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चुनाव आयोग का विरोध: राहुल गांधी समेत 300 नेता हिरासत में

चुनाव आयोग का विरोध

विपक्षी दलों ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ चुनाव आयोग का विरोध किया, जिसका उद्देश्य कथित तौर पर मतदाता सूची में हेरफेर करना है। कांग्रेस ने 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान बेंगलुरु के महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर हेरफेर का भी विरोध किया है। दिल्ली पुलिस ने सोमवार को 30 से अधिक विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया, जिसमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल थे।

  • विपक्षी नेता संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च कर रहे थे।
  • वे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मुद्दे पर एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे।
  • चुनाव आयोग ने केवल 30 सांसदों को ही परिसर में जाने की अनुमति दी थी।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि किसी ने भी विरोध मार्च के लिए अनुमति नहीं मांगी थी।

राहुल गांधी का बयान: ‘संविधान बचाने की लड़ाई’

राहुल गांधी ने इस लड़ाई को राजनीतिक नहीं, बल्कि संविधान बचाने के लिए बताया। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए एक साफ मतदाता सूची अनिवार्य है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी समेत 300 विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया और बस में भरकर ले जाया गया।

  • नेताओं ने चुनाव आयोग और मोदी सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
  • उन्होंने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।
  • राहुल गांधी ने कहा, “हम एक साफ-सुथरी मतदाता सूची चाहते हैं।”

बिहार में होने वाले चुनावों में बड़ी संख्या में गरीब मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया गया।

बिहार में मतदाता सूची का विवाद: क्या है मुद्दा?

भारत के विपक्षी दलों ने बिहार में मतदाता सूची के विवादास्पद संशोधन को वापस लेने की मांग की है। उनका आरोप है कि इससे बड़ी संख्या में नागरिक मतदान करने से वंचित हो सकते हैं। इस प्रक्रिया में जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट और मैट्रिकुलेशन रिकॉर्ड जैसे सख्त दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। चुनाव आयोग का विरोध करना विपक्ष के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है। चुनाव आयोग ने आरोपों का खंडन किया और कहा कि यह एक नियमित अपडेट है।

  • बिहार में ये दस्तावेज़ मिलना मुश्किल है, साक्षरता दर भारत में सबसे कम है।
  • आलोचकों का कहना है कि इसका सबसे ज़्यादा असर अल्पसंख्यकों पर पड़ेगा।
  • भारत के पास कोई विशिष्ट राष्ट्रीय पहचान पत्र नहीं है, “आधार” भी स्वीकार्य नहीं है।

भाजपा का पक्ष: ‘अराजकता’ फैलाने का आरोप

भाजपा ने इस संशोधन का समर्थन किया है और कहा है कि यह एक आवश्यक कदम है। पार्टी का मानना है कि नए मतदाताओं को अपडेट करना और उन लोगों के नाम हटाना ज़रूरी है जो मर चुके हैं या दूसरे राज्यों में चले गए हैं। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि लगातार हार के कारण विपक्ष दिवालिया होने की स्थिति में है।

  • भाजपा ने कहा कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया पर संदेह के बीज बो रहा है।
  • भाजपा ने इस प्रक्रिया को बांग्लादेश से आए अनिर्दिष्ट मुस्लिम प्रवासियों को बाहर निकालने के लिए ज़रूरी बताया।
  • आलोचकों ने इस प्रक्रिया की तुलना असम में 2019 की नागरिकता सूची से की है।

विपक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के बारे में भी शिकायत की है।

विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई: क्या हुआ?

विपक्षी सांसदों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया, जब उन्हें बिहार में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ के खिलाफ उनके विरोध मार्च के दौरान रोका गया। विपक्षी नेता संसद भवन स्थित मकर द्वार से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकालना चाहते थे। पुलिस ने उन्हें परिवहन भवन के पास बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया, जहां उन्होंने धरना दिया।

  • अखिलेश यादव, महुआ मोइत्रा और सुष्मिता देव बैरिकेड्स पर चढ़ते देखे गए।
  • पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया और बसों में संसद मार्ग पुलिस स्टेशन ले गई।
  • राज्यसभा और लोकसभा में विपक्ष के नेता, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी भी हिरासत में लिए गए।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और टीएमसी सांसद सागरिका घोष भी विरोध में शामिल थीं। चुनाव आयोग का विरोध मार्च में कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।

सारांश

विपक्षी दलों ने बिहार में मतदाता सूची के संशोधन को लेकर चुनाव आयोग का विरोध किया। दिल्ली पुलिस ने मार्च निकाल रहे राहुल गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए है और वे एक साफ मतदाता सूची चाहते हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज कर दिया है, जबकि भाजपा ने इसे विपक्ष की ‘अराजकता’ फैलाने की कोशिश बताया है। यह विरोध प्रदर्शन भारत के लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया में बढ़ते तनाव को दर्शाता है।

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