“बालाघाट आदिवासी बच्चे मौत” पर CJP प्रमुख अभिजीत दिपके का दौरा,
बालाघाट आदिवासी बच्चे मौत मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में संक्रामक बीमारियों, दूषित पीने के पानी और कुपोषण के कारण बैगा और गोंड आदिवासी समुदायों के बच्चों की लगातार हो रही मौतों के बीच सियासत और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक एवं संस्थापक अभिजीत दिपके शनिवार को बालाघाट जिले के प्रभावित आदिवासी गांवों का दौरा करने पहुंचे। उन्होंने उन परिवारों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं, जिन्होंने हाल ही में अपने मासूम बच्चों को खोया है।
स्थानीय युवाओं और कार्यकर्ताओं के साथ दिपके ने अडोरी, कोरका और बोंडारी गांवों का दौरा कर स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों से जानकारी एकत्र की।
प्रशासन की चुप्पी और निष्प्रभावी रवैये पर उठाए सवाल
पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अभिजीत दिपके ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार के रवैये पर कड़ा प्रहार किया:
जिम्मेदारी तय करने की मांग: दिपके ने कहा कि अधिकारियों ने मौतों के आंकड़ों को स्वीकार तो कर लिया है, लेकिन अभी तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
न्याय की प्रतिबद्धता: उन्होंने कहा, “हम उन सभी परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है। हमारा उद्देश्य प्रभावित परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करना और प्रशासन की जवाबदेही तय कराना है।”
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2.5 महीने में 30 से अधिक मासूमों की मौत, हाई कोर्ट सख्त
बालाघाट जिले में जून के अंतिम सप्ताह से ही संक्रामक बीमारियों का प्रकोप जारी है। शुरुआती दिनों में सरकार ने मौतों का आंकड़ा केवल 8 बताया था, जबकि स्थानीय ग्रामीणों और विपक्ष का दावा था कि हकीकत बेहद खौफनाक है। लगभग ढाई महीने के भीतर मौतों का आंकड़ा 30 के पार पहुंच चुका है और सैकड़ों बच्चे अब भी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ ने जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है:
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हाई कोर्ट का नोटिस: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा बालाघाट कलेक्टर को जवाब तलब किया है।
अस्पतालों की बदहाली: जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिले में केवल 50 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में 400 से अधिक बच्चों का इलाज चल रहा है, जिससे संक्रमण तेजी से फैल रहा है।
दूषित पानी और कुपोषण: याचिका के अनुसार प्रभावित गांवों में हैंडपंपों से पीला व जहरीला पानी आ रहा है तथा गर्भवती महिलाओं और बच्चों को महीनों से पौष्टिक आहार नहीं मिला है।
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आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक ढिलाई को लेकर अब सामाजिक संगठनों के साथ-साथ न्यायिक दबाव भी बढ़ गया है।
घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची है, वहीं बालाघाट आदिवासी बच्चे मौत मामले की निष्पक्ष जाँच के आदेश देते हुए पीड़ित परिवार को सहायता और क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं को तुरंत दुरुस्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
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