मुंबई-पुणे पर चक्रवात शक्ति का खतरा? IMD ने चेतावनी जारी
चक्रवात शक्ति की आहट, महाराष्ट्र-गोवा अलर्ट पर
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चक्रवात शक्ति के संभावित खतरे को लेकर महाराष्ट्र और गोवा में रेड अलर्ट जारी किया है। अरब सागर में बना कम दबाव का क्षेत्र 36 घंटों में डिप्रेशन में बदल सकता है। अगर यह चक्रवात बनता है, तो इसे ‘शक्ति’ नाम दिया जाएगा।
मुंबई-पुणे में बारिश का कहर, जलभराव की स्थिति
गुरुवार को मुंबई में 27 मिमी बारिश ने सड़कों पर जलभराव कर दिया। सांताक्रूज़ में तापमान 22.5°C तक गिरा। पुणे समेत ठाणे, पालघर में ऑरेंज अलर्ट है। आईएमडी के अनुसार, मई में अब तक 100 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य से 700% अधिक है।
चक्रवात शक्ति के बादल और मछुआरों को चेतावनी
IMD ने मछुआरों को 22-27 मई तक समुद्र में न जाने की सलाह दी है। गुजरात, कर्नाटक और केरल में भी भारी बारिश की आशंका है। 24 मई तक कोंकण-गोवा में कुछ स्थानों पर 200 मिमी से अधिक वर्षा हो सकती है।
केरल में जल्द आ सकता है मानसून
मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून 2-3 दिन में केरल पहुंचेगा। इसके बाद यह तमिलनाडु, लक्षद्वीप और पूर्वोत्तर की ओर बढ़ेगा। हालांकि, चक्रवात शक्ति का असर मानसून पर पड़ सकता है।
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भारत में चक्रवातों का इतिहास और नुकसान
भारत के तटीय इलाके अक्सर चक्रवातों की चपेट में आते रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई विनाशकारी तूफानों ने जान-माल का भारी नुकसान पहुंचाया है।
1. 2019 का चक्रवात फणी: ओडिशा में 89 लोगों की मौत, 1.6 करोड़ लोग प्रभावित
मई 2019 में आया चक्रवात फणी भारत के पूर्वी तट के लिए एक विनाशकारी आपदा साबित हुआ। यह “अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान” (Extremely Severe Cyclonic Storm) के रूप में ओडिशा से टकराया, जिसकी रफ्तार 200 किमी/घंटा तक पहुँची। राज्य में 89 लोगों की मौत हुई, जबकि 1.6 करोड़ लोग प्रभावित हुए।
हालांकि, IMD की सटीक भविष्यवाणी और 12 लाख लोगों के समय पर सुरक्षित स्थानांतरण ने जानलेवा नुकसान को कम किया। फणी ने 50,000 घरों को नष्ट किया, बिजली-पानी की व्यवस्था ठप कर दी, और 9,336 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ।
इसने पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश को भी प्रभावित किया। फणी के बाद ओडिशा ने आपदा प्रबंधन में नई तकनीक और शेल्टर होम्स को मजबूत किया, जो आगे के चक्रवातों में मॉडल बना।
2. 2020 का चक्रवात अम्फान: पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 128 लोगों की जान गई, 13,000 करोड़ का नुकसान
मई 2020 में उत्तर हिंद महासागर में उत्पन्न चक्रवात अम्फान “सुपर साइक्लोनिक स्टॉर्म” बनकर पश्चिम बंगाल और ओडिशा से टकराया। 260 किमी/घंटा की रफ्तार वाले इस तूफान ने 128 लोगों की जान ली और 13,000 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ।
कोलकाता सहित सुंदरबन क्षेत्र में बाढ़ और बिजली ग्रिड ध्वस्त होने से 1.5 करोड़ लोग प्रभावित हुए। 5 लाख घर नष्ट हुए, 10 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई।
IMD ने 3 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानांतरित किया, लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन ने राहत कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना दिया। अम्फान को भारत का सबसे महंगा चक्रवात माना जाता है, जिसने आपदा प्रबंधन में तकनीकी उन्नयन की जरूरत रेखांकित की।
3. 2021 का चक्रवात ताउक्ते: गुजरात और महाराष्ट्र में 174 मौतें, 100,000 पेड़ उखड़े
मई 2021 में अरब सागर में उत्पन्न चक्रवात ताउक्ते “अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान” बनकर गुजरात और महाराष्ट्र से टकराया। 185 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं ने 174 लोगों की जान ली और 1,00,000 से अधिक पेड़ उखाड़ दिए।
गुजरात के तटीय इलाकों में भीषण बाढ़, बिजली ग्रिड ध्वस्त हुए, जबकि मुंबई के निकट बार्ज पी-305 डूबने से 86 लोगों की मौत हुई। 2,000 से अधिक गाँव प्रभावित, 56,000 घर क्षतिग्रस्त हुए, और 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
आईएमडी ने 1.5 लाख लोगों को सुरक्षित निकाला, लेकिन कोविड-19 महामारी ने राहत कार्यों को जटिल बना दिया। यह चक्रवात पश्चिमी भारत के लिए एक झटका और जलवायु संकट का संकेतक बना।
4. 2022 का चक्रवात असानी: पूर्वी तट की चेतावनी
मई 2022 में बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न चक्रवात असानी ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल को प्रभावित किया। “गंभीर चक्रवाती तूफान” श्रेणी के इस चक्रवात ने 105 किमी/घंटा की रफ्तार से तटीय इलाकों में भारी बारिश और तूफानी हवाएं लाईं।
3 लोगों की मौत हुई, जबकि 40,000 लोग प्रभावित हुए। 2,000 घर क्षतिग्रस्त हुए और नाविकों को समुद्र से वापस बुलाया गया। आईएमडी की सटीक भविष्यवाणी और 50,000 लोगों के सुरक्षित स्थानांतरण से बड़ी तबाही रोकी गई। असानी ने पूर्वी तट पर चक्रवात प्रबंधन की तैयारियों की अहमियत को रेखांकित किया।
5. 2022 का चक्रवात सीतरंग: पश्चिम बंगाल की मुश्किलें बढ़ा दी थी
अक्टूबर 2022 में बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात सीतरंग पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तटीय इलाकों से टकराया। 90 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं और भारी बारिश ने भारत में 10 लोगों की जान ली, जबकि 1 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया।
कोलकाता सहित सुंदरबन क्षेत्र में नदियाँ उफनीं, 50,000 घर क्षतिग्रस्त हुए। एनडीआरएफ की टीमों ने 2,500 लोगों को बाढ़ से बचाया। बांग्लादेश में भी 35 मौतें दर्ज हुईं। यह चक्रवात अक्टूबर में आया, जब किसान फसल कटाई की तैयारी कर रहे थे, जिससे कृषि नुकसान बढ़ा। सीतरंग ने तटीय बुनियादी ढाँचे की कमजोरियों को उजागर किया।
6. 2023 का चक्रवात बिपरजॉय: गुजरात-राजस्थान की चुनौती
जून 2023 में अरब सागर में उत्पन्न चक्रवात बिपरजॉय “अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान” (Very Severe Cyclonic Storm) बनकर गुजरात के कच्छ तट से टकराया। 140 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं और भारी बारिश ने 12 लोगों की जान ली, जबकि 1.5 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानांतरित किया गया।
गुजरात के 10 जिलों में 500 गाँव प्रभावित हुए, 1,200 घर ध्वस्त हुए और 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। राजस्थान के बाड़मेर-जैसलमेर में बाढ़ से सड़कें जलमग्न हुईं। आईएमडी की सटीक भविष्यवाणी और NDRF की त्वरित तैनाती ने बड़े पैमाने पर जानमाल के नुकसान को रोका। बिपरजॉय ने अरब सागर में चक्रवातों की बढ़ती तीव्रता के प्रति चेतावनी दी।
7. 2023 का चक्रवात मिचौंग: चेन्नई की जलप्रलय
दिसंबर 2023 में बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न चक्रवात मिचौंग ने तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश को झकझोर दिया। यह “गंभीर चक्रवाती तूफान” 90-100 किमी/घंटा की रफ्तार से चेन्नई के निकट टकराया, जहाँ 24 घंटे में 47 सेमी बारिश ने शहर को जलमग्न कर दिया। 24 लोगों की मौत हुई, जिनमें से अधिकांश बाढ़ या बिजली गिरने से घटनाओं के शिकार हुए।
चेन्नई हवाईअड्डा 48 घंटे बंद रहा, 500 कॉलोनियाँ डूबीं, और 2 लाख लोग विस्थापित हुए। तमिलनाडु में 15,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ, जबकि आंध्र प्रदेश के तिरुपति और नेल्लोर में 10,000 हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई।
एनडीआरएफ ने 5,000 लोगों को बचाया, लेकिन शहरी जल निकासी व्यवस्था की कमजोरियाँ फिर उजागर हुईं। यह चक्रवात जलवायु अनिश्चितता का एक और संकेत था।
8. 2024 का चक्रवात रेमल: पूर्वोत्तर की बर्बादी
मई 2024 में बंगाल की खाड़ी में जन्मे चक्रवात रेमल ने पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय में भीषण तबाही मचाई। 110 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं और लगातार बारिश से 16 लोगों की मौत हुई, जबकि 50,000 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई।
पश्चिम बंगाल के सुंदरबन इलाके में नदियाँ उफनीं, जिससे 200 गाँव जलमग्न हुए। असम में बाढ़ ने 15,000 घरों को नुकसान पहुँचाया, वहीं मेघालय में भूस्खलन से सड़कें अवरुद्ध हुईं। IMD की सटीक चेतावनियों के बावजूद, कोलकाता समेत कई शहरों में बिजली ग्रिड ढह गए।
1.5 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानांतरित किया गया, लेकिन किसानों के लिए धान और सब्जी की फसलों का नुकसान गहरा झटका साबित हुआ। NDRF और SDRF की टीमों ने 5,000 से अधिक लोगों को बचाया। रेमल ने 1,200 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान किया, जो पूर्वोत्तर के लिए जलवायु संकट का एक और संकेत है।
9. 2024 का चक्रवात मिधिली: ओडिशा-बंगाल का संघर्ष
जून 2024 में बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न चक्रवात मिधिली ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों को प्रभावित किया। 95 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं और भारी बारिश से 8 लोगों की मौत हुई, जबकि 10,000 घर क्षतिग्रस्त हुए।
ओडिशा के भद्रक और बालासोर जिलों में नदियाँ उफनीं, जिससे 50 गाँव जलमग्न हो गए। पश्चिम बंगाल के सुंदरबन क्षेत्र में 15,000 लोगों को सुरक्षित स्थानांतरित किया गया। हालांकि, मछुआरों के लिए चेतावनी जारी होने के बावजूद दो नाव डूबने से 3 लोग लापता हुए।
एनडीआरएफ ने 1,200 लोगों को बचाया और 200 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान लगाया गया। मिधिली ने तटीय बुनियादी ढाँचे की कमजोरियाँ फिर उजागर कीं, साथ ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को रेखांकित किया।
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पिछले चक्रवातों से सबक और मौजूदा तैयारी
इन चक्रवातों ने भारत के विभिन राज्यों में जान माल का भारी नुकसान किया साथ ही आपदा प्रबंधन की अहमियत समझाई। आज तटीय राज्य बेहतर ढंग से अलर्ट सिस्टम, साइक्लोन शेल्टर और राहत योजनाओं पर काम कर रहे हैं।
‘चक्रवात शक्ति’ से कैसे बचें?
- IMD के निर्देशों पर सख्ती से अमल करें।
- समुद्र तटों से दूर रहें, नाविक यात्राएं रद्द करें।
- आपातकालीन किट तैयार रखें, जरूरी दवाएं स्टॉक करें।
नागरिकों के लिए IMD की गाइडलाइन
आईएमडी ने लोगों से बिजली के खंभों, पेड़ों से दूर रहने को कहा है। मोबाइल ऐप और टेलीविजन और रेडियो पर अपडेट लेते रहें। स्थानीय प्रशासन से संपर्क नंबर साझा किए गए हैं।
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सतर्कता ही बेहतर सुरक्षा है
चक्रवात शक्ति का खतरा गंभीर है, लेकिन सही तैयारी से नुकसान कम किया जा सकता है। IMD की चेतावनियों को नजरअंदाज न करें। प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलें, सुरक्षित रहें।



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