आवारा कुत्तों का मामला: सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ करेगी सुनवाई
आवारा कुत्तों का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की एक बड़ी पीठ का गठन किया है। यह कदम दो न्यायाधीशों की पिछली पीठ के उस आदेश के बाद उठाया गया, जिसमें आवारा कुत्तों को आश्रय गृहों में स्थानांतरित करने के लिए कहा गया था। इस फैसले का व्यापक विरोध हुआ था।
- न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया इस नई पीठ का हिस्सा हैं।
- पिछली पीठ में न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन शामिल थे।
- यह पीठ आवारा कुत्तों के मुद्दे से संबंधित कई याचिकाओं पर विचार करेगी।
न्यायालय ने कहा, “आदेश पारित करने वाले न्यायाधीश इस पीठ का हिस्सा नहीं हैं।” यह कदम पिछले आदेशों पर उत्पन्न जनाक्रोश को देखते हुए उठाया गया है।
मुख्य बिंदु :
- सुप्रीम कोर्ट ने तीन-न्यायाधीशों की पीठ बनाकर आवारा कुत्तों के आदेश की समीक्षा शुरू की।
- 11 अगस्त के आदेश में सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर आश्रय स्थलों में भेजने का निर्देश दिया गया।
- आदेश पर राजनेताओं, पशु अधिकार समूहों और जनता ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
- अदालत ने आठ सप्ताह में नए आश्रय स्थल बनाने और सीसीटीवी निगरानी का आदेश दिया।
- 2024 में देशभर में 37 लाख से अधिक कुत्तों के काटने के मामले दर्ज किए गए।
- एनजीओ ने आदेश को पिछले सुप्रीम कोर्ट निर्देशों के विपरीत बताते हुए चुनौती दी।
- शशि थरूर ने आवारा कुत्ता प्रबंधन निधि सीधे एनजीओ को देने का सुझाव दिया।
आवारा कुत्तों का मामला, पिछले आदेश और जनता की तीखी प्रतिक्रिया
11 अगस्त को, सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नगर निगमों को सभी आवारा कुत्तों को पकड़ने और आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। इस आदेश पर राजनेताओं, मशहूर हस्तियों और पशु अधिकार समूहों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।
- राहुल गांधी ने इसे “क्रूर और अदूरदर्शी” बताया।
- पेटा इंडिया ने इस फैसले को “अव्यावहारिक, अतार्किक और अवैध” कहा।
- इस आदेश के विरोध में कई लोग इंडिया गेट पर भी एकत्र हुए थे।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि कुत्ते सबसे सुंदर प्राणी हैं और ऐसी क्रूरता के हकदार नहीं हैं। मेनका गांधी ने भी इस आदेश पर सवाल उठाए, क्योंकि दिल्ली में 3 लाख आवारा कुत्ते हैं।
आश्रय स्थलों के संबंध में न्यायालय के निर्देश
अदालत ने अधिकारियों को आठ सप्ताह के भीतर नए आश्रय स्थल स्थापित करने का निर्देश दिया, जिनमें कुत्तों के लिए नसबंदी, कृमिनाशक और टीकाकरण की पर्याप्त सुविधाएं हों। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कुत्तों के साथ कोई क्रूरता या दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, अदालत ने गोद लेने की योजनाओं पर भी चर्चा की, लेकिन अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी कि गोद लेने के बाद किसी भी कुत्ते को सड़कों पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
- आश्रय स्थलों में कमजोर जानवरों के लिए अलग आवास की व्यवस्था होनी चाहिए।
- अदालत ने लगभग 5,000 कुत्तों के लिए आश्रय स्थल बनाने का लक्ष्य रखा।
- आश्रय स्थलों की सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी ताकि कोई कुत्ता वापस सड़कों पर न छोड़ा जाए।
परस्पर विरोधी आदेश और मुख्य न्यायाधीश का हस्तक्षेप
कुछ गैर सरकारी संगठनों ने दलील दी कि 11 अगस्त का आदेश सर्वोच्च न्यायालय के पिछले निर्देशों के विपरीत है। पिछले साल, न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने अधिकारियों को पशु जन्म नियंत्रण नियमों का पालन करने का निर्देश दिया था।
- NGO ने मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई से इस पर ध्यान देने का अनुरोध किया।
- मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले पर गौर करने का आश्वासन दिया।
- दो न्यायाधीशों की पीठ के आदेश को केवल तीन न्यायाधीशों की पीठ ही रद्द कर सकती है।
आवारा कुत्तों का मामला अब तीन-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष है, जो परस्पर विरोधी आदेशों की समीक्षा करेगी। आवारा कुत्तों के मामले में जनता की प्रतिक्रिया ने न्यायपालिका को इस मुद्दे पर गहराई से विचार करने के लिए मजबूर किया है।
कुत्तों के काटने के आँकड़े और न्यायालय की चिंता
अदालत के 11 अगस्त के आदेश में कुत्तों के काटने के बढ़ते मामलों का उल्लेख किया गया था। यह जानकारी लोकसभा में प्रस्तुत सरकारी आँकड़ों पर आधारित थी, जिसमें रेबीज़ से होने वाली मौतों पर भी चिंता व्यक्त की गई थी। अदालत ने विशेष रूप से उन लोगों के लिए चिंता व्यक्त की, जो सड़कों पर सोते हैं और जिनके पास एहतियाती उपाय नहीं होते हैं।
- 2024 में देश में कुत्तों के काटने के 37 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए।
- दिल्ली में 2024 में 25,201 मामले और जनवरी 2025 में 3,196 मामले सामने आए।
- अदालत ने कहा कि दृष्टिबाधितों, बच्चों और बुज़ुर्गों को कुत्तों के काटने का सबसे ज़्यादा ख़तरा है।
आवारा कुत्तों को लेकर शशिक थारूर और अन्य की राय
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए धन के उपयोग की समीक्षा की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि यह धनराशि नगर निकायों के बजाय सीधे गैर सरकारी संगठनों को दी जानी चाहिए, क्योंकि स्थानीय निकाय अक्सर इस काम में असफल रहते हैं।
- थरूर ने कहा कि आवंटित धनराशि का अक्सर दुरुपयोग होता है।
- राहुल गांधी ने कहा कि ये बेजुबान जानवर कोई समस्या नहीं हैं।
- मेनका गांधी ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए।
भारत में आवारा कुत्तों की संख्या पर भी आँकड़े जारी किए गए हैं, जिसमें ओडिशा में सबसे अधिक और मणिपुर व लक्षद्वीप में कोई भी आवारा कुत्ता नहीं होने की बात कही गई है। नीदरलैंड दुनिया का एकमात्र देश है जहाँ कोई आवारा कुत्ता नहीं है।



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