भारत-चीन सीधी उड़ानें: क्या 4 साल बाद सुधर रहे हैं संबंध?
भारत और चीन सीधी उड़ानें फिर से शुरू कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों में आई नरमी का संकेत मिलता है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 31 अगस्त को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की संभावित यात्रा से पहले उठाया गया है। दोनों पक्ष चार साल से चल रहे सैन्य गतिरोध के बाद संबंधों को सामान्य बनाने पर बातचीत कर रहे हैं।
- भारत-चीन सीधी उड़ानें अगले महीने की शुरुआत से फिर से शुरू हो सकती हैं।
- सरकार ने इंडिगो और एयर इंडिया को उड़ानों के लिए तैयारी शुरू करने को कहा है।
- यह कदम दोनों देशों के बीच तनाव कम होने का एक महत्वपूर्ण संकेत है।
गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद से संबंध तनावपूर्ण थे, लेकिन अब सुधार के संकेत मिल रहे हैं। यह बहाली लोगों के बीच आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी।
मुख्य बिंदु :
- भारत और चीन अगले महीने की शुरुआत में सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने पर सहमत हुए।
- सरकार ने इंडिगो और एयर इंडिया को उड़ान संचालन की तैयारी शुरू करने का निर्देश दिया।
- गलवान घाटी झड़प के बाद 2020 में सीधी उड़ानों का संचालन पूरी तरह से रोक दिया गया था।
- प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त को चीन में एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
- मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात में सीमा विवाद समाधान पर चर्चा की उम्मीद।
- सीमा व्यापार और उर्वरक निर्यात प्रतिबंध हटाने पर भी प्रगति की जानकारी दी गई।
- भारत का मानना है कि सीमा पर शांति और स्थिरता मजबूत संबंधों की मुख्य कुंजी है।
सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने की योजना और चुनौतियाँ
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गतिरोध के कारण 2020 में सीधी उड़ानें बंद हो गईं थीं। तब से, यात्रियों को हांगकांग या सिंगापुर जैसे केंद्रों से होकर गुजरना पड़ता था, जिससे यात्रा का समय और लागत काफी बढ़ गई थी। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, एक अद्यतन हवाई सेवा समझौते को अंतिम रूप देना बाकी है, लेकिन अधिकारियों ने विमानन कंपनियों को तैयारी शुरू करने के लिए कहा है।
- नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइनों को उड़ानें संचालित करने के लिए तैयार रहने को कहा है।
- हवाई सेवा समझौते को अद्यतन किए बिना भी उड़ानें फिर से शुरू करने का विकल्प है।
- पर्याप्त विमानों की कमी एक ऐसी चुनौती है जिस पर भारतीय अधिकारी विचार कर रहे हैं।
इससे पहले एयर इंडिया, इंडिगो, एयर चाइना, चाइना सदर्न और चाइना ईस्टर्न सीधी उड़ानें संचालित करते थे। अब उम्मीद है कि इंडिगो और एयर इंडिया सबसे पहले वापसी करेंगी।
पीएम मोदी की चीन यात्रा: SCO शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय वार्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के तियानजिन की यात्रा करेंगे। यह 2019 के बाद उनकी पहली चीन यात्रा होगी और इस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बातचीत की भी उम्मीद है। यह मुलाक़ात LAC पर गतिरोध को समाप्त करने के लिए बनी सहमति के बाद हुई कई बैठकों में से एक है।
- यह यात्रा दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को स्थिर करने का प्रयास है।
- भारत और चीन दोनों ही इस यात्रा को संबंधों में सुधार के लिए एक अवसर मान रहे हैं।
- एससीओ शिखर सम्मेलन सुरक्षा, व्यापार और राजनीतिक सहयोग पर केंद्रित एक क्षेत्रीय समूह है।
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से सीमा विवादों को सुलझाने और संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों को गति मिल सकती है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाक़ात के दौरान इन मुद्दों को उठाया था।
व्यापार और अन्य मुद्दों पर हुई प्रगति
सीधी उड़ानों के साथ-साथ सीमा व्यापार और उर्वरक निर्यात पर भी चर्चा हुई है। 2020 में बंद हुए उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रा, हिमाचल प्रदेश में शिपकी ला और सिक्किम में नाथू ला के निर्दिष्ट बिंदुओं के माध्यम से सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने पर भी बातचीत चल रही है। चीन द्वारा भारत को उर्वरक निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों पर भी “आगे की प्रगति” हुई है।
- विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा को इस बारे में जानकारी दी।
- भारत ने चीन के समक्ष उर्वरक निर्यात पर लगे प्रतिबंधों का मुद्दा उठाया था।
- दोनों पक्ष इन सभी व्यापार मार्गों को फिर से शुरू करने में सहायता के लिए बातचीत कर रहे हैं।
- चीन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से निपटने के लिए भारत ने सऊदी अरब के साथ दीर्घकालिक समझौते किए हैं।
- भारत का मानना है कि सीमा पर शांति और सौहार्द मजबूत संबंधों की कुंजी है।



Post Comment