“सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट” पर सुप्रीम कोर्ट सख्त,
देश भर में बढ़ते कचरे की समस्या और इसके निपटान के प्रति नागरिकों व संस्थानों की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) नियम, 2026 को देश भर में सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि कचरा प्रबंधन के मानकों का पालन न करने वाले बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वालों (Bulk Waste Generators – BWGs) जैसे मॉल, अस्पतालों, बड़े होटलों और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के बिजली व पानी के कनेक्शन काटे जा सकते हैं।
किन्हें माना जाएगा ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ (BWG)?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, निम्नलिखित मापदंडों को पूरा करने वाले संस्थानों को बल्क वेस्ट जनरेटर माना गया है:
कचरा उत्पादन: जो संस्थान प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करते हैं।
क्षेत्रफल: जिनका निर्मित क्षेत्र (Built-up Area) 20,000 वर्ग मीटर से अधिक है।
जल खपत: जो रोजाना 40,000 लीटर से अधिक पानी का उपयोग करते हैं।
शामिल संस्थान: बड़े अस्पताल, शॉपिंग मॉल, होटल, बड़ी रिहायशी सोसायटियां और शैक्षणिक संस्थान।
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कलेक्टरों को विशेष अधिकार और सख्त कार्रवाई के निर्देश
कोर्ट ने देश भर के जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि वे स्थानीय निकायों (Local Bodies) के साथ मिलकर अगले छह सप्ताह के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों में सभी BWGs की पहचान करें।
विशेष सेल का गठन: प्रत्येक जिले में एक विशेष सेल का गठन किया जाएगा, जिसमें राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शामिल होंगे।
बिजली-पानी काटने का अधिकार: नियमों का उल्लंघन करने वाले और कचरे का सही से प्रसंस्करण (Processing) व पृथक्करण (Segregation) न करने वाले संस्थानों की बिजली और पानी की सप्लाई अस्थायी रूप से रोक दी जाएगी, जब तक कि वे अनुपालन प्रमाण पत्र (Compliance Certificate) जमा न कर दें।
पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश दिया गया है कि वह ‘पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986′ के तहत जिला कलेक्टरों को दंडात्मक कार्रवाई के लिए विशेष शक्तियां प्रदान करे।
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स्रोतों पर कचरे का 4 श्रेणियों में पृथक्करण अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समाज में केवल सफाई कर्मचारियों पर कचरे की जिम्मेदारी डालने की सोच व्यावहारिक और कानूनी रूप से गलत है। नए नियमों के अनुसार, कचरा पैदा करने वाले स्थान पर ही इसे चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य होगा:
गीला कचरा (Biodegradable Waste)
सूखा कचरा (Dry Waste)
सैनिटरी कचरा (Sanitary Waste)
घरेलू खतरनाक कचरा (Hazardous & Electronic Waste)
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अदालत ने कहा कि कानून और नियम केवल दिशा-निर्देश तय कर सकते हैं, लेकिन जब तक संस्थागत और व्यक्तिगत कचरा उत्पादक अपनी सामाजिक जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक स्वच्छ पर्यावरण का लक्ष्य हासिल करना कठिन है। रीसाइक्लिंग तकनीकों, डोर-टू-डोर कलेक्शन और नगर निगम के नए नियमों के बीच जानें सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की पूरी डिटेल्स
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