Loading Now

MV Ruen केस में 35 सोमाली लुटेरों को उम्रकैद;

सोमाली लुटेरों को उम्रकैद

सोमाली लुटेरों को उम्रकैद समुद्री डकैती और अंतरराष्ट्रीय अपराध के खिलाफ भारत की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) नीति पर एक बार फिर ऐतिहासिक मुहर लगी है। मुंबई सत्र अदालत ने माल्टा के झंडे वाले मालवाहक जहाज ‘एमवी रुएन’ (MV Ruen) के अपहरण मामले में गिरफ्तार सभी 35 सोमाली समुद्री डाकुओं को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सख्त सजा सुनाई है। इसके साथ ही, भारत ने समुद्री डकैती के मुकदमों (Piracy Trials) में अपना 100 प्रतिशत सजा दिलाने का शत-प्रतिशत रिकॉर्ड बरकरार रखा है।

इस हाई-प्रोफाइल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामले की जांच अधिकारी (IO) रहीं रायगढ़ पुलिस के अलीबाग सब-डिवीजन की डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) माया मोरे (जिन्होंने 2024 में दक्षिण मुंबई के येलो गेट डिवीजन में ACP के रूप में काम किया था) और विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) एडवोकेट रणजीत वी. सांगले ने ‘मिड-डे’ के साथ बातचीत में जांच और कानूनी लड़ाई के दौरान आई अभूतपूर्व चुनौतियों का विस्तृत ब्योरा साझा किया है।

मार्च 2024 का साहसिक ऑपरेशन: नौसेना का ’40 घंटे का एक्शन’

दिसंबर 2023 में हथियारों से लैस सोमाली समुद्री डाकुओं ने अरब सागर में माल्टा के ध्वज वाले बल्क कैरियर ‘एमवी रुएन’ को हाईजैक कर लिया था और उसके 17 क्रू सदस्यों को करीब तीन महीनों तक बंधक बनाकर रखा था।

मार्च 2024 में भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने करीब 40 घंटे लंबे जटिल और साहसिक एंटी-पायरेसी ऑपरेशन को अंजाम देते हुए सभी 17 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया और 35 सोमाली लुटेरों को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया। इसके तुरंत बाद नौसेना ने ईरानी जहाज ‘अल कंबर 786’ पर भी कार्रवाई कर 9 अन्य सोमाली डाकुओं को दबोचा।

नौसेना ने 35 आरोपियों और जब्त हथियारों को दक्षिण मुंबई के प्रसिद्ध ‘येलो गेट पुलिस स्टेशन’ के सुपुर्द कर दिया, जिसके बाद नए ‘मैरीटाइम एंटी-पायरेसी एक्ट 2022/2023’ के तहत देश का सबसे बड़ा मुकदमा शुरू हुआ।

इसे भी पढ़े :  संसद के मॉनसून सत्र में विधायी रणनीति बनाम विपक्षी हंगामा;

भाषा की दीवार और सुरक्षा की चुनौती: DSP माया मोरे की आपबीती

जांच की कमान संभालने वाली तत्कालीन एसीपी और वर्तमान डीएसपी माया मोरे ने बताया कि यह मामला उनके करियर की सबसे अलग और जटिल जांच थी।

सोमाली भाषा की बाधा और पुणे यूनिवर्सिटी का छात्र: DSP माया मोरे के अनुसार, “आरोपी केवल सोमाली भाषा बोल रहे थे। हमें समझ ही नहीं आ रहा था कि वे क्या कह रहे हैं। हमने तुरंत विभिन्न प्रशासनिक व शैक्षणिक विभागों से संपर्क किया। आखिरकार, हमें पुणे यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे इस्माइल नाम के एक सोमाली छात्र के रूप में अनुवादक (Translator) मिला। उसकी मदद से हमने अपने प्रश्नों और उनके बयानों का सटीक अनुवाद किया।”

35 आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ: जांच टीम ने किसी भी साजिश या बयानों में फेरबदल को रोकने के लिए सभी 35 आरोपियों को अलग-अलग आइसोलेशन में रखा। विदेशी नागरिकों का अप्रत्याशित व्यवहार देखते हुए प्रत्येक आरोपी की सुरक्षा और निगरानी के लिए 3 से 4 सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।

6 महीने में चार्जशीट दाखिल: येलो गेट पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर सुशांत सावंत, अजय कदम, हेड कांस्टेबल शिंत्रे, गणेश सानप और अविनाश खैरनार की टीम ने महज छह महीनों (सितंबर 2024) में पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक व भौतिक साक्ष्यों के साथ अदालत में विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी। डीएसपी मोरे ने मराठी की प्रसिद्ध कहावत “देव संधीचं सोनं करायला शिकवतो” (ईश्वर आपको मिले अवसर को सोने में बदलने का हुनर सिखाते हैं) का जिक्र करते हुए कहा कि यह देश की सेवा करने का एक दुर्लभ मौका था।

इसे भी पढ़े :  CJP के ‘चलो संसद’ मार्च में संग्राम; दिल्ली पुलिस का लाठीचार्ज,

    100% सजा का रिकॉर्ड और पीएम मोदी के साथ बातचीत का संस्मरण

    भारत के सात में से छह समुद्री डकैती के ट्रायल लड़ चुके विशेष लोक अभियोजक रणजीत वी. सांगले ने अदालत के फैसले को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के इतिहास में मील का पत्थर करार दिया।

    एडवोकेट सांगले ने 2012 का एक विशेष संस्मरण साझा करते हुए बताया:

    “जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब 2012 में मेरी उनसे मुलाकात हुई थी। समुद्री डकैती के मामलों पर चर्चा के दौरान उन्होंने मुझसे कहा था—’रंजीत, मुझे इस मामले में सख्त कार्रवाई चाहिए।

    जो भी कानूनी कदम उठाने पड़ें उठाओ, लेकिन ये समुद्री लुटेरे भारतीय न्यायिक क्षेत्र से छूटकर वापस नहीं जाने चाहिए।’ आज एमवी रुएन और अल कंबर 786 के सभी 44 सोमाली डाकुओं को उम्रकैद मिलना उसी प्रतिबद्धता का परिणाम है।”

    इसे भी पढ़े :  “नई irctc बीटा वेबसाइट” तत्काल टिकटों के लिए 5 गुना बढ़ी स्पीड,

    मैरीटाइम एंटी-पायरेसी कानून का कड़ा संदेश

    संपादकीय दृष्टि से, भारतीय नौसेना की मुस्तैदी, मुंबई पुलिस की पेशेवर जांच और सरकारी वकीलों की सटीक दलीलों के तालमेल ने यह साबित कर दिया है कि हिंद महासागर (Indian Ocean) में किसी भी प्रकार की समुद्री डकैती या आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    यह फैसला न केवल सोमालियाई तट पर सक्रिय आपराधिक सिंडिकेट्स के लिए कड़ा सबक है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभुत्व को भी रेखांकित करता है।सोमाली लुटेरों को उम्रकैद: समुद्री डकैती के बड़े मामले में कोर्ट का फैसला, सोमाली लुटेरों को उम्रकैद

    इसे भी पढ़े :  सोनम वांगचुक अनशन विवाद भूख हड़ताल के 21वें दिन बड़ा बवाल;

    Spread the love

    Post Comment

    You May Have Missed