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राज्यसभा में लुंगीवाला टिप्पणी पर भारी विवाद : गरमाया राज्यसभा

राज्यसभा लुंगीवाला टिप्पणी विवाद

राज्यसभा लुंगीवाला टिप्पणी विवाद संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में नीतिगत बहसों के साथ-साथ अब सांस्कृतिक व क्षेत्रीय पहचान से जुड़े विवाद भी गरमाने लगे हैं। बुधवार (12 अगस्त 2026) को ऊपरी सदन में उस समय जबरदस्त राजनीतिक घमासान और नारेबाजी देखने को मिली, जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के वरिष्ठ सांसद जॉन ब्रिटास ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद सुष्मिता देव पर सदन के भीतर उन्हें कथित तौर पर “लुंगीवाला” कहकर अपमानित करने का गंभीर आरोप लगाया।

विपक्षी दलों ने इस टिप्पणी को दक्षिण भारतीय संस्कृति, क्षेत्रीय पहचान और भारत के “विविधता में एकता” के मूल सिद्धांत पर सीधा हमला करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। वहीं, बीजेपी सांसद सुष्मिता देव ने किसी भी राज्य या क्षेत्रीय परिधान पर टिप्पणी करने से साफ इनकार किया है।

जॉन ब्रिटास का आरोप और विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव

संसदीय कार्यवाही के दौरान आवश्यक दस्तावेज पटल पर रखे जाने के दौरान सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने इस मुद्दे को औपचारिक रूप से उठाया।

विशेषाधिकार नोटिस: ब्रिटास ने बताया कि उन्होंने सोमवार की कार्यवाही के दौरान उनके खिलाफ आपत्तिजनक क्षेत्रीय शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर बीजेपी सांसद सुष्मिता देव के खिलाफ ‘विशेषाधिकार हनन’ (Breach of Privilege) का नोटिस पेश किया है।

ब्रिटास का बयान: सदन में बोलते हुए जॉन ब्रिटास ने कहा, “सदन में जुबानी बहस और राजनीतिक मतभेद सामान्य बात हैं। लेकिन जब मैं एक वैधानिक प्रस्ताव पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहा था, तब एक सम्मानित सदस्य ने मुझे बार-बार ‘लुंगीवाला’ कहकर निशाना बनाया।”

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विपक्ष का आक्रामक रुख: “दक्षिण भारतीय पहचान का अपमान”

विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे को लेकर सदन के भीतर और बाहर संसद परिसर में स्थित मकर द्वार के पास जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया।

आम आदमी पार्टी (AAP) का हमला: आप सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि नेताओं के पहनावे, खान-पान और रंग पर सवाल उठाना सत्तारूढ़ दल की कार्यशैली बन चुकी है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारतीय पोशाक में सदन आए सांसद का अपमान देश की सांस्कृतिक संप्रभुता का अपमान है।

कांग्रेस और सीपीआई की प्रतिक्रिया: कांग्रेस सांसद क्रिस्टोफर तिलक और सीपीआई सदस्य पी. संतोष कुमार ने कहा कि यह गैर-हिंदी भाषी राज्यों और दक्षिण भारतीय संस्कृति के प्रति संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है।

धोती पहनकर प्रदर्शन: विरोध दर्ज कराने के लिए कई विपक्षी सांसद पारंपरिक धोती पहनकर और क्षेत्रीय भेदभाव के खिलाफ तख्तियां (Posters) लेकर सदन के वेल में आ गए, जिससे भारी हंगामे के कारण उप-सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

सुष्मिता देव की सफाई: “सांस्कृतिक या धार्मिक विभाजन का इरादा नहीं”

दोपहर बाद जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो असम से बीजेपी सांसद सुष्मिता देव ने अपने पक्ष में बयान जारी किया और किसी भी विवादित शब्द के प्रयोग से इनकार किया।

सांस्कृतिक विविधता का सम्मान: सुष्मिता देव ने कहा, “मैं असम की रहने वाली बंगाली हूं और मैंने देश के अलग-अलग हिस्सों में परिधानों की विविधता देखी है। न तो मैंने और न ही मेरी पार्टी के किसी सदस्य ने किसी राज्य के पहनावे पर टिप्पणी की है। मैं इसे ऑन-रिकॉर्ड लाना चाहती हूं।”

पुरानी पहचान का हवाला: उन्होंने आगे कहा कि वे जॉन ब्रिटास को लंबे समय से जानती हैं। सदन से ऐसा कोई संदेश नहीं जाना चाहिए जिससे देश में सांस्कृतिक या धार्मिक आधार पर किसी प्रकार के विभाजन का भ्रम पैदा हो।

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सभापति और सत्तापक्ष की मध्यस्थता की पहल

स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार और पीठ दोनों ने मामले को शांत कराने का प्रयास किया।

नेता सदन जे.पी. नड्डा का प्रस्ताव: केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में नेता सदन जे.पी. नड्डा ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यदि दोनों सम्मानित सांसद (जॉन ब्रिटास और सुष्मिता देव) उनके चैंबर में आएं, तो बातचीत के जरिए इस गलतफहमी को दूर किया जा सकता है।

स्पीकर का रुख: राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी सी.पी. राधाकृष्णन ने स्पष्ट किया कि सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी सदस्य के प्रति अपमानजनक भाषा स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने गतिरोध को समाप्त करने के लिए दोनों पक्षों को अपने कक्ष में आमंत्रित किया।

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संपादकीय दृष्टिकोण:

भारत की संसद देश की बहुलतावादी संस्कृति और भाषाई-क्षेत्रीय विविधताओं का सर्वोच्च प्रतिबिंब है। जनप्रतिनिधियों के पहनावे, भाषा या क्षेत्रीय विशेषताओं को लेकर कसने वाले तंज—चाहे वे हल्के-फुल्के अंदाज में ही क्यों न कहे गए हों—संसदीय गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।

ऐसे समय में जब देश को एकजुट रखने वाले लोकतांत्रिक मूल्यों की आवश्यकता है, सांसदों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत कटाक्षों के बजाय नीतियों और जनहित के मुद्दों पर बहस केंद्रित रखें। सांसदों के हंगामे और तीखी बहस के बीच गरमाया राज्यसभा लुंगीवाला टिप्पणी विवाद सभापति के कड़े रुख और बयानों के बाद जानें राज्यसभा लुंगीवाला टिप्पणी विवाद की पूरी सच्चाई राज्यसभा लुंगीवाला टिप्पणी विवाद मुख्य रूप से पारंपरिक पहनावे को लेकर की गई एक कथित टिप्पणी के बाद भड़का, जिसके बाद सदन में हंगामा हुआ।

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