छत्तीसगढ़ पेपर लीक हाई कोर्ट पूर्व IAS जीवन किशोर ध्रुव की जमानत खारिज
छत्तीसगढ़ पेपर लीक हाई कोर्ट छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सिविल सेवा परीक्षा-2021 और 2022 में हुए बहुचर्चित प्रश्नपत्र लीक और भर्ती धांधली मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अत्यंत सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने मामले के मुख्य आरोपी और CGPSC के पूर्व सचिव व सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव (62) की जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
अदालत ने सुनवाई के दौरान ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करना और लाखों मेधावी छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेलना किसी एक व्यक्ति की ‘हत्या करने से भी अधिक गंभीर अपराध’ है।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “एक हत्या से परिवार, पेपर लीक से पूरा समाज प्रभावित होता है”
जमानत अर्जी पर फैसला सुनाते हुए बिलासपुर उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार और पेपर लीक में शामिल लोक सेवकों के आचरण की कठोर भर्त्सना की।
अपराध की गंभीरता पर टिप्पणी: जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि जब किसी व्यक्ति की हत्या होती है, तो उससे मुख्य रूप से एक परिवार प्रभावित होता है। लेकिन जब किसी राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा का पेपर लीक होता है, तो दिन-रात मेहनत करने वाले लाखों अभ्यर्थियों के करियर, सपनों और पूरे समाज का विश्वास नष्ट हो जाता है।
‘बाड़ ही फसल को खाने लगी’: उच्च न्यायालय ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारियों की यह करतूत ‘रक्षक का ही भक्षक बन जाना’ (बाड़ द्वारा फसल खाना) का प्रत्यक्ष उदाहरण है। जिस अधिकारी पर परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने की संवैधानिक जिम्मेदारी थी, उसी ने पद का दुरुपयोग कर अपने रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया।
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CBI के गंभीर आरोप: बेटे को डिप्टी कलेक्टर बनाने के लिए तोड़ी गोपनीयता
मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पूर्व आईएएस अधिकारी की जमानत का पुरजोर विरोध किया। सीबीआई ने अदालत के समक्ष पुख्ता दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए याचिकाकर्ता की भूमिका को उजागर किया:
गोपनीयता का आपराधिक उल्लंघन: सीबीआई ने अदालत को बताया कि जीवन किशोर ध्रुव तत्कालीन समय में CGPSC के सचिव पद पर तैनात थे। उन्होंने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची और अपने बेटों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र और गोपनीय सामग्री उपलब्ध कराई।
बेटे का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर: जांच एजेंसी ने खुलासा किया कि इस आपराधिक षड्यंत्र का सीधा फायदा उनके बेटे सुमित ध्रुव को मिला, जिसका चयन CGPSC 2021 की परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ था। सीबीआई ने सुमित ध्रुव को भी गिरफ्तार किया है।
फॉरेंसिक व दस्तावेजी साक्ष्य: जांच में सामने आया कि आरोपी के बेटे ने परीक्षा से ठीक पहले जिन चार विशिष्ट विषयों की गहन तैयारी की थी, मुख्य परीक्षा में ठीक वही प्रश्न पूछे गए थे। इसके अलावा, आरोपी के आवास से बरामद दस्तावेज और गवाहों के बयान प्रथम दृष्टया इस गहरी साजिश में उनकी सीधी संलिप्तता की पुष्टि करते हैं।
बचाव पक्ष का तर्क और अदालत का रुख
सुनवाई के दौरान जीवन किशोर ध्रुव के वकील ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को इस मामले में दुर्भावनावश झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष का दावा था कि याचिकाकर्ता की किसी भी पेपर लीक या भर्ती धांधली में कोई प्रत्यक्ष भूमिका साबित करने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं है।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने बचाव पक्ष की दलीलों को पूरी तरह से अमान्य कर दिया। अदालत ने कहा कि राज्य की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा परीक्षा की निष्पक्षता से खिलवाड़ करने वाले ऐसे गंभीर आरोपों को किसी भी दृष्टिकोण से ‘सामान्य या मामूली’ नहीं माना जा सकता।
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CGPSC घोटाले की पृष्ठभूमि और व्यापक असर
यह मामला वर्ष 2021 और 2022 के दौरान आयोजित CGPSC राज्य सेवा परीक्षाओं से जुड़ा है। आरोप हैं कि तत्कालीन आयोग अध्यक्ष, सचिव और प्रभावशाली राजनेताओं तथा नौकरशाहों ने आपस में सांठगांठ करके अपने बेटों, बेटियों और करीबियों को मेरिट सूची में शीर्ष स्थान दिलाकर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य उच्च पदों पर नियुक्त करवाया।
व्यापक जन-आक्रोश और युवाओं के प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सितंबर 2025 में सीबीआई ने पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव और उनके बेटे को गिरफ्तार किया था, जो तब से जेल में बंद हैं।
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संपादकीय विश्लेषण:
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का यह आदेश देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली और पेपर लीक माफिया के खिलाफ एक मजबूत नजीर पेश करता है। ‘पेपर लीक को हत्या से बड़ा अपराध’ करार देकर न्यायपालिका ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रशासनिक पदों पर बैठकर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों के साथ कोई सहानुभूति नहीं बरती जाएगी।
यह फैसला न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के राज्य लोक सेवा आयोगों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और शुचिता बहाल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ पेपर लीक हाई कोर्ट, सीबीआई जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग पर छत्तीसगढ़ पेपर लीक हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
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