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 “जावेद अख्तर आसिफ विवाद” राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को लताड़ा,

जावेद अख्तर आसिफ जरदारी विवाद

जावेद अख्तर आसिफ विवाद पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा देश के हिंदू अल्पसंख्यकों को लेकर दी गई टिप्पणी पर भारत में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। प्रसिद्ध भारतीय गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने जरदारी के इस बयान पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “संवेदनहीन” करार दिया है।

जरदारी ने अपने संबोधन में दावा किया था कि पाकिस्तान के मुसलमान देश में रह रहे हिंदुओं को “बर्दाश्त” करते हैं और पाकिस्तानी हिंदू भारत की तुलना में पाकिस्तान में रहना ज्यादा पसंद करते हैं।

जावेद अख्तर का पलटवार और तंज

जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया पर जरदारी की क्लास लगाते हुए लिखा कि वे हमेशा से अपने आसपास की जमीनी हकीकत और मानवीय संवेदनाओं के प्रति बेपरवाह रहे हैं।

‘मिस्टर 10 परसेंट’ का जिक्र: अख्तर ने तंज कसते हुए कहा कि जरदारी को राजनीतिक पहचान सिर्फ अपनी दिवंगत पत्नी और पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के नाम से मिली। उन्होंने जरदारी के पुराने चर्चित उपनाम “मिस्टर टेन परसेंट” का भी जिक्र किया।

समानता बनाम सहिष्णुता: जावेद अख्तर समेत कई विचारकों का मानना है कि किसी देश के राष्ट्रपति द्वारा अपने ही नागरिकों के लिए ‘बर्दाश्त’ (Tolerate) शब्द का इस्तेमाल करना उनकी संकीर्ण मानसिकता को उजागर करता है।

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क्या था पाक राष्ट्रपति का विवादित बयान?

14 अगस्त को इस्लामाबाद स्थित ‘यादगार-ए-फतह’ पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए जरदारी ने कहा था:

“हम मुसलमान हैं, वे (हिंदू) नहीं हैं। लेकिन हमारी सोच ऐसी है कि हम अपनी 3-4% हिंदू आबादी को बर्दाश्त करते हैं। वे यहां पूरी तरह स्वतंत्र और सुरक्षित हैं।”

इसके साथ ही जरदारी ने ‘अखंड भारत’ का जिक्र करते हुए भारतीय नीतियों पर भी सवाल खड़े करने की कोशिश की थी।

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आंकड़ों की बाजीगरी: जरदारी का दावा vs पाकिस्तान की जनगणना

जरदारी ने पाकिस्तान में हिंदू आबादी 3 से 4 प्रतिशत होने का दावा किया, लेकिन पाकिस्तान के अपने सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़े उनके इस दावे को खारिज करते हैं:

2023 की जनगणना: हालिया आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान में कुल हिंदू आबादी लगभग 52.1 लाख (5.2 मिलियन) है, जो देश की कुल जनसंख्या का केवल 2.17% है।

उत्पीड़न और पलायन: मानवाधिकार संगठनों (HRCP और USCIRF) की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रांतों में हिंदू व ईसाई अल्पसंख्यकों की नाबालिग लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और ईशनिंदा (Blasphemy) कानूनों का दुरुपयोग एक गंभीर और अनसुलझी समस्या बना हुआ है।

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भारत में कानूनी और कूटनीतिक विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

जरदारी के इस बयान की भारत में व्यापक निंदा हुई है:

कानूनी विशेषज्ञों का तर्क: केरल हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था में अल्पसंख्यकों को ‘बर्दाश्त’ नहीं किया जाता, बल्कि उन्हें ‘समान अधिकार’ दिए जाते हैं।

इतिहास की गलत व्याख्या: ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के विशेषज्ञों ने कहा कि आजादी के इतने दशकों बाद भी पाकिस्तान के नेता अपनी आंतरिक नाकामियों को छिपाने के लिए भारत और बंटवारे के आख्यान का सहारा ले रहे हैं ।  सोशल मीडिया पर तीखे बयानों और सार्वजनिक बहसों के बीच गरमाया जावेद अख्तर आसिफ विवाद सोशल मीडिया पर तीखे बयानों और सार्वजनिक बहसों के बीच गरमाया जावेद अख्तर आसिफ जरदारी विवाद

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