अंबानी-निर्भर भारत: क्रोनी कैपिटलिज्म ने देश को बर्बाद कर दिया!
अंबानी-निर्भर भारत की यह कहानी सिर्फ एक परिवार के धनवान होने की नहीं, बल्कि देश के बैंक बैलेंस को बर्बाद करने की गाथा है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 800 पन्नों की रिपोर्ट ने इस राज को खोल दिया है। 2014 से 2024 तक, BSNL ने जियो को 1,757.76 करोड़ रुपये का टावर-फाइबर बिल माफ़ कर दिया।
चौंकिए मत! इस राशि में FDD-TDD टेक्नोलॉजी का अलग चार्ज भी नहीं लगाया गया। मोदी सरकार ने BSNL को 4G स्पेक्ट्रम आवंटन से रोककर निजी टेलीकॉम कंपनियों, विशेषकर जियो, को फ्री-राइड दी।
इसका नतीजा यह हुआ कि BSNL आज 1.68 लाख कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रहा है, जबकि जियो 45% मार्केट शेयर के साथ टेलीकॉम सेक्टर का ‘राजा’ बन गया है। यह ‘डिजिटल इंडिया’ नहीं, बल्कि खुलेआम ‘डिजिटल डकैती’ है, जहाँ जनता का टैक्सपेयर पैसा अंबानी की जेब में जा रहा है।
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BSNL की कमर टूटी, जियो ने बाजार पर कब्जा किया
साल 2016 में, जियो की फ्री वॉयस-डेटा स्कीम ने टेलीकॉम बाजार में भूचाल ला दिया। इसका सीधा शिकार एयरटेल, वोडाफोन जैसी कंपनियाँ हुईं, जो दिवालिया होने की कगार पर पहुँच गईं, और BSNL की तो कमर ही टूट गई। CAG रिपोर्ट स्पष्ट कहती है: “MSA अनफोर्स्ड (बिना लागू किए गए), जिसके कारण पेनल इंटरेस्ट समेत 1,757 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
” जब BSNL से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बचाव में कहा कि “हमने 108 करोड़ का बिल भेजा था”—लेकिन सवाल यह है कि 10 साल तक चुप्पी क्यों साधी गई? वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि यह ‘मित्र’ प्रेम का प्रमाण है, जो क्रोनी कैपिटलिज्म का क्लासिक केस है: दोस्त को फायदा और देश को घाटा।
कॉस्ट कटिंग का बहाना, शादी में 5000 करोड़ का खर्च
वित्त वर्ष 2024 में रिलायंस इंडस्ट्रीज की दोहरी नीति सामने आई, जिसने 42,000 नौजवानों को ‘कॉस्ट कटिंग’ के नाम पर सड़क पर ला दिया। स्टाफ की संख्या 2.46 लाख से घटकर 2.07 लाख हो गई, जिसमें 90% छंटनी रिटेल सेक्टर से थी। वहीं दूसरी ओर, मुकेश अंबानी ने बेटे अनंत की शादी में ‘कॉस्ट कटिंग’ की परवाह किए बिना 5,000 करोड़ रुपये उड़ा दिए।
अकेले जस्टिन बीबर को 83 करोड़ और रिहाना को 74 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। शादि डॉट कॉम (Shaadi.com) के फाउंडर अनुपम मित्तल ने ‘X’ पर सवाल उठाया: “मीडिया खामोश क्यों है? 42,000 मोदी-भक्त बेरोजगार कर दिए गए, फिर भी चुप!” जियो ने भी 95,326 से 90,067 कर्मचारी घटाए, रिटेल में 38,000 कम किए।
नेट हायरिंग 2.63 लाख से 1.71 लाख पर आ गई, जिसे मित्तल ने “अर्थव्यवस्था के लिए अलार्म” बताया। नेटिज़न्स का कहना था कि “शादी में कॉन्फेटी का खर्चा निकालने के लिए लेऑफ़!”
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गरीब का पेट खाली, ‘मित्र’ का निजी एयरपोर्ट
नरेंद्र मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नारा दिया था, लेकिन हकीकत में उन्होंने इसे ‘अंबानी-निर्भर भारत’ में बदल दिया है। नीतियां इस तरह से बनाई गईं कि कॉर्पोरेट मुनाफा बढ़ता रहे, जबकि मजदूर और किसान हताश होते रहें। रिलायंस रिटेल ने 3,300 नए स्टोर जोड़े, लेकिन नेट ग्रोथ केवल 800 रही, जो धीमी वृद्धि और उच्च टर्नओवर को दर्शाती है।
42,000 परिवार भुखमरी की कगार पर आ गए, लेकिन अनंत की प्री-वेडिंग के लिए एक छोटे से हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाकर 1,500 प्राइवेट जेट उतारे गए! यह विरोधाभास अंबानी-निर्भर भारत की हकीकत बयां करता है, जहाँ जनता के लिए ‘कॉस्ट एफिशिएंसी’ है, जबकि अंबानी परिवार के लिए सुपर से भी ऊपर की लग्जरी।
ट्रम्प की गाज और निर्यातकों की बर्बादी
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद, रूस ने भारत को क्रूड ऑयल पर 3 से 7 डॉलर प्रति बैरल का 40% डिस्काउंट दिया। मुकेश अंबानी ने इस सस्ते क्रूड को जामनगर रिफाइनरी में रिफाइन किया और इसे G7 देशों को ऊंचे मुनाफे पर बेचकर $36 बिलियन कमाए। इस मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रम्प भड़क उठे और आरोप लगाया कि “मोदी-पुतिन क्रूड ऑयल आयात समझौते से अंबानी का पेट्रोल पंप खूब पैसा उगाल रहा है!
” नतीजा यह हुआ कि अगस्त 2025 को ट्रम्प ने भारत के निर्यात पर 50% टैरिफ थोप दिया। इसकी गाज टेक्सटाइल, लेदर, हैंडीक्राफ्ट जैसे छोटे और मझोले निर्यातकों पर गिरी। तिरुपुर की 60,000 फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर हैं, भदोही का कालीन निर्यात चौपट हो गया, जिससे 50 लाख मजदूर बेरोजगार हुए, जिनमें 65% महिलाएं हैं।
सूरत के डायमंड पॉलिशर रो रहे हैं: “अंबानी का मुनाफा, भारत की हुनरमंद जनता की बर्बादी!” छोटे निर्यातक 40-50% ऑर्डर गंवा चुके हैं। बांग्लादेश और वियतनाम को सिर्फ 15% टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है।
तमिलनाडु (TN) को $3.93 बिलियन (₹34,642 करोड़) का नुकसान और 30 लाख जॉब्स जोखिम में हैं। यह ‘मेक इन इंडिया’ नहीं, बल्कि एक अरबपति की हवस के कारण ‘ब्रेक इंडिया’ है।
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तेल की लॉन्ड्रिंग और देश की जीडीपी को नुकसान
ट्रम्प का सीधा आरोप था कि भारत की इस खरीद से पुतिन की ‘वॉर मशीन’ को फंड मिला। जामनगर रिफाइनरी ने 50% क्रूड रूस से लिया। 2025 में मुकेश अंबानी ने 18.3 मिलियन टन रूसी क्रूड ($8.7 बिलियन, 64% YoY ग्रोथ) इम्पोर्ट किया। रिफाइंड प्रोडक्ट्स का निर्यात EU को $19.7 बिलियन और US को $6.3 बिलियन का हुआ, जिसमें $2.3 बिलियन का हिस्सा रशियन क्रूड से बना था।
इस ‘ट्रम्प-मोदी वॉर’ की कीमत देश की जनता चुका रही है। 50% टैरिफ से भारत का US निर्यात $37 बिलियन घटेगा, जिससे देश की GDP 0.6% नीचे धकेल दी गई है। हुनरमंद हैंडीक्राफ्ट बनाने वाले गाँव के लोगों के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है।
टैक्स हेवन और ‘सिंगापुर बैंक’ में काला धन
सवाल यह है कि ये अथाह मुनाफ़ा कहाँ पार्क किया जा रहा है? जवाब है: सिंगापुर! 2022 में मुकेश अंबानी ने सिंगापुर में फैमिली ऑफिस खोला, जहाँ $20 मिलियन से अधिक HNIs की लाइन लगी है। पंडोरा पेपर्स में अनिल अंबानी के 18 ऑफशोर फर्म और $1.3 बिलियन का मामला सामने आया।
जामनगर रिफाइनरी में रूसी क्रूड रिफाइन करके EU को एक्सपोर्ट किया जाता है, और प्रॉफिट का एक बड़ा हिस्सा टैक्स हेवन (Tax Haven) में GST और कॉर्पोरेट टैक्स चोरी करके जमा किया जाता है। मोदी जी के ‘मित्र’ जो ठहरे, इसलिए ED-CBI सोई हुई है। सिंगापुर में 700 से अधिक फैमिली ऑफिस हैं, AUM SGD 5.4 ट्रिलियन है।
नीता अंबानी फैमिली ऑफिस सेटअप में मदद कर रही हैं। अंबानी के ग्लोबल एसेट्स में Stoke Park ($79 मिलियन) और Mandarin Oriental ($98 मिलियन) शामिल हैं, जो उनकी हॉस्पिटैलिटी विंग (Reliance Industrial Investments) ने अधिग्रहित किए हैं। लेकिन यह सब अंबानी-निर्भर भारत की उस कीमत पर हो रहा है, जहाँ 42,000 युवाओं की जिंदगी में अंधेरा छाया है।
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जागो भारत, 2029 में गुलामी से बचो!
यह साफ है कि नरेंद्र मोदी की मदद से BSNL की लाश पर जियो का महल खड़ा किया गया। BSNL को 2014 से 4G और 5G बिडिंग से रोका गया और 1,757 करोड़ का बिल माफ़ किया गया। 42,000 युवाओं की छंटनी हुई, जबकि शादी में 5,000 करोड़ खर्च हुए। ट्रम्प टैरिफ की मार से अकेले तिरुपुर में 50 लाख लोग बेरोजगार हुए।
यह ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ नहीं, बल्कि ‘वसुधा अंबानी कुटुम्बकम’ है। जामनगर रिफाइनरी ATM बन गई, $17 बिलियन की बचत हुई, लेकिन छोटे निर्यातक बर्बाद हो गए। यह ‘विकसित भारत’ नहीं, ‘विनाशित भारत’ है।
जनता को अब जागना होगा! RTI मांगो, वोट दो, सड़क पर उतरो। अंबानी-अडाणी का हिसाब लो, वरना 2029 में आप गुलाम बनोगे। यह क्रोनी कैपिटलिज्म की पराकाष्ठा है—एक की तिजोरी के लिए लाखों की लाशें!



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