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गोवा क्लब में आग: 25 लोगों की दर्दनाक मौत, अरपोरा में मातम का माहौल

गोवा क्लब में आग

उत्तरी गोवा के अरपोरा स्थित एक मशहूर नाइटलाइफ़ वेन्यू में शनिवार देर रात जो हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। गोवा क्लब में आग लगने की इस भीषण घटना में कम से कम 25 लोगों की जान चली गई है, जो तटीय राज्य में हाल के वर्षों में देखी गई सबसे घातक दुर्घटनाओं में से एक है। यह आग आधी रात के आसपास ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ (Birch by Romeo Lane) नामक क्लब में लगी, जो बागा इलाके में स्थित है और गोवा के सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले बीच में से एक के पास होने की वजह से यहां हमेशा बड़ी भीड़ रहती है।

शनिवार की रात जो पार्टी और जश्न के साथ शुरू हुई थी, वह रविवार की सुबह होते-होते मातम में बदल गई। पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, यह शक है कि आग परिसर के अंदर एक सिलेंडर विस्फोट (Cylinder Blast) से लगी। माना जा रहा है कि अचानक हुए इस विस्फोट के कारण अंदर मौजूद लोगों को भागने का बहुत कम समय मिला। मरने वालों में 4 पर्यटक और 14 स्टाफ मेंबर शामिल हैं, जबकि 7 पीड़ितों की पहचान अभी कन्फर्म नहीं हुई है।

सिलेंडर ब्लास्ट और अफरा-तफरी, नहीं मिला संभलने का मौका

पुलिस महानिदेशक आलोक कुमार ने पुष्टि की है कि आग लगने का कारण सिलेंडर ब्लास्ट ही था। यह नाइट क्लब पिछले साल ही खुला था और रिपोर्टों से पता चलता है कि यह ज्वलनशील पदार्थों से बना था, जिसने आग को तेजी से फैलने में मदद की। धमाका इतना जोरदार था कि क्लब के अंदर मौजूद लोगों को, जिनमें से कई स्टाफ सदस्य थे, बचने का कोई मौका नहीं मिला।

चश्मदीदों ने बताया कि उन्होंने एक जोरदार धमाका सुना और उसके बाद लपटें उठने लगीं। गोवा क्लब में आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोग क्लब के बेसमेंट में फंस गए और दम घुटने से उनकी मौत हो गई। मरने वालों में ज्यादातर क्लब के किचन वर्कर थे, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं। सीएम प्रमोद सावंत ने बताया कि 23 मौतों में से तीन लोगों की मौत जलने से हुई, जबकि बाकी लोगों की जान धुएं में दम घुटने से गई।

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रात भर चला रेस्क्यू ऑपरेशन, सुबह तक मलबे से निकलती रही लाशें

आग की सूचना मिलते ही कई स्टेशनों से फायर टेंडर तुरंत तैनात किए गए। फायरफाइटर्स रविवार तड़के तक आग से जूझते रहे और लपटों को काबू करने की कोशिश करते रहे। बचाव दल सुबह तक अपने प्रयास जारी रखे, बचे हुए लोगों की तलाश में मलबे को छानते रहे और बचे हुए हॉटस्पॉट को कंट्रोल करने की कोशिश करते रहे। अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि मरने वालों में काफी लोग क्लब में काम करने वाले कर्मचारी थे।

आग लगने की खबर मिलने के तुरंत बाद, पुलिस महानिदेशक और उत्तरी गोवा जिले की टीमों समेत सीनियर अधिकारी बचाव और राहत काम में तालमेल बिठाने के लिए मौके पर पहुंचे। सभी शवों को बम्बोलिम के गोवा मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। घायलों को इलाज के लिए पास के हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां छह लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है।

चश्मदीदों ने बयां किया खौफनाक मंजर

इस हादसे के चश्मदीदों की बातें रूह कंपा देने वाली हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “मैंने आज सुबह न्यूज़ देखी और यहां भागा। कल रात, हमने बस एक बहुत तेज़ सायरन सुना लेकिन हमें पता ही नहीं चला कि क्या हुआ है। हमें लगा कि सड़क पर कुछ हुआ है। सुबह हमें पता चला कि इतनी बड़ी ट्रेजेडी हो गई है।”

पास के ही एक होटल में ठहरे एक पर्यटक ने बताया, “हम अभी अपने होटल पहुंचे ही थे कि हमने लाल रंग की आग निकलती देखी। जब हम चेक करने गए, तो पुलिस पहले से ही वहां सिचुएशन संभाल रही थी।” पास के एक रेस्टोरेंट के सुरक्षा गार्ड ने भी पुष्टि की कि उन्होंने एक जोरदार धमाका सुना था और बाद में पता चला कि आग सिलेंडर ब्लास्ट के बाद लगी थी।

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पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू ने जताया गहरा शोक, मदद का ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इस घटना पर गहरा दुख जताया और पीड़ितों के लिए मदद का ऐलान किया। पीएमओ ने एक बयान में कहा, “गोवा क्लब में आग के हादसे में मारे गए हर व्यक्ति के परिवार को पीएमएनआरएफ (PMNRF) से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।”

पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “गोवा के अरपोरा में आग लगने की घटना बहुत दुखद है। मेरी संवेदनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। घायल लोग जल्द से जल्द ठीक हो जाएं। गोवा के सीएम डॉ. प्रमोद सावंत जी से स्थिति के बारे में बात की। राज्य सरकार प्रभावित लोगों को हर संभव मदद दे रही है।” राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस घटना को दिल दहला देने वाला बताया और परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

सीएम प्रमोद सावंत का कड़ा रुख, उच्च स्तरीय जांच के आदेश

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने घटनास्थल का दौरा किया और इसे राज्य के लिए “बहुत दर्दनाक दिन” बताया। उन्होंने तत्काल प्रभाव से घटना की जांच के आदेश दिए हैं। सावंत ने कहा, “जांच में आग लगने के सही कारण और यह पता लगाया जाएगा कि क्या फायर सेफ्टी नियमों और बिल्डिंग नियमों का पालन किया गया था। जो भी जिम्मेदार पाए जाएंगे, उन पर कानून के तहत सबसे सख्त कार्रवाई की जाएगी – किसी भी लापरवाही से सख्ती से निपटा जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी जो अवैध रूप से ऐसी चीजें चलाते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि पीड़ितों के परिवारों को हर संभव मदद दी जा रही है। यह घटना तटीय राज्य में पीक टूरिस्ट सीजन के दौरान हुई है, जिससे सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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फायर सेफ्टी नियमों की धज्जियां और लापरवाही

शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि नाइट क्लब ने फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं किया था। गोवा क्लब में आग लगने की इस घटना ने गोवा के हॉस्पिटैलिटी और नाइटलाइफ़ सेक्टर में नियमों की अनदेखी को उजागर कर दिया है। अधिकारियों से उम्मीद है कि वे जांच करेंगे कि क्लब में सही सेफ्टी सिस्टम थे या नहीं और क्या इमरजेंसी एग्जिट और प्रोटोकॉल ज़रूरी स्टैंडर्ड के हिसाब से थे।

बताया जा रहा है कि क्लब में बाहर निकलने के रास्ते पर्याप्त नहीं थे, जिसकी वजह से लोग बेसमेंट में फंस गए। अगर सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो शायद इतनी बड़ी संख्या में जानें नहीं जातीं।

पहचान के लिए भटकते परिजन और अस्पताल में कोहराम

जैसे ही आग की खबर फैली, अस्पतालों और मोर्चरी के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। रिश्तेदार अपने अपनों की खबर पाने के लिए बेताब थे। चूंकि 7 शवों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, इसलिए कई परिवारों का दर्द और बढ़ गया है। मरने वालों में ज्यादातर युवा थे जो रोजगार के लिए वहां काम कर रहे थे।

यह हादसा पूरे गोवा के लिए एक काला दिन साबित हुआ है। प्रशासन अब मृतकों की पहचान और उनके शवों को परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। इस त्रासदी ने यह साफ कर दिया है कि पर्यटन और नाइटलाइफ़ के नाम पर सुरक्षा के साथ किया जा रहा खिलवाड़ कितना घातक हो सकता है।

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