बराकाह परमाणु संयंत्र के पास ड्रोन हमला: UAE को दहलाने की बड़ी साज़िश,
बराकाह परमाणु संयंत्र हमला मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी भारी सैन्य गतिरोध के बीच एक बेहद खतरनाक अध्याय जुड़ गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अल धाफ्रा क्षेत्र में स्थित ‘बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र’ (Barakah Nuclear Power Plant) की भीतरी सीमा के ठीक बाहर एक संदिग्ध ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई। 17 मई की सुबह हुए इस हमले ने वैश्विक बिरादरी और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
यद्यपि इस हमले की आधिकारिक तौर पर किसी भी देश या संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन रणनीतिक विश्लेषकों का सीधा इशारा ईरान और उसके समर्थक उग्रवादी गुटों की तरफ है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और अमेरिका-इज़राइल गठबंधन के बीच फिर से पूर्ण पैमाने पर युद्ध छिड़ने की अफवाहें और खुफिया इनपुट गर्म हैं।
संयंत्र की सीमा पर धमाका: बाल-बाल बची बड़ी परमाणु त्रासदी
अबू धाबी मीडिया ऑफिस द्वारा रविवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, ड्रोन ने परमाणु संयंत्र के ठीक बाहर स्थित एक इलेक्ट्रिकल जनरेटर को निशाना बनाया। हमले के तुरंत बाद वहां भयंकर लपटें उठने लगीं। हालांकि, यूएई के सुरक्षा तंत्र और दमकल विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए आग पर काबू पा लिया।
राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ है। यूएई के ‘फेडरल अथॉरिटी फॉर न्यूक्लियर रेगुलेशन’ (FANR) ने स्पष्ट किया कि इस हमले से परमाणु संयंत्र की मुख्य प्रणालियों या रिएक्टरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
सभी चारों इकाइयां सामान्य रूप से कार्य कर रही हैं और पर्यावरण में किसी भी प्रकार का रेडियोधर्मी रिसाव (Radiological Leak) दर्ज नहीं किया गया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अरब प्रायद्वीप के इस एकमात्र और $20 बिलियन की लागत से बने परमाणु संयंत्र को निशाना बनाना एक बेहद खतरनाक संकेत है।
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ईरान के निशाने पर क्यों आ रहा है UAE?
फरवरी 2026 में जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के भीतर सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले शुरू किए थे, तब से खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं।
ईरान का मानना है कि खाड़ी के कुछ देश इज़राइल और अमेरिकी सेना को खुफिया सहायता या ठिकाने उपलब्ध करा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ महीनों में ईरान ने यूएई को निशाना बनाकर कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
यूएई के विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल-मरार ने हाल ही में ब्रिक्स (BRICS) और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) की बैठकों में अपनी संप्रभुता पर हो रहे इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की थी।
उन्होंने खुलासा किया था कि फरवरी 2026 से अब तक यूएई की वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems) ने लगभग 3,000 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया है।
इन हमलों का सीधा मकसद हवाई अड्डों, तेल रिफाइनरियों और पानी के विलवणीकरण (Desalination) संयंत्रों जैसे नागरिक और आर्थिक बुनियादी ढांचों को तबाह करना था।
रणनीतिक विकल्प: होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से निपटने की तैयारी
इस ताजा ड्रोन हमले के पीछे एक और बड़ी वजह यूएई की नई तेल निर्यात रणनीति को माना जा रहा है। ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ‘होर्मुज़ जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लगभग पूरी तरह से बंद कर रखा है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा का अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया है।
इस नाकेबंदी को मात देने के लिए अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने सरकारी तेल कंपनी ADNOC को फुजैरा के रास्ते एक नई पाइपलाइन परियोजना पर काम तेज करने का निर्देश दिया है।
यह पाइपलाइन अगले साल शुरू होने वाली है, जिससे यूएई होर्मुज़ मार्ग पर निर्भर रहे बिना अपना तेल सीधे अरब सागर के जरिए दुनिया को भेज सकेगा। ईरान इस आर्थिक बाईपास से बौखलाया हुआ है, और यही कारण है कि फुजैरा और अबू धाबी के ऊर्जा संयंत्रों पर लगातार खतरे मंडरा रहे हैं।
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इज़राइल हाई अलर्ट पर; मध्यस्थता की कोशिशें नाकाम
यूएई के ‘अल-ऐन मीडिया’ की रिपोर्टों के अनुसार, बराकाह संयंत्र पर हमले के बाद इज़राइल की सेना भी हाई अलर्ट पर आ गई है। खुफिया सूत्रों का दावा है कि यदि ईरान या उसके छद्म गुटों (Proxies) ने खाड़ी के परमाणु ठिकानों पर हमले जारी रखे, तो इज़राइल ईरान के भीतर उसके राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे, बिजली ग्रिड और शीर्ष अधिकारियों को निशाना बनाकर एक बड़ा जवाबी हमला कर सकता है।
वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की बातचीत पूरी तरह ठप पड़ी है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कलीबाफ, जो अब तक वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे, अब बीजिंग के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में जुट गए हैं।
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संपादकीय निष्कर्ष:
बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुआ यह हमला वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से एक ‘रेड लाइन’ को पार करने जैसा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ज़ापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र की स्थिति ने दुनिया को डराया था, और अब खाड़ी क्षेत्र में परमाणु ठिकानों को युद्ध के दायरे में लाना पूरे विश्व को तबाही की ओर धकेल सकता है।
यदि संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक शक्तियां तुरंत हस्तक्षेप कर खाड़ी देशों और ईरान के बीच कूटनीतिक संवाद बहाल नहीं कराती हैं, तो यह छिटपुट ड्रोन हमला एक विनाशकारी क्षेत्रीय महायुद्ध का रूप ले सकता है।
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