असम कम बारिश बाढ़ कारण जानिए 2 दिनों की मूसलाधार बारिश का सच
असम कम बारिश बाढ़ कारण पूर्वोत्तर भारत का राज्य असम इस मॉनसून सत्र में एक अजीब और गंभीर जलवायु विरोधाभास का सामना कर रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 28 जुलाई के बीच राज्य में सामान्य (28,487 मिमी) की तुलना में महज 19,913 मिमी बारिश हुई है—यानी औसतन 30% की भारी कमी।
राज्य के 33 में से 23 जिलों में सूखा जैसे हालात थे। इसके बावजूद, असम के कई जिले भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए, 4.45 लाख से अधिक आबादी प्रभावित हुई और 75 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
जलवायु वैज्ञानिकों और जल-प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति ‘कम बारिश’ और ‘अत्यधिक केंद्रित बारिश’ (Extreme Concentrated Rainfall) के घातक संयोजन का नतीजा है, जिसने राज्य की पारंपरिक बाढ़ प्रबंधन प्रणाली को ध्वस्त कर दिया।
दो दिनों का तांडव: 19 और 20 जुलाई की मूसलाधार बारिश
मौसम संबंधी आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि पूरे मॉनसून का औसतन 60 से 70 प्रतिशत पानी सिर्फ 19 और 20 जुलाई को दो दिनों के भीतर बरस गया।
गोलाघाट में रिकॉर्ड बारिश: इन दो दिनों के भीतर अकेला गोलाघाट जिला 161 मिमी बारिश से जलमग्न हो गया।
धनसिरी और ब्रह्मपुत्र का उफान: नुमालीगढ़ में धनसिरी (दक्षिण) नदी का जलस्तर कुछ ही घंटों में खतरे के निशान से 1.25 मीटर ऊपर (79.67 मीटर) पहुँच गया और लगातार 210 घंटों (8 दिनों से अधिक) तक उफान पर रहा।
नेमाटीघाट का आंकड़ा: नेमाटीघाट में ब्रह्मपुत्र नदी 46 घंटों तक खतरे के निशान से ऊपर बहती रही।
जब किसी क्षेत्र में पूरे सीजन की बारिश महज 48 घंटों में सिमट जाती है, तो वहां की नदियाँ, तटबंध और ड्रेनेज सिस्टम उस पानी को संभालने में पूरी तरह असमर्थ साबित होते हैं।
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चराइदेव, शिवसागर और नगांव में सबसे ज्यादा तबाही
असम आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, बाढ़ का सबसे भीषण प्रभाव ऊपरी असम और मध्य असम के जिलों में देखा गया:
चराइदेव: यह असम का एकमात्र ऐसा जिला रहा जहां सामान्य से 40% अधिक बारिश दर्ज की गई। नतीजतन, यहां सर्वाधिक 1,42,756 लोग विस्थापित हुए।
शिवसागर: 35% कम बारिश के बावजूद यहां 97,074 लोग प्रभावित हुए और 22,276 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि जलमग्न हो गई।
नगांव: इस जिले में सामान्य से 60% कम बारिश हुई थी, फिर भी बाढ़ के चरम के दौरान उपग्रह रडार तस्वीरों में जिले का 9% हिस्सा जलमग्न पाया गया।
राज्य भर में लगभग 45,342 हेक्टेयर में लगी ‘साली’ धान की फसल पानी में डूबकर नष्ट हो गई, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति पहुँची है।
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“असम की बाढ़ सिर्फ असम की बारिश से नहीं आती”
इस बार की बाढ़ ने एक बार फिर जल-प्रबंधन के बुनियादी नियम को रेखांकित किया है—असम में बाढ़ का खतरा केवल राज्य की अपनी बारिश पर निर्भर नहीं करता।
निचले और मध्य असम में बहने वाली नदियों (जैसे डिब्रूगढ़, नेमाटीघाट और धुबरी) का जलस्तर पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली भारी बारिश से तय होता है।
ऊपरी कैचमेंट एरिया से आने वाला पानी 3 से 5 दिनों के भीतर मैदानी इलाकों में पहुँचता है। यही कारण है कि नगांव जैसे जिलों में स्थानीय स्तर पर 60% कम बारिश होने के बावजूद ऊपरी इलाकों से आए पानी ने बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी।
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राहत कार्य और मुख्यमंत्री की वित्तीय सहायता की घोषणा
बाढ़ का पानी घटने के साथ ही प्रभावित जिलों की संख्या घटकर 6 रह गई है। हालांकि, शिवसागर, गोलाघाट, चराइदेव, जोरहाट, नगांव और कामरूप मेट्रोपॉलिटन में पुनर्वास का काम जारी है।
असम सरकार और जिला प्रशासनों द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम:
राहत शिविर: राज्य में 81 राहत शिविर और 34 राहत वितरण केंद्र संचालित किए गए, जहां 32,000 से अधिक लोगों ने शरण ली।
अनुग्रह राशि: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मृतक के परिजनों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से अतिरिक्त ₹5 लाख देने की घोषणा की, जिससे कुल सहायता राशि ₹9 लाख हो गई है।
पुनर्वास सहायता: 1 लाख से अधिक बुरी तरह प्रभावित परिवारों को ₹15,000 प्रति परिवार की दर से पुनर्वास राशि देने का निर्णय लिया गया है।
एनडीआरएफ/एसडीआरएफ की तैनाती: शिवसागर के अंदरूनी गांवों में नौकाओं (Boats) के जरिए राशन, पीने का पानी और चिकित्सा सामग्रियां पहुँचाई जा रही हैं।
संपादकीय दृष्टिकोण:
2026 का यह मॉनसून पूर्वोत्तर भारत के लिए एक बड़ा सबक है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में अब वार्षिक बारिश के कुल आंकड़ों (Average Rainfall) के आधार पर आपदा की तैयारी नहीं की जा सकती।
यदि 30% सूखे मॉनसून में 2 दिनों की अतिवृष्टि 3.32 लाख से अधिक लोगों को बेघर कर सकती है, तो सामान्य मॉनसून में स्थिति कितनी भयानक हो सकती है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
असम के तटबंधों, बाढ़ पूर्वानुमान प्रणालियों और आपदा प्रबंधन ढांचे को अब ‘कम समय में अत्यधिक बारिश’ (High Intensity Short Duration Rainfall) के नए पैटर्न के अनुसार री-डिजाइन करना होगा। : मौसम का अनोखा मिजाज, सामान्य से कम बारिश के बावजूद असम कम बारिश बाढ़ संकट में घिरा
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