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2001 हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने छोटा राजन की आजीवन कारावास की सजा

छोटा राजन आजीवन कारावास

सुप्रीम कोर्ट ने 2001 के जया शेट्टी हत्याकांड में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को पलट दिया है, जिसमें गैंगस्टर राजेंद्र निकालजे, जिसे छोटा राजन के नाम से जाना जाता है, की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा 23 अक्टूबर, 2024 को दी गई जमानत को रद्द कर दिया। इस मामले में सीबीआई ने एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी, जिसे जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने स्वीकार कर लिया। यह फैसला मुंबई के होटल व्यवसायी जया शेट्टी की 2001 की हत्या से जुड़ा है।

बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश क्यों हुआ रद्द?

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 23 अक्टूबर, 2024 के आदेश को पलट दिया, जिसमें छोटा राजन को जमानत दी गई थी और उसकी आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया गया था। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पीठ ने छोटा राजन की राहत पर आपत्ति जताई और उसके आपराधिक इतिहास तथा 27 साल तक फरार रहने के तथ्य का हवाला दिया। पीठ ने हैरानी जताते हुए टिप्पणी की, “चार बार दोषी ठहराए जाने और 27 साल तक फरार रहने के बाद…ऐसे व्यक्ति की सजा निलंबित क्यों?”

सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की पैरवी की। पीठ ने सीबीआई की याचिका को स्वीकार कर लिया और निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को बहाल कर दिया।

क्या था जया शेट्टी हत्याकांड?

यह मामला मध्य मुंबई के गामदेवी इलाके में स्थित गोल्डन क्राउन होटल की मालकिन जया शेट्टी की हत्या से जुड़ा है। 4 मई, 2001 को, शेट्टी की होटल की पहली मंजिल पर छोटा राजन गिरोह के दो कथित सदस्यों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। जांच से पता चला कि शेट्टी को छोटा राजन के एक करीबी सहयोगी हेमंत पुजारी से जबरन वसूली की धमकियां मिली थीं, और उनकी बात न मानने पर उनकी हत्या कर दी गई थी।

इस हत्याकांड में दो दशकों में कई मुकदमे चले। शूटर अजय मोहिते को 2004 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि दो अन्य, प्रमोद धोंडे और राहुल पानसरे को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया, लेकिन संगठित अपराध में सहयोग करने के आरोप में उन्हें पाँच साल की जेल हुई। एक अन्य आरोपी, कुंदनसिंह रावत, मोहिते के साथ घटनास्थल से भाग गया, लेकिन 2003 में एक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।

निचली अदालत का फैसला और बचाव पक्ष के तर्क

मई 2024 में, महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की एक विशेष अदालत ने राजन और चार अन्य को शहर के एक रेस्टोरेंट मालिक शेट्टी की हत्या की साजिश रचने का दोषी ठहराया था। राजन को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक षडयंत्र) के साथ-साथ मकोका की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया और ₹16 लाख का जुर्माना लगाया गया।

निचली अदालत ने कुल 16,00,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस फैसले के बाद, राजन ने इस सजा के खिलाफ बॉम्बे उच्च न्यायालय में अपील की, जिसने उसकी सजा को निलंबित कर दिया और अपील लंबित रहने तक उसे जमानत पर रिहा कर दिया।

अदालत में छोटा राजन के वकील ने तर्क दिया कि मामले में कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने बताया कि राजन के खिलाफ दर्ज 71 मामलों में से सीबीआई ने ठोस सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए 47 मामले बंद कर दिए थे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह हत्या के मामले में उसकी दूसरी दोषसिद्धि थी।

हालाँकि, अदालत ने इस बचाव को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा, “आपके मुवक्किल का नाम पहले से ही काफी बदनाम है।” पीटीआई के अनुसार, पीठ ने आगे कहा कि छोटा राजन को बरी किए जाने के कई मामले गवाहों के गवाही देने से डरने के कारण हुए होंगे।

छोटा राजन का आपराधिक इतिहास

छोटा राजन अभी भी न्यायिक हिरासत में है और पहले से ही एक अन्य मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है – 2011 में मिड-डे के अपराध पत्रकार जे डे की हत्या का मामला। उसे प्रतिद्वंद्वी गैंगस्टर फरीद तनाशा की हत्या और एक अन्य होटल व्यवसायी बी.आर. शेट्टी और सट्टेबाज से बिल्डर बने अजय गोसालिया को निशाना बनाकर की गई गोलीबारी में भी दोषी पाया गया है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, राजन के खिलाफ दर्ज 71 मामलों में से सात में उसे दोषी ठहराया जा चुका है—जिनमें से छह मुंबई में हैं—जबकि कम से कम सात और मामले लंबित हैं।

राजन सहित फरार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा अक्टूबर 2015 में इंडोनेशिया के बाली हवाई अड्डे पर उसकी गिरफ्तारी तक जारी रहा। उसे उसी वर्ष भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया और महाराष्ट्र सरकार ने उसके सभी मामले सीबीआई को सौंप दिए।

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