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बंगाल की फलता विधानसभा पर दोबारा मतदान TMC के जहांगीर खान हटे,

फलता विधानसभा दोबारा मतदान

फलता विधानसभा दोबारा मतदान पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के ऐतिहासिक मोड़ के बीच, दक्षिण 24 परगना जिले की सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील ‘144-फलता विधानसभा सीट’ पर गुरुवार (21 मई, 2026) सुबह 7 बजे से भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच पुनर्मतदान (Re-polling) शुरू हो गया है।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 58(2) के तहत दिए गए विशेष निर्देशों के बाद फलता के सभी 285 मतदान केंद्रों पर नए सिरे से वोट डाले जा रहे हैं। शाम 6 बजे तक चलने वाली इस वोटिंग प्रक्रिया के नतीजे आगामी 24 मई को घोषित किए जाएंगे।

यह पुनर्मतदान इसलिए बेहद असाधारण है क्योंकि हाल ही में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा चुनाव की सभी 293 सीटों के नतीजे 4 मई को ही घोषित हो चुके हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ऐतिहासिक बहुमत हासिल कर राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाई है।

ऐसे में भाजपा फलता में भी अपनी जीत का परचम लहराकर नई पकड़ मजबूत करना चाहती है, जबकि टीएमसी डायमंड हार्बर बेल्ट के अपने इस पारंपरिक गढ़ को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रही है।

क्यों रद्द हुआ था पिछला मतदान? ‘एडहेसिव टेप और परफ्यूम कांड’

फलता में मूल मतदान बीते 29 अप्रैल को हुआ था। लेकिन उस दौरान बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली, मतदाताओं को डराने-धमकाने और सबसे गंभीर रूप से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के साथ छेड़छाड़ की शिकायतें सामने आईं।

भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने आरोप लगाया था कि बूथ संख्या 177, 144 और 189 सहित दर्जनों केंद्रों पर भाजपा के चुनाव चिह्न (कमल) के सामने वाले बटन पर सफेद एडहेसिव टेप चिपका दिया गया था, ताकि मतदाता वहां बटन न दबा सकें। इसके अलावा कई बूथों पर ईवीएम बटनों पर स्याही, काला टेप और अजीबोगरीब परफ्यूम के निशान पाए गए ताकि वोटिंग प्रक्रिया को बाधित किया जा सके।

विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि निर्वाचन क्षेत्र के कई बूथों पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के रुख जानबूझकर मोड़ दिए गए थे, जिससे लाइव वेबकास्टिंग ठप हो गई थी।

कुल 77 गंभीर शिकायतों में से 32 शिकायतें अकेले फलता से थीं। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल द्वारा इन अनियमितताओं की पुष्टि किए जाने के बाद केंद्रीय चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल के मतदान को पूरी तरह से ‘रद्द’ घोषित कर दिया था।

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सुरक्षा व्यवस्था दोगुनी: हर बूथ पर 8 केंद्रीय जवान और 3 वेब कैमरे

पिछली गलतियों और हिंसा से सबक लेते हुए चुनाव आयोग इस बार किसी भी चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ रहा है। फलता में स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती को ठीक दोगुना कर दिया गया है।

सुरक्षा बलों का सेक्शन: 29 अप्रैल को जहां प्रत्येक बूथ पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के केवल 4 जवान (आधा सेक्शन) तैनात थे, वहीं आज हर एक बूथ पर 8 जवानों (एक पूरा सेक्शन) को तैनात किया गया है।केंद्रीय बलों की 35 कंपनियां: शांति बनाए रखने के लिए पूरे क्षेत्र में अर्धसैनिक बलों की लगभग 35 कंपनियां गश्त कर रही हैं।

क्विक रिस्पॉन्स टीमें (QRT): किसी भी बूथ पर झड़प या तनाव की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई के लिए 30 क्यूआरटी टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।त्रिनेत्र निगरानी: सुरक्षा को डिजिटल रूप से अभेद्य बनाने के लिए हर बूथ पर 3 वेब कैमरे लगाए गए हैं—दो मतदान केंद्र के भीतर और एक बाहर—ताकि दिल्ली और कोलकाता में बैठे निर्वाचन अधिकारी सीधे लाइव वेबकास्टिंग के जरिए जमीनी हालात पर नजर रख सकें।

‘पुष्पा’ का चौंकाने वाला सरेंडर: मतपत्र पर नाम, मगर टीएमसी रेस से बाहर

इस पुनर्मतदान के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर और भूचाल तब आया, जब तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर स्थानीय नेता और उम्मीदवार जहांगीर खान ने वोटिंग से ठीक दो दिन पहले अचानक अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का एलान कर दिया। जहांगीर खान, जिन्होंने पूरे चुनाव प्रचार में दक्षिण भारतीय फिल्म के किरदार ‘पुष्पा’ की तर्ज पर अपनी विद्रोही और “झुकेंगे नहीं” वाली छवि बनाई थी, उन्होंने मैदान छोड़ दिया।

जहांगीर खान ने एक भावुक बयान जारी करते हुए दावा किया कि पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने फलता के विकास के लिए एक ‘विशेष आर्थिक पैकेज’ की घोषणा की है, और वह अपने ‘स्वर्णिम फलता’ के सपने को पूरा करने तथा इलाके में शांति बनाए रखने के लिए इस पैकेज के समर्थन में चुनाव से पीछे हट रहे हैं।

हालांकि, टीएमसी ने तुरंत खान के इस कदम से पल्ला झाड़ते हुए इसे उनका ‘व्यक्तिगत और दबाव में लिया गया फैसला’ करार दिया। तकनीकी रूप से, चूंकि नाम वापसी की कानूनी समय सीमा काफी पहले समाप्त हो चुकी थी, इसलिए जहांगीर खान का नाम और टीएमसी का सिंबल ईवीएम और मतपत्र पर बना रहेगा, लेकिन वे सक्रिय दौड़ से बाहर हैं।

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‘झुकेंगे नहीं’ से ‘मैं जा रहा हूँ’ तक: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का तीखा हमला

जहांगीर खान के इस फैसले पर तंज कसने में पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कोई देर नहीं की। फलता के मतदाताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने खान का जमकर मजाक उड़ाया।

सुवेंदु अधिकारी ने चुटकी लेते हुए कहा:

“आप खुद को ‘भाइपो’ (भतीजे) का सबसे करीबी बताते थे और पूरे चुनाव में कहते फिरते थे कि ‘पुष्पा झुकेगा नहीं’। लेकिन जब दोबारा चुनाव की बारी आई और निष्पक्ष वोटिंग का पहरा लगा, तो यही पुष्पा आज कह रहा है कि ‘मैं जा रहा हूँ’।

उन्हें अच्छी तरह समझ आ गया था कि जमीन पर उनके लिए पोलिंग एजेंट तक मिलने वाले नहीं हैं और वे बुरी तरह हार रहे हैं। फलता के लोगों को पूरे 10 साल बाद बिना किसी डर के खुलकर वोट देने का यह लोकतांत्रिक अधिकार मिला है। आप शत-प्रतिशत मतदान करें, फलता के विकास की पूरी जिम्मेदारी अब मेरी सरकार की है।”

दूसरी तरफ, भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने पुनर्मतदान का स्वागत करते हुए अपनी जीत के प्रति भारी आत्मविश्वास जताया है। पांडा ने दावा किया कि इस बार फलता की जनता टीएमसी के गुंडा-राज और धांधली का जवाब बैलेट से दे रही है और भाजपा यहाँ 1 लाख से 1.5 लाख वोटों के ऐतिहासिक अंतर से विजयी होगी।

गौरतलब है कि इस त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला और माकपा (CPIM) के शंभू नाथ कुर्मी भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

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संपादकीय दृष्टिकोण:

फलता का यह पुनर्मतदान केवल एक सीट का उप-चुनाव नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल में नए सिरे से स्थापित हो रही राजनीतिक शुचिता की परीक्षा है। चुनाव आयोग द्वारा सुरक्षा बलों की तैनाती दोगुनी करना और तकनीक का कड़ा पहरा लगाना यह साबित करता है कि अब बंगाल की चुनावी संस्कृति से ‘बूथ कैप्चरिंग’ और ‘ईवीएम टेंपरिंग’ के दौर को खत्म करने का समय आ गया है।

टीएमसी उम्मीदवार का ऐन वक्त पर मैदान छोड़ना इस बात का स्पष्ट कूटनीतिक संकेत है कि सत्ता परिवर्तन के बाद अब जमीनी स्तर पर प्रशासनिक संरक्षण बदल चुका है। फलता के मतदाताओं का आज का फैसला यह तय करेगा कि डायमंड हार्बर की इस बेल्ट में बदलाव की यह लहर कितनी गहरी है। फलता विधानसभा दोबारा मतदान, आज दांव पर है दिग्गजों की किस्मत सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच शुरू हुआ फलता विधानसभा दोबारा मतदान

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