Loading Now

भोजशाला हाई कोर्ट फैसला : हिंदुओं को मिला स्थायी पूजा का अधिकार,

भोजशाला हाई कोर्ट फैसला

अयोध्या और वाराणसी (ज्ञानवापी) के बाद देश के एक और बड़े और संवेदनशील धार्मिक स्थल विवाद पर न्यायपालिका का बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने धार जिले में स्थित सदियों पुराने विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर एक युगांतकारी निर्णय सुनाया है।

कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में इस परिसर को परमार वंश के राजा भोज द्वारा निर्मित माँ सरस्वती (वाग्देवी) का पवित्र मंदिर और संस्कृत अध्ययन का प्राचीन केंद्र माना है।

अपने 242 पन्नों के विस्तृत फैसले में माननीय उच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल, 2003 के उस पुराने व्यवस्थात्मक आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया है, जिसके तहत हिंदुओं को केवल मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज़ अदा करने की अनुमति दी गई थी।

कोर्ट के नए आदेश के बाद अब हिंदू पक्ष को परिसर में स्थायी रूप से नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करने का वैधानिक अधिकार मिल गया है।

‘यह राजा भोज का सरस्वती मंदिर है’: हिंदू पक्ष के दावों पर कोर्ट की मुहर

अदालत के बाहर मीडिया से बात करते हुए हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे देश के प्रख्यात सर्वोच्च न्यायालय के वकील विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले की बारीकियों को साझा किया। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे न्याय की जीत बताया।

विष्णु शंकर जैन ने कहा:

“इंदौर हाई कोर्ट ने हमारे द्वारा पेश किए गए तमाम पुरातात्विक और ऐतिहासिक साक्ष्यों को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने माना है कि यह पूरी संपत्ति वर्ष 1951 में जारी एएसआई नोटिफिकेशन की एंट्री संख्या 90 के दायरे में आती है और प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्व स्थल अधिनियम (ASI Act), 1958 की धारा 16 के तहत संरक्षित है।

अदालत ने साफ कर दिया है कि परिसर पर प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह एएसआई का ही रहेगा, लेकिन इस अधिनियम की धारा 16 के प्रावधानों के तहत हिंदू पक्ष को वहाँ बिना किसी बाधा के दैनिक पूजा-पाठ करने का अधिकार होगा।”

लंदन से वापस आएगी माँ वाग्देवी की मूर्ति; मुस्लिम पक्ष के लिए वैकल्पिक ज़मीन का सुझाव

इस अदालती फैसले में एक और सबसे बड़ा और दूरगामी पहलू माँ सरस्वती (वाग्देवी) की उस ऐतिहासिक और दुर्लभ मूर्ति से जुड़ा है, जिसे ब्रिटिश काल के दौरान भारत से ले जाया गया था और जो वर्तमान में लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी हुई है।

हिंदू पक्ष की ओर से कोर्ट में इस मूर्ति को ससम्मान भारत वापस लाने की पुरजोर मांग की गई थी। इस पर उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार को कूटनीतिक और कानूनी स्तर पर उचित कदम उठाने और इस अनुरोध पर गंभीरता से विचार करने के निर्देश जारी किए हैं।

इसके साथ ही, सांप्रदायिक संतुलन और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हाई कोर्ट ने एक बड़ा और व्यावहारिक सुझाव भी दिया है। कोर्ट ने कहा कि चूकि 2003 का वह आदेश रद्द हो चुका है जिसके तहत मुस्लिम पक्ष वहाँ शुक्रवार को सामूहिक नमाज़ पढ़ता आ रहा था, इसलिए मुस्लिम समुदाय चाहे तो धार क्षेत्र के भीतर मस्जिद और नमाज़ के लिए सरकार के समक्ष आवेदन देकर किसी दूसरी उपयुक्त ज़मीन की मांग कर सकता है।

कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह ऐसी किसी भी मांग पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए वैकल्पिक भूमि आवंटित करने पर विचार करे।

इसे भी पढ़े : त्विशा शर्मा केस भोपाल नया CCTV फुटेज और माँ के साथ चैट आई सामने,

राजनीतिक स्वागत और प्रशासनिक मुस्तैदी: अयोध्या जैसी साख बनाए रखने की अपील

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय का पुरजोर स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार की भोजशाला का सत्य अब कानूनी रूप से स्थापित हो चुका है और यह वास्तव में हमारी आराध्य माँ वाग्देवी का भव्य मंदिर है। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि लंदन से माँ सरस्वती की प्राचीन प्रतिमा को वापस लाने के लिए राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर हर संभव कूटनीतिक प्रयास करेगी।

इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश की जनता से एक भावुक अपील करते हुए कहा कि वे अयोध्या के राम मंदिर फैसले की तरह ही इस मोड़ पर भी पूरे देश के सामने आपसी भाईचारे, शांति और सामाजिक सौहार्द की एक बेमिसाल मिसाल पेश करें।

अदालती आदेश आने के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने रविवार को धार स्थित भोजशाला मंदिर का दौरा किया और वहां दर्शन-पूजन किए। उन्होंने इस फैसले को करोड़ों सनातनियों की आस्था का सम्मान बताते हुए क्षेत्र की जनता को बधाई दी।

इधर, प्रशासनिक स्तर पर धार के कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और पुलिस अधीक्षक (SP) सचिन शर्मा ने कमान संभाल ली है। कलेक्टर मीणा ने बताया कि कोर्ट के आदेश और एएसआई के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही परिसर के भीतर पूजा-पाठ की नई और स्थायी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एसपी ने कहा कि क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और पुलिस की टीमें स्थानीय नागरिकों के साथ जनसंपर्क बैठकें कर रही हैं ताकि फैसले को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाह न फैले और शहर की सांप्रदायिक शांति अक्षुण्ण बनी रहे।

इसे भी पढ़े :केरल मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण” वी. डी. सतीशन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

मुस्लिम पक्ष का रुख: ‘फैसले का अध्ययन जारी, जरूरत पड़ी तो जाएंगे सुप्रीम कोर्ट’

दूसरी तरफ, मुस्लिम समुदाय और मस्जिद कमेटी ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए संयम और कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है। धार शहर के काज़ी वकार सादिक ने कहा कि हाई कोर्ट का यह फैसला काफी विस्तृत (242 पन्ने) है, और उनके कानूनी विशेषज्ञों की टीम इस आदेश की एक-एक पंक्ति का गहन कानूनी विश्लेषण कर रही है।

शहर काजी ने स्पष्ट किया कि यदि फैसले की कॉपियों में नमाज़ पढ़ने पर पूरी तरह और साफ तौर पर पाबंदी लगाने की बात सामने आती है, तो उनके पास देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

हालांकि, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनकी सबसे पहली प्राथमिकता धार शहर की अमन-चैन और गंगा-जमुनी तहज़ीब को बनाए रखना है। उन्होंने स्थानीय मुस्लिम समाज से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा कि कानून के दायरे में रहकर ही आगे का कोई भी कदम उठाया जाएगा।

इसे भी पढ़े : पीएम मोदी नॉर्वे दौरा ऐतिहासिक स्वागत: मिला 32वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान,

संपादकीय दृष्टिकोण:

धार भोजशाला को लेकर आया मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का यह फैसला भारतीय न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण नजीर बनेगा। कोर्ट ने जहाँ एक तरफ एएसआई की पुरातात्विक साक्ष्यों की रिपोर्ट के आधार पर ऐतिहासिक सत्य को स्वीकारते हुए हिंदुओं को उनके धार्मिक अधिकार सौंपे, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि देने की बात कहकर एक संतुलित न्यायशास्त्रीय दृष्टिकोण (Jurisprudential Approach) अपनाने का प्रयास किया है।

अब यह पूरी तरह स्थानीय प्रशासन और दोनों समुदायों के प्रबुद्ध नेतृत्व पर निर्भर करता है कि वे इस कानूनी मोड़ को किसी टकराव का जरिया बनाने के बजाय, आपसी समन्वय और शांति के साथ देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को मजबूत करने का माध्यम बनाएं। ऐतिहासिक भोजशाला हाई कोर्ट फैसला भोजशाला हाई कोर्ट फैसला के बाद सुरक्षा सख्त

इसे भी पढ़े : योगी आदित्यनाथ नमाज़ चेतावनी ‘प्यार से नहीं माने दूसरा तरीकाCM की दोटूक,

Spread the love

Post Comment

You May Have Missed