“मेकेदातु बांध विवाद” 5 TMC छोड़कर बाकी पानी तमिलनाडु का’,
कावेरी जल विवाद और प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर जारी अंतर-राज्यीय खींचतान के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने एक बड़ा और सहयोगात्मक रुख अपनाया है।
गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को तमिलनाडु के महाबलीपुरम (चेंगलपट्टू) में आयोजित 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद (SZC) की बैठक के दौरान शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि मेकेदातु परियोजना से तमिलनाडु और पुडुचेरी के हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और अन्य दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
‘पानी का बंटवारा नहीं, पानी का सहयोग चाहिए’
पत्रकारों से बात करते हुए डी.के. शिवकुमार ने कहा कि कावेरी, कृष्णा, तुंगभद्रा, पेन्नार और पलार जैसी नदियां पूरे दक्षिणी प्रायद्वीप की जीवन रेखा हैं। उन्होंने कहा:
तमिलनाडु को भरोसा: “मैंने गृह मंत्री के समक्ष तमिलनाडु को वचन दिया है कि मेकेदातु बांध में जमा पानी में से बेंगलुरु और आसपास के इलाकों की पेयजल जरूरतों के लिए केवल 5 TMC (4.75 TMCft) पानी रखा जाएगा। इसके अलावा पानी की हर एक बूंद तमिलनाडु और पुडुचेरी के लिए छोड़ी जाएगी।”
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बांध निर्माण का उद्देश्य: कर्नाटक के सीएम ने कहा, “यह बांध केवल हमारे लिए नहीं, बल्कि आपके (तमिलनाडु और पुडुचेरी) किसानों की मदद के लिए बनाया जा रहा है। इसलिए तमिलनाडु को निश्चिंत रहना चाहिए।”
सकारात्मक दृष्टिकोण: उन्होंने जल विवादों को सौहार्दपूर्ण बातचीत से सुलझाने पर बल दिया और कहा कि अब राज्यों को “पानी के बंटवारे से आगे बढ़कर पानी के सहयोग” की ओर बढ़ना चाहिए।
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क्या है मेकेदातु परियोजना?
मेकेदातु परियोजना कर्नाटक के रामनगर जिले में कनकपुरा के पास कावेरी नदी पर प्रस्तावित एक बहुउद्देशीय (Multipurpose) बैलेंसिंग जलाशय है।
लागत और क्षमता: लगभग 9,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बेंगलुरु को पीने का पानी उपलब्ध कराना और 400 मेगावॉट (MW) बिजली उत्पन्न करना है।
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तमिलनाडु का विरोध: तमिलनाडु इस परियोजना का लगातार विरोध करता रहा है, क्योंकि उसे डर है कि ऊपरी तट पर बांध बनने से उसके हिस्से के पानी के प्रवाह में कमी आ सकती है।
हालांकि, कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार समानता, पारदर्शिता और अंतर-राज्यीय सहयोग के सिद्धांतों पर काम कर रही है और आंध्र प्रदेश व तेलंगाना की तर्ज पर तमिलनाडु के साथ भी बातचीत से स्थायी समाधान निकाला जाएगा। कर्नाटक और तमिलनाडु सरकारों की याचिकाओं और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बीच जानें मेकेदातु बांध विवाद की पूरी सच्चाई
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