Loading Now

वाराणसी टेंट सिटी अवैध: NGT ने लगाया भारी जुर्माना और सुनाया बड़ा फैसला

वाराणसी टेंट सिटी अवैध

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एक ऐतिहासिक फैसले में वाराणसी टेंट सिटी अवैध करार दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक माने जाने वाले इस लग्जरी टेंट सिटी पर पर्यावरण नियमों की अनदेखी का आरोप सही पाया गया है।

ग्रीन कोर्ट ने न केवल इसे नियमों के खिलाफ माना, बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के एवज में उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 17.12 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी ठोक दिया है।

पर्यावरण नियमों और 2016 के आदेशों की धज्जियां उड़ीं

ट्रिब्यूनल ने अपनी सुनवाई में स्पष्ट रूप से कहा कि प्रवेग टेंट और नीरान टेंट सिटी को स्थापित करने में रिवर गंगा (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) अथॉरिटी के 2016 के आदेशों का सीधे तौर पर उल्लंघन किया गया। यह टेंट सिटी पूरी तरह से पर्यावरण मानदंडों को ताक पर रखकर संचालित की जा रही थी।

कोर्ट ने कड़े शब्दों में निर्देश दिया है कि गंगा नदी या उसकी सहायक नदियों के किनारों पर भविष्य में किसी भी प्रकार की टेंट सिटी स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इसे भी पढ़े :-वाराणसी ग्रीन एनर्जी: भारत का पहला हाइड्रोजन वेसल लॉन्च

सीवेज और प्रदूषण के गंभीर आरोपों पर कोर्ट की मुहर

राज्य सरकार द्वारा साल 2023 की शुरुआत में टेंडर जारी होने के बाद इन टेंट सिटीज का निर्माण हुआ था। इसके तुरंत बाद याचिकाकर्ता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दलील दी गई कि वाराणसी टेंट सिटी अवैध तरीके से संचालित हो रही है और इससे निकलने वाला सीवेज सीधे गंगा नदी में बहाया जा रहा है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि इससे स्थानीय वनस्पतियों और जलीय जीवों को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है, जो गंगा की पारिस्थितिकी के लिए बड़ा खतरा है।

कछुआ वन्यजीव अभयारण्य और कानूनी पेच

इस पूरे मामले में एक गंभीर पक्ष कछुआ वन्यजीव अभयारण्य का भी रहा। दावा किया गया कि यह टेंट सिटी उस स्थान पर बनाई गई जिसे मार्च 2020 में अवैध रूप से डी-नोटिफाई किया गया था।

हालांकि, NGT ने कछुआ अभयारण्य से जुड़े इस मुद्दे पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है, क्योंकि यह मामला अभी देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में लंबित है। ट्रिब्यूनल ने मुख्य रूप से पर्यावरण मंजूरी और जल-वायु अधिनियम के उल्लंघन पर अपना ध्यान केंद्रित रखा।

इसे भी पढ़े :-प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी से 4 नई वंदे भारत ट्रेनें राष्ट्र को समर्पित कीं

सात सदस्यीय संयुक्त समिति की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

उल्लंघनों की गंभीरता को देखते हुए NGT ने 17 मार्च, 2023 को एक उच्च स्तरीय सात सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया था। इस कमेटी में NMCG, MoEF&CC, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), उत्तर प्रदेश के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन, सिंचाई विभाग और वाराणसी के जिलाधिकारी शामिल थे।

24 मई, 2023 को सौंपी गई इस रिपोर्ट ने पुष्टि की कि टेंट सिटी बिना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) की सहमति के चल रही थी, जो सीधे तौर पर जल और वायु अधिनियमों का उल्लंघन था।

भूमि आवंटन में हेराफेरी और स्थाई निर्माण के प्रमाण

जांच रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि प्रवेग टेंट सिटी को 20 हेक्टेयर जमीन आवंटित थी, लेकिन उसने अस्सी घाट के पास 11 हेक्टेयर नदी तट पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। वहीं नीरान टेंट सिटी को 11 हेक्टेयर के बजाय 2.5 हेक्टेयर में विकसित पाया गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि नदी के संवेदनशील किनारे पर लाल ईंटों के चैंबरों का स्थाई निर्माण भी किया गया था, जो नियमों के विरुद्ध है। वाराणसी टेंट सिटी अवैध निर्माण की इन कड़ियों ने पर्यावरणविदों की चिंताओं को सच साबित कर दिया।

इसे भी पढ़े :-वाराणसी विमान इमरजेंसी: इंडिगो उड़ान की आपात लैंडिंग

प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन और VDA के साथ करार

गौरतलब है कि जनवरी 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस लग्जरी टेंट सिटी का उद्घाटन किया था, जिसे काशी आने वाले भक्तों के लिए एक नया आकर्षण बताया गया था। वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) ने चेत सिंह घाट के सामने इस प्रोजेक्ट के लिए निजी संस्थाओं के साथ करार किया था।

हालांकि, NGT के चेयरपर्सन प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की बेंच ने अब यह साफ कर दिया है कि वाराणसी टेंट सिटी अवैध थी और इसे पर्यावरण नियमों को कुचलकर चलाया गया था।

जुर्माना वसूली के लिए तीन महीने का अल्टीमेटम

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) ने पहले ही जनवरी से मई तक के संचालन के लिए लगभग 17 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया था, जिसे अब तक वसूला नहीं गया है। ट्रिब्यूनल ने अब यूपी सरकार और प्रदूषण बोर्ड को निर्देश दिया है कि वे तीन महीने के भीतर इस जुर्माने की वसूली सुनिश्चित करें।

VDA के अनुसार, यह टेंट सिटी 31 मई 2023 तक संचालित हुई थी और कानूनी विवादों को देखते हुए अगले साल इसे दोबारा स्थापित नहीं करने का फैसला लिया गया था।

इसे भी पढ़े :-वाराणसी रोपवे भ्रष्टाचार: 807 करोड़ खर्च पर जाँच की माँग

Spread the love

Post Comment

You May Have Missed