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संसद से पास हुआ माइंस एंड मिनरल्स अमेंडमेंट बिल 2026,

माइंस अमेंडमेंट बिल 2026

संसद ने भारी हंगामे और राजनीतिक खींचतान के बीच ‘माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ (MMDR Amendment Bill) को मंजूरी दे दी है।

इस विधेयक के पारित होने के साथ ही संसद का मानसून सत्र भी अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया। केंद्र सरकार का दावा है कि इस नए कानून से देश के खनन क्षेत्र (Mining Sector) में उत्पादन, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

दूसरी ओर, विपक्ष शासित राज्यों विशेषकर केरल सरकार ने इस कानून का तीव्र विरोध करते हुए इसे राज्यों के संघीय अधिकारों और वित्तीय स्वायत्तता पर हमला करार दिया है।

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केंद्र सरकार का रुख: राज्यों का राजस्व और रोजगार बढ़ेगा

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने नई दिल्ली में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि यह संशोधन विधेयक किसी भी राज्य के अधिकारों पर अतिक्रमण नहीं करता है और न ही इससे राज्यों के राजस्व ढांचे पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच: केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार पूरी सरकार के मिलकर काम करने की नीति (Whole of Government Approach) के तहत काम कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य मुख्य खनिजों (Critical Minerals) के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना है।

राजस्व हिस्सेदारी में वृद्धि: जी किशन रेड्डी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि माइनिंग सेक्टर से राज्यों को मिलने वाली राजस्व हिस्सेदारी 65 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए खनन सुधारों के कारण राज्यों के खनिज राजस्व में 23 प्रतिशत का सीधा इजाफा दर्ज किया गया है।

चार मुख्य प्राथमिकताएं: उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार चार प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित है—देश में खनिजों की उपलब्धता बढ़ाना, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना, राज्यों की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ बनाना और कोयले तथा दुर्लभ खनिजों के आयात पर निर्भरता घटाना।

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केरल सरकार का कड़ा विरोध: “संघीय ढांचे पर हमला”

जहां केंद्र सरकार इस बिल को ऐतिहासिक सुधार बता रही है, वहीं केरल सरकार ने इस कानून को राज्यों के संवैधानिक अधिकारों का हनन करार दिया है।

स्वामित्व छीनने का आरोप: केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह संशोधन विधेयक संविधान की 7वीं अनुसूची की राज्य सूची (आइटम 18) के तहत राज्यों को मिले जमीन के मालिकाना हक और अधिकारों को केंद्र के नियंत्रण में लाने की कोशिश है।

तटीय और वन भूमि पर प्रभाव: मुख्यमंत्री ने कहा कि तटीय इलाकों और संवेदनशील जंगलों को छूट दिए बिना, बिल में ‘मिनरल बेयरिंग लैंड’ (खनिज समृद्ध भूमि) से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके जरिए केंद्र सरकार राज्य की संपत्तियों पर अपने नियम थोपने का प्रयास कर रही है।

अतिरिक्त टैक्स पर रोक: नया विधेयक राज्यों को खनिज अधिकारों पर अपनी ओर से अतिरिक्त टैक्स या उपकर (Cess) लगाने से रोकता है। केरल सरकार ने ऐलान किया है कि वह इस कानून का पुरजोर विरोध करेगी और अपनी आपत्तियों से केंद्र सरकार को औपचारिक रूप से अवगत कराएगी।

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संसदीय सत्र का समापन और राज्यसभा चेयरमैन की चिंता

माइंस एंड मिनरल्स बिल पास होने के साथ ही राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने अपने समापन भाषण में सत्र के दौरान हुए लगातार व्यवधानों पर गहरी चिंता व्यक्त की।

कामकाज के आंकड़े: राज्यसभा के इस मानसून सत्र में कुल 37 घंटे और 49 मिनट ही कामकाज हो सका। बार-बार के हंगामे के बावजूद, उच्च सदन ने 12 महत्वपूर्ण विधेयकों पर विचार कर उन्हें पारित या वापस किया।

जनता के भरोसे पर असर: चेयरमैन ने कहा कि संसद का मंच जनप्रतिनिधियों के लिए जनता के मुद्दे उठाने का सर्वोत्तम स्थान है, लेकिन हंगामे के कारण इस अवसर का पूर्ण उपयोग नहीं हो सका। उन्होंने सदस्यों को चेतावनी दी कि संसदीय आचरण का उल्लंघन जनता के विश्वास को कमजोर करता है।

माइंस एंड मिनरल्स अमेंडमेंट बिल 2026 देश के खनन ढांचे में एक बड़ा कानूनी बदलाव लेकर आया है। जहां एक तरफ केंद्र सरकार इसे आत्मनिर्भर भारत, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का माध्यम मान रही है, वहीं राज्यों और केंद्र के बीच संसाधनों के नियंत्रण को लेकर छिड़ी बहस आने वाले दिनों में कानूनी और राजनीतिक रूप से और गहरा सकती है।

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