“आजमगढ़ ट्रिपल मर्डर कांड”पति ने पत्नी व 2 पुजारियों को गोली मारी,
आजमगढ़ ट्रिपल मर्डर कांड उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र स्थित शंभूपुर गहजी गांव में मंगलवार शाम एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। अंधविश्वास, शराब की लत और पारिवारिक विवाद के बीच एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी।
इसके बाद उसने अपने तीन मासूम बच्चों को कमरे में बंधक बना लिया। लगभग सात घंटे तक चले हाई-प्रोफाइल ड्रामा और पुलिस मुठभेड़ में आरोपी अरविंद सिंह और उसका छह वर्षीय मासूम बेटा भी मारा गया। इस जघन्य घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।
घटना का क्रम: बाजार से लौटते ही छिड़ा विवाद
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार शाम करीब 6 बजे अरविंद सिंह जब अत्यधिक शराब के नशे में बाजार से अपने घर लौटा, तो उसने देखा कि उसके घर के अंदर धार्मिक अनुष्ठान (पूजा-पाठ) चल रहा था।
अंधविश्वास और भूत-प्रेत की आशंका: अरविंद की पत्नी बबीता सिंह (40) अपने पति के अजीब व्यवहार, शराब की लत और घर में अशांति के समाधान के लिए पूजा करवा रही थी। बबीता और परिजनों को आशंका थी कि अरविंद पर किसी ‘अदृश्य शक्ति’ या भूत-प्रेत का साया है, जबकि कुछ स्थानीय सूत्रों के मुताबिक यह रस्म दो साल पहले मृत हुए अरविंद के बड़े भाई की आत्मा की शांति के लिए रखी गई थी।
पहचान पत्र मांगने पर बढ़ा झगड़ा: घर में अनुष्ठान होता देख अरविंद आपा खो बैठा। उसने मौके पर मौजूद पुजारियों से उनकी पहचान पत्र (आइडेंटिटी कार्ड) दिखाने की मांग की। इसी बात को लेकर अरविंद और पुजारियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
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लाइसेंसी राइफल से ताबड़तोड़ फायरिंग
विवाद बढ़ने पर अरविंद ने घर के अंदर रखी अपनी लाइसेंसी राइफल निकाली और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी:
पत्नी को मारी पहली गोली: अरविंद ने सबसे पहले अपनी पत्नी बबीता सिंह (40) को निशाना बनाया।
दो पुजारियों की मौके पर मौत: इसके बाद उसने पूजा करा रहे पटखौली गांव के पंडित महेंद्र पाठक (60) और छितौना भटौली गांव के अखिलेश मिश्रा (55) पर गोलियां बरसा दीं। तीनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
चौथा पुजारी बाल-बाल बचा: अनुष्ठान में मौजूद एक अन्य पुजारी और मृतक अखिलेश मिश्रा का बेटा हिमांशु मिश्रा किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर भागने में सफल रहे।
बच्चों को बनाया बंधक, 7 घंटे चला गतिरोध
तीन लोगों की हत्या करने के बाद अरविंद ने अपनी सात महीने की बेटी, पांच साल की बेटी परी और छह साल के बेटे लक्खा के साथ खुद को एक कमरे में बंद कर लिया।
सूचना मिलते ही आजमगढ़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) डॉ. अनिल कुमार, एसपी ग्रामीण चिराग जैन और कई थानों की पुलिस फोर्स ने गांव को घेर लिया। अधिकारियों ने लगभग सात घंटे तक लाउडस्पीकर और परिजनों के माध्यम से अरविंद को समझाने और बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने की कोशिश की, लेकिन वह आत्मसमर्पण करने को तैयार नहीं हुआ।
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एनकाउंटर और मासूम की दुखद मौत
बुधवार तड़के कमरे के अंदर से अचानक एक और गोली चलने की आवाज आई। पुलिस को आशंका हुई कि अरविंद बंधक बच्चों को नुकसान पहुंचा रहा है।
पुलिस की जवाबी कार्रवाई: वाराणसी ज़ोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) नवीन अरोड़ा और एसएसपी अनिल कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम दरवाजा तोड़कर अंदर घुसी। कमरे में दाखिल होते ही अरविंद ने पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
जवाबी फायरिंग में घायल: पुलिस की आत्मरक्षार्थ की गई जवाबी कार्रवाई में अरविंद गंभीर रूप से घायल हो गया।
अस्पताल में मौत: कमरे के भीतर छह वर्षीय बेटा लक्खा भी गोली लगने से गंभीर रूप से घायल मिला। पुलिस तुरंत आरोपी अरविंद और उसके बेटे को अस्पताल ले गई, जहां इलाज के दौरान दोनों की मृत्यु हो गई। पुलिस ने बाकी दो छोटी बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
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फॉरेंसिक जांच और कानून-व्यवस्था की स्थिति
घटना के बाद फॉरेंसिक टीम और क्राइम ब्रांच ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने लाइसेंसी राइफल जब्त कर ली है और सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
आजमगढ़ पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में घटना की वजह अत्यधिक शराब का सेवन, घरेलू कलह और अनुष्ठान को लेकर हुआ अचानक विवाद सामने आया है। गांव में एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और वर्तमान में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।
हाल ही में एक ही परिवार के तीन लोगों की जघन्य हत्या के बाद चर्चा में आया आजमगढ़ ट्रिपल मर्डर कांड इलाके में पुलिसिया गश्त और पुरानी रंजिशों के निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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