JPSC भर्ती परीक्षा विवाद पर गतिरोध: सरकार और छात्रों के बीच वार्ता10 को
JPSC भर्ती परीक्षा विवाद झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्र आंदोलन 14वें दिन में प्रवेश कर गया है। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रमुख छात्र नेता राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।
इस बीच, बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल पर राज्य सरकार के चार प्रमुख मंत्रियों और छात्र प्रतिनिधियों के बीच स्टेट गेस्ट हाउस में पहले दौर की औपचारिक बातचीत हुई।
हालांकि, सरकार द्वारा सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के आश्वासन के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने सहित उनकी सभी मुख्य मांगे पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
तीन श्रेणियों में बंटीं छात्रों की प्रमुख मांगें
JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच और छात्र नेता रवींद्र पासवान के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रियों की समिति के समक्ष अपनी मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया है:
परीक्षाओं को रद्द करना (Cancellation): विवादित 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा को तुरंत रद्द किया जाए। इसके अलावा, TDPL निजी एजेंसी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं तथा पूर्व में विवादित अधिकारियों व संदिग्ध अभय तिवारी की संलिप्तता वाली सभी भर्ती परीक्षाओं को निरस्त करने की मांग की गई है।
केंद्रीय एजेंसियों से निष्पक्ष जांच (Investigation): भर्ती प्रक्रियाओं में हुए वित्तीय भ्रष्टाचार, सांठगांठ और पेपर लीक की गहराई से जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को मामला सौंपा जाए। वैकल्पिक रूप से, राज्य से बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के स्वतंत्र पैनल से जांच कराई जाए।
संरचनात्मक व कार्यप्रणाली में सुधार (Reforms): JPSC और JSSC दोनों आयोगों की कार्यप्रणाली में अमूलचूल परिवर्तन, पारदर्शिता और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए नए वैधानिक नियम लागू किए जाएं।
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हेमंत सोरेन सरकार का रुख: “संवाद से निकलेगा हल, बड़े सुधारों के लिए प्रतिबद्ध”
आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं छात्रों से बातचीत का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार युवाओं की चिंताओं को लेकर अत्यंत गंभीर और संवेदनशील है।
मुख्यमंत्री का वक्तव्य: सीएम सोरेन ने कहा, “हमने वार्ता का द्वार पूरी तरह खोल रखा है। हमारी सरकार हर अभ्यर्थी की पीड़ा और समस्याओं को समझने के लिए उत्सुक है। हम केवल अस्थायी समाधान नहीं चाहते, बल्कि JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली में ऐसे बड़े और ठोस सुधार लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो छात्रों की अपेक्षाओं और राज्य के हित के अनुकूल हों।”
मंत्रियों की समिति की प्रतिक्रिया: बैठक के बाद उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने संवाददाताओं को बताया कि चार मंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की मांगों पर सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्वक विचार कर रही है और इसके परिणाम शीघ्र ही धरातल पर दिखाई देंगे।
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अल्टीमेटम: मांगें पूरी न होने पर 10 अगस्त को ‘विधानसभा मार्च’
सरकार के साथ पहले दौर की वार्ता सकारात्मक माहौल में होने के बावजूद, छात्र संगठनों ने अपना रुख कड़ा रखा है।
आंदोलन रहेगा जारी: छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि वे केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा करके जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से धरना खत्म नहीं करेंगे। भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र महतो और अन्य 6 छात्रों के समर्थन में राज्य भर से परीक्षार्थी रांची पहुंच रहे हैं।
घेराव का ऐलान: छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि रविवार तक 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने और जांच के आदेश जारी करने का लिखित फैसला नहीं लिया जाता है, तो राज्य भर के हजारों छात्र और युवा 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव करने के लिए मार्च करेंगे।
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संपादकीय विश्लेषण:
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर उपजा यह असंतोष केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य और प्रशासनिक साख से जुड़ा बड़ा राजनीतिक मोड़ बन गया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक है—एक तरफ उन्हें परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करनी है, तो दूसरी तरफ आंदोलनरत युवाओं के आक्रोश को शांत कर राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखनी है। आने वाले 48 घंटे यह तय करेंगे कि सरकार और छात्रों के बीच का यह गतिरोध समझौते में बदलता है या फिर विधानसभा घेराव के बड़े टकराव की रूपरेखा तैयार करता है। अभ्यर्थियों के उग्र प्रदर्शन के बीच फिर गरमाया JPSC भर्ती परीक्षा विवाद
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