफल यात्राएं पूरी करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को अपने पांच देशों के दौरे के चौथे चरण में नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंचे।
बीते 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली नॉर्वे यात्रा है। इस ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने स्वयं हवाई अड्डे पर पहुंचकर प्रोटोकॉल तोड़ते हुए पीएम मोदी का आत्मीय स्वागत किया।
इस यात्रा की शुरुआत ही बेहद गौरवपूर्ण रही, जब नॉर्वे के राजा हेराल्ड V ने ओस्लो पैलेस में प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ के ‘ग्रैंड क्रॉस’ से नवाजा।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों और दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने में मोदी के ‘दूरदर्शी नेतृत्व’ के लिए दिया गया यह सम्मान उनके राजनीतिक जीवन का 32वां अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि ठीक एक दिन पहले ही स्वीडन ने भी उन्हें अपने सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ से सम्मानित किया था।
‘युद्ध से नहीं, संवाद से निकलेगा हल’: ओस्लो से शांति का संदेश
हवाई अड्डे पर गर्मजोशी से भरे स्वागत के बाद प्रधानमंत्री मोदी और नॉर्वे के पीएम जोनास गहर स्टोर के बीच द्विपक्षीय और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई। साझा प्रेस वक्तव्य के दौरान, यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी वैश्विक तनावों के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के वैश्विक शांति और नियमों पर आधारित व्यवस्था (Rules-Based Order) के संकल्प को दोहराया।
पीएम मोदी ने कूटनीतिक मंच से दोटूक शब्दों में कहा, “भारत और नॉर्वे, दोनों ही संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानूनों में अटूट विश्वास रखते हैं। हमारा हमेशा से यह मानना रहा है कि दुनिया का कोई भी मुद्दा या विवाद सिर्फ सैन्य संघर्ष या युद्ध के जरिए हल नहीं किया जा सकता।
बातचीत और कूटनीति ही स्थायी समाधान का एकमात्र रास्ता हैं।” बैठक में वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों ने एकजुटता दिखाई। मोदी ने उस पल को याद किया जब एक साल पहले पहलगाम आतंकी हमले के कारण उन्हें अपनी नॉर्वे यात्रा स्थगित करनी पड़ी थी, और उस कठिन समय में नॉर्वे जिस तरह भारत के साथ खड़ा रहा, उसके लिए उन्होंने पीएम स्टोर का विशेष आभार व्यक्त किया।
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‘ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’: स्वच्छ ऊर्जा और नीली अर्थव्यवस्था पर बड़ा दांव
इस द्विपक्षीय वार्ता का सबसे बड़ा रणनीतिक नतीजा दोनों देशों के बीच संबंधों को ‘हरित रणनीतिक साझेदारी’ (Green Strategic Partnership) के स्तर पर ले जाने की सहमति के रूप में सामने आया। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के दौर में यह साझेदारी दोनों देशों के आर्थिक भविष्य को नई दिशा देगी।
इस नए कूटनीतिक ढांचे के तहत भारत और नॉर्वे स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy), हरित बदलाव (Green Transition), और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी आदान-प्रदान बढ़ाएंगे। इसके साथ ही, समुद्र विज्ञान और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग यानी ‘नीली अर्थव्यवस्था’ (Blue Economy) को लेकर भी दोनों पक्षों में सहमति बनी।
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, भारत-EFTA (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते के बाद व्यापार, तकनीकी सहयोग और भारत में रोजगार सृजन के विशाल अवसर खुले हैं, जिन पर दोनों प्रधानमंत्रियों ने गहराई से विचार-विमर्श किया। इसके अलावा अंतरिक्ष अनुसंधान, एआई (AI), चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) और आर्कटिक क्षेत्र में वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाने पर भी रोडमैप तैयार किया गया।
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तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन पर टिकी दुनिया की नजरें
ओस्लो कूटनीति का अगला सबसे बड़ा पड़ाव मंगलवार को होने वाला तीसरा ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ है। इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में मेजबान नॉर्वे के अलावा डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के प्रधानमंत्री भी हिस्सा ले रहे हैं। भू-राजनीतिक दृष्टि से यह सम्मेलन भारत के लिए बेहद अहम है क्योंकि नॉर्डिक देश तकनीक, नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास के वैश्विक लीडर माने जाते हैं।
भारत इस मंच का उपयोग नॉर्डिक देशों के निवेश को भारतीय विनिर्माण क्षेत्र (Make in India) की तरफ आकर्षित करने के लिए करेगा। इससे पहले, अपनी स्वीडन यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ ‘संयुक्त इनोवेशन साझेदारी 2.0’ और ‘भारत-स्वीडन टेक एवं एआई कॉरिडोर’ की शुरुआत की थी, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
ठीक इसी तर्ज पर नीदरलैंड के साथ भी भारत का व्यापारिक गणित मजबूत हुआ है, जहां 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 27.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है और नीदरलैंड 55.6 अरब डॉलर के कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के साथ भारत का चौथा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक बना हुआ है।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह नॉर्डिक दौरा महज एक रस्मी राजनयिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह यूरोप के इस अत्यंत समृद्ध और तकनीक-संपन्न हिस्से में भारत की पैठ मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीतिक बिसात है।
नॉर्वे और स्वीडन द्वारा बैक-टू-बैक अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से मोदी को नवाजना यह साबित करता है कि वैश्विक समुदाय अब भारत को केवल एक विकासशील बाजार के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति को संतुलित करने वाले एक जिम्मेदार और अपरिहार्य खिलाड़ी के रूप में देखता है।
खाली बयानों के बजाय स्वच्छ ऊर्जा, एआई कॉरिडोर और ‘हरित रणनीतिक साझेदारी’ जैसे ठोस आर्थिक और तकनीकी समझौतों पर ध्यान केंद्रित करना भारतीय विदेश नीति की परिपक्वता को दर्शाता है। पीएम मोदी नॉर्वे दौरा: द्विपक्षीय संबंधों के लिए अहम है पीएम मोदी नॉर्वे दौरा
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