“एशिया कप भारत-पाकिस्तान विवाद: क्रिकेट से बड़ी राष्ट्र भावना?”
भारत-पाकिस्तान क्रिकेट विवाद एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला क्रिकेट मैच इस समय देश में तीखी बहस का केंद्र बन गया है। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद, विपक्ष और आम जनता के एक बड़े तबके का मानना है कि इस समय पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेलना शहीदों के परिवारों की भावनाओं का अपमान है।
शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय गृह मंत्री से बीसीसीआई अध्यक्ष से मैच रद्द करने का अनुरोध करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि “पाकिस्तानी क्रिकेटर अपने सोशल मीडिया पर हमें और ऑपरेशन सिंदूर का अपमान करते पाए गए। वे हमेशा अपने देश के आतंकवादियों के साथ खड़े रहे।”
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए सवाल उठाया कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते, तो फिर खून और क्रिकेट एक साथ कैसे बह सकते हैं?”
ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार ने “देशभक्ति का धंधा” बना लिया है और केवल पैसे के लिए यह मैच करवा रही है। आम आदमी पार्टी (आप) और एआईएमआईएम के कार्यकर्ताओं ने भी दिल्ली और उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन किए।
आप के नेताओं ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों के पुतले जलाए और मैच के बहिष्कार का आह्वान किया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर पूछा कि “प्रधानमंत्री को पाकिस्तान के साथ मैच आयोजित करने की क्या ज़रूरत है?” और क्या यह भी “ट्रंप के दबाव में किया जा रहा है?”
एक शहीद की पत्नी का भावुक आह्वान
पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशन्या द्विवेदी की पीड़ा ने इस विरोध को और भी मार्मिक बना दिया है। उन्होंने बीसीसीआई पर उन 26 परिवारों की भावनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया, जिन्होंने अपनों को खोया है।
ऐशन्या ने भावुक होकर कहा, “मुझे लगता है कि बीसीसीआई उन 26 परिवारों के प्रति भावुक नहीं है… हमारे क्रिकेटर क्या कर रहे हैं? कहा जाता है कि क्रिकेटर राष्ट्रवादी होते हैं। लेकिन एक-दो क्रिकेटरों को छोड़कर, किसी ने आगे आकर यह नहीं कहा कि हमें पाकिस्तान के खिलाफ मैच का बहिष्कार करना चाहिए।”
उन्होंने प्रायोजकों और प्रसारकों से भी पूछा कि क्या वे इस मैच से होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए होते देखना चाहेंगे। ऐशन्या ने देशवासियों से मैच का बहिष्कार करने और टीवी पर भी इसे न देखने का आग्रह किया।
भाजपा का स्पष्टीकरण: अनिवार्यता या मजबूरी?
इस पूरे विरोध के बीच, भाजपा सांसद और पूर्व खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय मुकाबले नहीं खेलेगा, लेकिन मौजूदा एशिया कप और आईसीसी आयोजनों जैसे बहुपक्षीय टूर्नामेंटों में उनका सामना करना जारी रखेगा।
उन्होंने कहा, “जब एसीसी या आईसीसी द्वारा बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट आयोजित किए जाते हैं, तो देशों के लिए उनमें भाग लेना एक मजबूरी और अनिवार्यता बन जाती है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें टूर्नामेंट से बाहर कर दिया जाएगा, उन्हें मैच छोड़ना होगा और दूसरी टीम को अंक मिलेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि “हमने वर्षों से यह निर्णय लिया है कि जब तक पाकिस्तान भारत पर आतंकवादी हमले बंद नहीं कर देता, तब तक भारत पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय टूर्नामेंट नहीं खेलेगा।” यह बयान सरकार की नई खेल नीति को भी रेखांकित करता है।
क्रिकेट जगत की राय और टीम का रुख
भारतीय टीम के सहायक कोच रयान टेन डोएशेट ने कहा कि खिलाड़ी इस भारत-पाकिस्तान क्रिकेट विवाद और जनता की भावनाओं से वाकिफ हैं। उन्होंने बताया कि टीम मीटिंग में भी इस पर चर्चा हुई है और खिलाड़ियों को भावनाओं पर काबू रखकर अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है।
टेन डोएशेट के अनुसार, “यह स्पष्ट रूप से एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है, और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि खिलाड़ी भारतीय जनता के विशाल बहुमत की सहानुभूति और भावनाओं को साझा करते हैं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीम को सिर्फ बीसीसीआई और भारत सरकार के निर्देशों का पालन करना है।
इस बीच, गौतम गंभीर ने भी अपनी टीम को एक सीधा संदेश दिया है: “जो चीजें हमारे नियंत्रण में नहीं हैं, उनके बारे में चिंता न करें… सिर्फ़ क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करें।”
विपक्ष और सरकार के बीच तनातनी
आप और शिवसेना (यूबीटी) के अलावा, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस भारत-पाकिस्तान क्रिकेट विवाद पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि “पहलगाम हमले को यूँ ही ‘नज़रअंदाज़’ नहीं किया जा सकता, लेकिन खेलों को राजनीति का शिकार नहीं बनना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य मुद्दा हमेशा द्विपक्षीय मैचों का रहा है, न कि बहुपक्षीय टूर्नामेंटों का। इस बीच, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि इतने बड़े देश में क्रिकेट मैच को लेकर मतभेद होना स्वाभाविक है। इस पूरे हंगामे के बावजूद, यह मैच दुबई में होने जा रहा है, और खबरें हैं कि टिकटों की बिक्री भी उतनी अच्छी नहीं है, जितनी उम्मीद की जा रही थी। यह संभवतः जनता के बीच की नाराजगी को दर्शाता है।
यह पहला मैच होगा जो पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद हो रहा है, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे।



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