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विजय शाह की विवादित टिप्पणी पर दोबारा माफी, SIT ने जांच शुरू की

विजय शाह की टिप्पणी

मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह की टिप्पणी ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। उनके विवादास्पद बयान पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जांच शुरू कर दी है, जबकि शाह ने दो बार सार्वजनिक माफी मांगी है। यह मामला अब सिर्फ एक राजनीतिक विवाद नहीं रहा, बल्कि यह देश की एकता, सेना के सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा प्रश्न बन गया है।

विजय शाह की टिप्पणी: क्या हुआ था?

12 मई को महू के रेकुंडा गांव में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान विजय शाह ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा,

“जिन्होंने हमारी बेटियों के माथे से सिंदूर पोंछा… हमने उन्हें सबक सिखाने के लिए उनकी बहन को भेजा।”

यह बयान कर्नल सोफिया कुरैशी के संदर्भ में था, जिसे सेना और आम जनता ने अपमानजनक माना। विजय शाह की टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा हो गया और विपक्षी दलों ने तुरंत उनके इस्तीफे की मांग कर दी।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: माफी नहीं, जांच चाहिए

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने विजय शाह की टिप्पणी को “शर्मनाक” और “देश की एकता के खिलाफ” बताया। कोर्ट ने उनकी पहली माफी को भी संदिग्ध माना और कहा कि यह केवल कानूनी कार्रवाई से बचने का प्रयास लगता है।

20 मई को सुप्रीम कोर्ट ने एक तीन सदस्यीय एसआईटी गठित करने का आदेश दिया, जिसे 28 मई तक प्रारंभिक रिपोर्ट पेश करनी है।

एसआईटी की जांच और अब तक की स्थिति

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 20 मई को तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की गई।
  • एसआईटी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर दर्ज एफआईआर की जांच कर रही है।
  • टीम के प्रमुख सागर रेंज के आईजी प्रमोद वर्मा हैं।

आईजी प्रमोद वर्मा ने द हिंदू को बताया कि जांच शुरू हो गई है, लेकिन अब तक विजय शाह से कोई पूछताछ नहीं हुई है।

आईपीएस अधिकारी वाहिनी सिंह, जो टीम का हिस्सा हैं, ने कहा:

“हम अभी उस चरण तक नहीं पहुंचे हैं जहां श्री शाह से पूछताछ की जाए।”

एसआईटी 28 मई को सुप्रीम कोर्ट में प्रारंभिक रिपोर्ट पेश करेगी। वर्मा ने कहा:

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हम जांच के बिंदुओं पर टिप्पणी नहीं कर सकते।”

SIT ने जांच के लिए शुरू किया क्षेत्रीय दौरा

  • एसआईटी की टीम ने इंदौर जिले के महू के पास रेकुंडा गांव में लोगों से मिलना शुरू किया।
  • यही वह स्थान है जहां 12 मई को विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी की थी।
  • एसआईटी का नेतृत्व सागर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक प्रमोद वर्मा कर रहे हैं।
  • विशेष सशस्त्र बल के डीआईजी कल्याण चक्रवर्ती और डिंडोरी की पुलिस अधीक्षक वाहिनी सिंह टीम के अन्य सदस्य हैं।

SIT सदस्य ने कहा,

“हमने परसों अपनी जांच शुरू की।”

विजय शाह की दूसरी माफी: कितनी सच्ची?

  • विजय शाह ने 23 मई को फिर माफी मांगी।
  • उन्होंने इसे “भाषाई भूल” करार दिया।
  • उन्होंने पहलगाम नरसंहार पर दुख जताया।
  • कहा कि उनका सेना के प्रति गहरा सम्मान है।

शाह ने कहा,

“मैंने अनजाने में जो शब्द कहे, उसके लिए मैं पूरी भारतीय सेना, बहन कर्नल सोफिया और सभी देशवासियों से ईमानदारी से माफ़ी मांगता हूं।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका उद्देश्य किसी को आहत करना नहीं था। लेकिन विजय शाह की टिप्पणी से सेना, धर्म और देशवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं।

कांग्रेस का आरोप: क्या SIT निष्पक्ष है?

  • कांग्रेस ने कहा कि SIT के कुछ सदस्य पहले विजय शाह के अधीन काम कर चुके हैं।
  • विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने पूछा,

“क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट देने के नाम पर लुका-छिपी कर रही है?”

कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरी जांच प्रक्रिया विजय शाह को बचाने की एक रणनीति हो सकती है। इस संदेह को बढ़ावा तब मिला जब शाह 20 मई को कैबिनेट बैठक में शामिल नहीं हुए।

कानूनी पहलू: कौन-सी धाराएं लग सकती हैं?

विजय शाह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की निम्नलिखित धाराएं लागू हो सकती हैं:

  • धारा 153A: धार्मिक या सामाजिक समूहों के बीच द्वेष फैलाना।
  • धारा 505(2): सार्वजनिक शांति भंग करने वाले बयान देना।
  • धारा 124A: देशद्रोह (अगर बयान को राष्ट्र विरोधी माना जाए)।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर जांच में शाह का दोष साबित होता है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

क्या होगा आगे?

विजय शाह की टिप्पणी ने एक बार फिर साबित किया है कि राजनेताओं को सार्वजनिक मंचों पर बोलते समय अत्यंत सावधान रहना चाहिए। अब सवाल यह है कि:

  1. क्या एसआईटी निष्पक्ष जांच करेगी?
  2. क्या विजय शाह को कानूनी परिणाम भुगतने होंगे?
  3. क्या यह मामला राजनीतिक रूप से और बढ़ेगा?

28 मई को एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल, पूरा देश इस मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।

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