“सोनम वांगचुक CJP बयान” CJP और राहुल गांधी पर सोनम वांगचुक खुलासा;
मशहूर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने छात्र आंदोलनों और युवा नेताओं की राजनीतिक भूमिका को लेकर एक बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। ‘द प्रखर गुप्ता एक्सपीरियंस’ पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापकों—अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर अपने विचार साझा किए।
इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी भूख हड़ताल (अनशन) के दौरान कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की संभावित भूमिका को लेकर भी बड़ा खुलासा किया।
“CJP के नेता संत नहीं, महत्वाकांक्षा होना गलत नहीं”
जंतर-मंतर पर लगभग दो महीने तक चले आंदोलन के अपने अनुभवों को साझा करते हुए 59 वर्षीय सोनम वांगचुक ने कहा कि CJP के संस्थापकों के साथ काम करते हुए उन्हें यह समझ आया कि इन युवाओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं।
आकलन और समझ: वांगचुक ने स्पष्ट किया, “वे कोई ऐसे संत नहीं हैं जो समाज सेवा से कुछ हासिल नहीं करना चाहते। निश्चित रूप से उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं और मुझे लगता है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। देश को नए, सक्षम और परिपक्व युवा नेताओं की जरूरत है।”
अतीत के राजनीतिक जुड़ाव: जब वांगचुक से पूछा गया कि आंदोलन से जुड़े कुछ युवा पहले आम आदमी पार्टी या अन्य दलों से जुड़े थे, तो उन्होंने कहा कि अतीत में किसी राजनीतिक पार्टी के साथ काम करने में कोई बुराई नहीं है। यह अनुभव उन्हें और अधिक परिपक्व नेता बनने में मदद करेगा।
भ्रष्टाचार के आरोपों को किया खारिज: उन्होंने कहा कि उनके आकलन के अनुसार, CJP से जुड़े युवा नेता भ्रष्ट नहीं हैं और न ही वे किसी बाहरी ताकत के इशारे पर काम कर रहे हैं। उनके डिजिटल डेटा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उनके 94 प्रतिशत फॉलोअर्स भारत से हैं, जो दर्शाता है कि यह आम भारतीय युवाओं की स्वाभाविक आवाज है।
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“आंदोलन के मंच को राजनीति से दूर रखें”
सोनम वांगचुक ने व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा और सामाजिक आंदोलन के मंच के बीच अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने CJP नेताओं को आंदोलन के दौरान स्पष्ट हिदायत दी थी।
निष्पक्ष दबाव समूह की भूमिका: वांगचुक ने कहा, “मैंने उनसे कहा कि आपमें से किसी की भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा हो सकती है, लेकिन इस मंच की पवित्रता और गरिमा बनाए रखें। इसे किसी राजनीतिक दल का एजेंडा आगे बढ़ाने का जरिया न बनाएं। जब यह मंच एक निष्पक्ष, गैर-राजनीतिक दबाव समूह (Pressure Group) बना रहेगा, तभी जनता का इस पर भरोसा रहेगा और आप बड़ा बदलाव ला पाएंगे।”
छात्र आंदोलन की गरिमा: उन्होंने कहा कि आम जनता और छात्र इस प्रदर्शन को बीजेपी, कांग्रेस या आम आदमी पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं, बल्कि एक निष्पक्ष छात्र आंदोलन के रूप में देख रहे थे। वांगचुक ने संतोष जताया कि उनके साथियों ने उस मंच को राजनीतिक रंग से दूर रखा।
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अनशन तोड़ने के लिए राहुल गांधी से संपर्क का सच
पॉडकास्ट में सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल के 15वें-16वें दिन के उस दौर का जिक्र किया जब आंदोलन को समाप्त करने के लिए ‘एग्जिट स्ट्रैटेजी’ (Exit Strategy) बनाई जा रही थी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत राहुल गांधी का नाम सामने आया था।
क्या थी योजना? वांगचुक के अनुसार, योजना यह बनाई गई थी कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ चल रहे इस मुद्दे को संसद के भीतर ले जाया जाए। रणनीति के तहत विपक्षी सांसदों के साथ विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जंतर-मंतर पर आकर या संसद परिसर में अनशन तुड़वाने का प्रस्ताव दिया जाना था।
सबसे बड़ा सम्मान देने का प्रयास: वांगचुक ने कहा, “विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी से जूस या सूप लेकर अनशन तुड़वाना एक बड़ा सम्मान था। इससे इस मुद्दे को संसद के पटल पर औपचारिक रूप से सौंपा जा सकता था।”
राहुल गांधी से नहीं मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया: हालांकि, वांगचुक ने खुलासा किया कि जब उन्होंने इस योजना के संबंध में राहुल गांधी और उनके कार्यालय से संपर्क करने की कोशिश की, तो वहां से कोई सकारात्मक या उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
कांग्रेस नेताओं का दावा: वांगचुक ने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें अनौपचारिक रूप से बताया कि उन्हें इस प्रदर्शन में शामिल न होने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी खुद आते, तो यह मुद्दा और भी बड़ा रूप ले सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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सोनम वांगचुक के इस साक्षात्कार से यह साफ होता है कि देश में उठ रहे युवा आंदोलनों को वे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक स्वस्थ संकेत मानते हैं। हालांकि, उनका स्पष्ट मानना है कि युवाओं के लिए राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं रखना स्वाभाविक और स्वागत योग्य है, लेकिन सामाजिक व छात्र आंदोलनों के मंचों को किसी राजनीतिक दल का मोहरा बनने से बचाना बेहद जरूरी है। कानूनी पक्षों, छठी अनुसूची की मांग और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बीच जानें सोनम वांगचुक CJP बयान की पूरी इनसाइड स्टोरी सोनम वांगचुक CJP बयान, लद्दाख आंदोलन के संवैधानिक पहलुओं और न्यायपालिका के रुख पर सोनम वांगचुक CJP बयान का पूरा विश्लेषण
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