“आशीर्वाद आटा एफएसएसएआई विवाद” आशीर्वाद आटा’ पर ‘100%’ दावे
आशीर्वाद आटा एफएसएसएआई विवाद देश की दिग्गज एफएमसीजी (FMCG) कंपनी आईटीसी लिमिटेड (ITC Limited) को खाद्य नियामक ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण‘ (FSSAI) की कार्रवाई के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय से बड़ी अंतरिम राहत मिली है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने FSSAI को निर्देश दिया है कि वह ‘आशीर्वाद एम.पी. चक्की आटा’ की पैकेजिंग और विज्ञापनों पर “100%” (100 प्रतिशत) शब्द के इस्तेमाल को लेकर कंपनी का फूड लाइसेंस फिलहाल रद्द या निलंबित (Suspend) न करे।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) पर फैसला होना अभी बाकी है। जब तक क्षेत्राधिकार का यह कानूनी पहलू तय नहीं हो जाता, तब तक नियामक प्राधिकरण द्वारा कंपनी के खिलाफ कोई भी कठोर दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।
क्या है ‘आशीर्वाद आटा’ और ‘100%’ दावे का पूरा विवाद?
यह पूरा कानूनी विवाद ‘आशीर्वाद एम.पी. चक्की आटा’ के पैकेट पर लिखे दावों और उसके प्रचार विज्ञापनों से जुड़ा हुआ है।
FSSAI की प्रमुख आपत्तियां:
लेबलिंग पर आपत्ति: FSSAI ने पैकेजिंग पर लिखे “100% आटा और 100% मध्य प्रदेश गेहूं” जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
विज्ञापन दावे: विज्ञापनों में “सिर्फ 100% M.P गेहूं से बना” और “0% मैदा” जैसे उल्लेखों को भी नियमों के विपरीत माना गया।
सुधार नोटिस (Improvement Notice): कोलकाता स्थित सेंट्रल लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने ITC को निर्देश दिया था कि वह 15 दिनों के भीतर इन दावों को हटाकर अनुपालन रिपोर्ट जमा करे, अन्यथा उसका FSSAI फूड लाइसेंस निलंबित कर दिया जाएगा।
इसे भी पढ़े : “महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी कानून” होने से पहले चर्चों की अनूठी पहल;
FSSAI की मई 2025 एडवाइजरी से शुरू हुई पूरी कार्रवाई
विवाद की शुरुआत मई 2025 में FSSAI द्वारा जारी की गई एक व्यापक एडवाइजरी से हुई थी। इस दिशानिर्देश में देश के सभी खाद्य उत्पादकों (Food Business Operators) को अपने प्रॉडक्ट्स के लेबल, पैकेजिंग और विज्ञापन सामग्री में “100%” शब्द का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया गया था।
घटनाक्रम की समयरेखा (Timeline):
मई 2025: FSSAI ने “100%” शब्द के इस्तेमाल पर राष्ट्रव्यापी एडवाइजरी जारी की।
10 अगस्त 2026: FSSAI ने ITC को कारण बताओ नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर जवाब मांगा।
13 अगस्त 2026: जवाब की 30 दिन की समय-सीमा खत्म होने से पहले ही कोलकाता लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने 15 दिनों का ‘सुधार नोटिस’ थमा दिया।
ITC का पक्ष: ‘नोटिस मनमाना और बिना सोच-समझकर जारी किया गया’
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में ITC ने नियामक संस्था FSSAI की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कंपनी द्वारा अदालत में रखे गए प्रमुख तर्क:
“हमे कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया था। लेकिन उस अवधि के खत्म होने से पहले ही 15 दिनों के भीतर लाइसेंस सस्पेंड करने की धमकी के साथ ‘सुधार नोटिस’ जारी कर दिया गया। यह नोटिस बिना विवेक का इस्तेमाल किए (Mechanical Manner) यांत्रिक तरीके से जारी किया गया है और लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी पूरी तरह से मनमानी और अत्यधिक कठोर है।”
अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) पर FSSAI और कोर्ट का रुख
सुनवाई के दौरान FSSAI के वकील ने याचिका की स्वीकार्यता (Maintainability) पर ही सवाल खड़ा कर दिया। नियामक का तर्क था कि चूंकि ताजा ‘सुधार नोटिस’ कोलकाता स्थित सेंट्रल लाइसेंसिंग अथॉरिटी द्वारा जारी किया गया है, इसलिए इस याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई नहीं हो सकती।
न्यायमूर्ति शर्मा ने टिप्पणी की कि चूंकि क्षेत्राधिकार का मुद्दा तय होना बाकी है और आगामी छुट्टियों के कारण अदालत बंद रहेगी, इसलिए 9 सितंबर 2026 की अगली सुनवाई तक ITC को दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान की जाती है।
इसे भी पढ़े : “भारत ईरान व्यापार असर” अमेरिकी प्रतिबंधों से भारतीय चावल पर संकट
फॉर्च्यून (Fortune) तेल भी FSSAI के रडार पर: 31 अगस्त को आएगा आदेश
FSSAI की यह कार्रवाई केवल ITC तक सीमित नहीं है। अडानी विल्मर (AWL एग्री बिजनेस लिमिटेड) के मशहूर ब्रांड ‘फॉर्च्यून’ के खाद्य उत्पादों पर भी नियामक की नजर है।
फॉर्च्यून सोयाबीन ऑयल पर आपत्ति: FSSAI ने ‘फॉर्च्यून सोया हेल्थ रिफाइंड सोयाबीन ऑयल’ के पैकेट पर “100% वेज” और “कोलेस्ट्रॉल फ्री – हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए” जैसे दावों को लेकर AWL को नोटिस जारी किए हैं।
31 अगस्त का महत्वपूर्ण आदेश: दिल्ली हाई कोर्ट AWL द्वारा FSSAI के खिलाफ दायर याचिका पर 31 अगस्त 2026 को फैसला सुनाएगा कि याचिका दिल्ली कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आती है या नहीं।
इसे भी पढ़े : “स्कूल ठीक करो अभियान” अभियान से सामने आईं कमियां;
खाद्य उद्योग के लिए महत्वपूर्ण होगा अदालत का फैसला
‘आशीर्वाद आटा’ और ‘फॉर्च्यून ऑयल’ पर FSSAI के कड़े रुख और उच्च न्यायालय में जारी इस कानूनी लड़ाई का असर भारत के पूरे एफएमसीजी और पैकेज्ड फूड सेक्टर पर पड़ेगा। 9 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई से यह साफ हो जाएगा कि कंपनियों द्वारा ‘100% शुद्धता’ जैसे मार्केटिंग दावों की कानूनी सीमा क्या होगी और FSSAI का अधिकार क्षेत्र किस हद तक लागू होगा। गुणवत्ता जांच के दावों, लैब रिपोर्ट और प्रशासनिक स्पष्टीकरण के बाद जानें आशीर्वाद आटा एफएसएसएआई विवाद की पूरी इनसाइड स्टोरी
इसे भी पढ़े : “दिल्ली पुलिस आरक्षण प्रदर्शन” का वीडियो निकला ‘फेक’,



Post Comment