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“जिला कलेक्टर नागरिकता अधिकार”  प्रक्रिया हुई आसान

जिला कलेक्टर नागरिकता अधिकार

जिला कलेक्टर नागरिकता अधिकार गृह मंत्रालय (MHA) ने नागरिकता नियम, 2009 में संशोधन करते हुए नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इस नए संशोधन का उद्देश्य पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए पीड़ित अल्पसंख्यक शरणार्थियों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी) को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया में होने वाली देरी को खत्म करना है।

नए नियमों के तहत केंद्र सरकार ने छह राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के जिला कलेक्टरों (District Collectors) को पंजीकरण (Registration) और नेचुरलाइजेशन (Naturalisation) के तहत नागरिकता प्रदान करने के लिए सीधे तौर पर अधिकृत किया है।

इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होंगे नए नियम

यह नया अधिकार निम्नलिखित क्षेत्रों में सामान्य रूप से रह रहे योग्य आवेदकों पर लागू होगा:

राज्य: गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा (असम और त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों को छोड़कर)।

केंद्र शासित प्रदेश: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख।

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प्रक्रिया में हुए मुख्य संशोधन और नए प्रावधान:

अधिकार प्राप्त समितियों की जगह कलेक्टर:अब तक सीएए (CAA) के तहत नागरिकता देने का अधिकार राज्य स्तरीय ‘सशक्त समितियों’ और ‘नामित अधिकारियों’ के पास था। नए नियमों के अनुसार, इन समितियों के पास लंबित सभी मौजूदा आवेदनों को तुरंत संबंधित जिला कलेक्टरों को ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

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ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल सत्यापन:जिला कलेक्टरों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से आवेदन प्राप्त करने के लिए ‘सक्षम प्राधिकारी’ बनाया गया है। पोर्टल पर आवेदन जमा होते ही सिस्टम द्वारा एक ऑटोमैटिक पावती (Acknowledgement) ‘फॉर्म IX’ में जारी होगी। इसके बाद कलेक्टर दस्तावेजों की जांच करेंगे और अपनी जांच पूरी करेंगे।

शपथ और व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य:पात्रता से संतुष्ट होने पर कलेक्टर आवेदक को नागरिकता अधिनियम की दूसरी अनुसूची के तहत ‘निष्ठा की शपथ’ दिलाएंगे। हालांकि, नियमों में स्पष्ट किया गया है कि यदि आवेदक पर्याप्त मौका दिए जाने के बावजूद व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर हस्ताक्षर और शपथ नहीं लेता है, तो कलेक्टर आवेदन खारिज कर सकते हैं।

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    नागरिकता प्रक्रिया में आएगी तेजी

    गृह मंत्रालय के इस कदम से नागरिकता आवेदनों के त्वरित और पारदर्शी निपटारे का मार्ग प्रशस्त होगा। जिला स्तर पर ही जांच और स्वीकृति की शक्ति मिलने से शरणार्थियों को अब लंबी नौकरशाही प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी।

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