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 “स्कूल ठीक करो अभियान” अभियान से सामने आईं कमियां;

स्कूल ठीक करो अभियान

देश के विभिन्न राज्यों के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और साफ-सफाई के दावों की पोल खोलने के लिए शुरू किया गया ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान अब विवादों और कानूनी कार्रवाइयों के केंद्र में आ गया है।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा चलाए जा रहे इस राष्ट्रव्यापी स्कूल ऑडिट अभियान के बीच, महाराष्ट्र के लातूर जिले में पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके और उनके सहयोगियों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।

यह मामला लातूर के औसा तालुका स्थित जवाली के जिला परिषद उर्दू प्राथमिक स्कूल की शिक्षिका की शिकायत पर दर्ज हुआ है, जिसमें बिना अनुमति स्कूल में घुसने, सरकारी काम में बाधा डालने और शिक्षकों को धमकाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

स्कूल ऑडिट में उजागर हुईं इंफ्रास्ट्रक्चर की चौंकाने वाली कमियां

15 अगस्त से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों द्वारा शुरू किए गए स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत कई राज्यों का दौरा किया गया। एक सप्ताह के भीतर किए गए इस ऑडिट से देश के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा ढांचे की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है।

ऑडिट रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:

बिहार: पांचवीं कक्षा तक संचालित एक सरकारी प्राथमिक स्कूल महज दो कमरों (क्लासरूम) के सहारे चल रहा है।

उत्तराखंड: पहाड़ी राज्य के एक स्कूल में छत तक गायब पाई गई, जिसके कारण मानसून के दौरान बारिश का पानी सीधे कक्षाओं के फर्श पर जमा हो जाता है।

हरियाणा: ऑडिट में पाया गया कि एक स्कूल के सभी दरवाजे पूरी तरह टूटे हुए थे, जिनमें शौचालय (वॉशरूम) के दरवाजे भी शामिल थे।

राजस्थान: पेयजल की गुणवत्ता इतनी खतरनाक और खराब स्तर की पाई गई कि स्कूल के अधिकारी स्वयं बच्चों को वह पानी पीने से मना करते दिखे।

संस्था का कहना है कि भारत में ‘जेन-अल्फा’ (GenAlpha) पीढ़ी की आबादी लगभग 34 करोड़ है, जिनमें से कई युवा आने वाले सालों में पहली बार मतदान करेंगे। ऐसे में स्कूल जाने वाली यह नई पीढ़ी अपने बुनियादी अधिकारों—जैसे बेहतर शौचालय, सुरक्षित इमारतें और योग्य शिक्षक—की मांग को लेकर मुखर हो रही है।

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लातूर में क्या हुआ? CJP संयोजक अभिजीत दिपके पर कानूनी शिकंजा

लातूर जिले के औसा पुलिस स्टेशन में 53 वर्षीय शिक्षिका सैयद शमशादबानो खैरातली की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है।

दर्ज FIR में लगाए गए प्रमुख आरोप:

अनाधिकार प्रवेश (Trespassing): 20 अगस्त को अभिजीत दिपके और उनके समर्थक बिना प्रशासनिक अनुमति के औसा के जिला परिषद स्कूल परिसर में दाखिल हुए।

कामकाज में बाधा: कक्षाओं और प्रशासनिक काम के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग (फिल्मिंग) कर पठन-पाठन और सरकारी कामकाज में खलल डाला गया।

धमकी और मानहानि: शिक्षकों को निलंबन (Suspension) की धमकी देने और बाद में सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भ्रामक व मानहानिकारक वीडियो अपलोड करने का आरोप है।

    पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अनाधिकार प्रवेश, आपराधिक धमकी, मारपीट और मानहानि से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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    आरोपों और दावों पर स्कूल प्रशासन का स्पष्टीकरण

    अपने दौरे के दौरान CJP संयोजक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर आरोप लगाया था कि स्कूल प्रशासन ने व्यवस्था अच्छी दिखाने के लिए दूसरे स्कूल के बच्चों को फर्जी तरीके से वहां बैठाया था। उन्होंने स्कूल परिसर में शराब की बोतलें मिलने, टॉयलेट की दयनीय स्थिति और पीने के पानी की कमी के भी दावे किए थे।

    हालांकि, स्कूल प्रशासन और प्रधानाध्यापक (Principal) ने इन सभी दावों को खारिज किया है:

    छात्रों की उपस्थिति: प्रधानाध्यापक ने स्पष्ट किया कि एक ही इमारत परिसर में दो अलग-अलग स्कूल संचालित होते हैं, इसलिए वहां मौजूद सभी छात्र वास्तविक थे और कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया गया।

    शिक्षकों का पक्ष: शिक्षिका की शिकायत के अनुसार, दिपके का रवैया आक्रामक था जिससे स्कूल का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हुआ।

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    सुधार बनाम प्रशासनिक मर्यादा का संघर्ष

    ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान ने निस्संदेह देश के दूर-दराज इलाकों में स्थित सरकारी स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर, पीने के पानी और टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को रेखांकित किया है।

    लेकिन लातूर की घटना यह दर्शाती है कि अभियानों के संचालन और निरीक्षण के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक मर्यादाओं का ध्यान रखना कितना अनिवार्य है। फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और अदालत में इन आरोपों की सत्यता साबित होना बाकी है।

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