‘मराठी गौरव की लड़ाई जारी रहेगी’ राज ठाकरे ने चुनाव हार के बाद तोड़ी चुप्पी
बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के ऐतिहासिक चुनाव परिणामों में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को लगे बड़े झटके के बाद पार्टी प्रमुख राज ठाकरे ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। राज ठाकरे ने हार को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि मराठी गौरव की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि यह उनके अस्तित्व का आधार है। उन्होंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को एक चुनौती भरा संदेश भेजा, जिसमें उन्होंने निराशाजनक नतीजों के बावजूद मराठी पहचान के लिए संघर्ष जारी रखने का वादा किया। राज ठाकरे ने गरजते हुए कहा कि चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन हमारी हर सांस मराठी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे निराशा छोड़ें और पार्टी को फिर से शून्य से खड़ा करने के लिए “काम पर वापस लग जाएं।”
असीम वित्तीय शक्ति और सत्ता बनाम शिवशक्ति का मुकाबला
राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट में इस चुनाव को “असीम वित्तीय शक्ति और सत्ता की ताकत बनाम शिवशक्ति” के बीच का असमान मुकाबला बताया। उन्होंने नवनिर्वाचित पार्षदों को बधाई देते हुए कहा कि यह चुनाव आसान नहीं था, क्योंकि इसमें धनबल का जबरदस्त प्रयोग किया गया। उन्होंने कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने शानदार लड़ाई लड़ी। ठाकरे ने अफसोस जताया कि MNS को इस बार अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि इसका मतलब यह नहीं है कि वे हिम्मत हारने वाले हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सत्ताधारी लोगों ने मराठी मानुष के खिलाफ कुछ भी गलत किया, तो उनके पार्षद उन्हें घुटनों पर ला देंगे।
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25 साल बाद ठाकरे परिवार के हाथ से निकला मुंबई का कंट्रोल
इस बार के BMC चुनावों ने मुंबई की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत की है, जहाँ पिछले 25 वर्षों से चला आ रहा ठाकरे परिवार का दबदबा खत्म हो गया है। भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने दुनिया की सबसे अमीर नगर निकाय पर कब्जा जमा लिया है। भाजपा ने 89 वार्डों में जीत हासिल की, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 29 सीटें जीतीं, जिससे गठबंधन ने 114 के बहुमत के आंकड़े को पार करते हुए 118 सीटें हासिल कीं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) 65 सीटों पर सिमट गई, जबकि राज ठाकरे की MNS को मात्र 6 सीटों से संतोष करना पड़ा। यह हार इसलिए भी बड़ी है क्योंकि AIMIM जैसी पार्टी ने 8 सीटें जीतकर MNS को पीछे छोड़ दिया है।
मराठी मानुष की पहचान और अस्तित्व का संघर्ष
अपनी भावनात्मक पोस्ट में राज ठाकरे ने दोहराया कि मराठी गौरव की लड़ाई केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि मराठी भाषा और पहचान के लिए है। उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई मराठी लोगों के लिए, मराठी भाषा के लिए और एक समृद्ध महाराष्ट्र के लिए है। यह लड़ाई ही हमारा अस्तित्व है।” ठाकरे ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी ताकतें और उनकी शरण में गए लोग मराठी लोगों को परेशान करने और उनका शोषण करने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे, इसलिए MNS को उनके साथ मजबूती से खड़ा होना होगा। उन्होंने पार्टी के भीतर आत्ममंथन की बात करते हुए कहा कि जो कुछ भी गलत हुआ या अधूरा रह गया, उसका विश्लेषण कर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
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उद्धव और राज का ‘मिलन’ भी नहीं दिखा सका करिश्मा
बीते साल सत्ताधारी महायुति को चुनौती देने के लिए ठाकरे भाई 20 साल बाद एक साथ आए थे, लेकिन चुनाव परिणामों ने इस रणनीतिक मिलन को बड़ा झटका दिया है। न केवल मुंबई, बल्कि महाराष्ट्र की 29 में से 25 नगर निकायों में महायुति ने जीत का परचम लहराया है। उद्धव ठाकरे की पार्टी ने भी “सामना” के जरिए कड़ा रुख अपनाया और सवाल पूछा कि अब मुंबई में मराठी मानुष के हितों की रक्षा कौन करेगा? UBT शिवसेना ने भी कसम खाई है कि यह मराठी गौरव की लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक मराठी व्यक्ति को वह सम्मान नहीं मिल जाता जिसका वह हकदार है। सामना में चुनावी अनियमितताओं और EVM में हेरफेर जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
बीजेपी ने ‘रस मलाई’ के डिब्बों से मनाया जीत का जश्न
चुनाव के दौरान राज ठाकरे द्वारा अन्नामलाई को “रस मलाई” कहने और “हटाओ लुंगी, बजाओ पुंगी” जैसे नारों पर छिड़े विवाद का बीजेपी ने चुनावी नतीजे आने के बाद अनोखे अंदाज में जवाब दिया। भाजपा नेता तेजिंदर बग्गा ने उद्धव, राज और आदित्य ठाकरे को रस मलाई के डिब्बे भेजकर इस फैसले को “मीठा जवाब” बताया। देवेंद्र फडणवीस ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए इसे “जन-समर्थक सुशासन” की जीत बताया और दावा किया कि महायुति अब 25 नगर निगमों में अपने मेयर बनाएगी। पीएम मोदी ने भी जीत की सराहना करते हुए इसे विकास के विजन की जीत करार दिया, जिसने मुंबई को एक अंतर्राष्ट्रीय शहर बनाने की ओर कदम बढ़ाया है।
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वोटों का गणित और राजनीतिक दलों का प्रदर्शन
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भाजपा 21.58% वोट शेयर के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसे कुल 11,79,273 वोट मिले। शिवसेना (शिंदे गुट) को 5% वोट मिले। दूसरी ओर, शिवसेना (UBT) को 13.13% और MNS को मात्र 1.37% वोट प्राप्त हुए। कांग्रेस ने 24 सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, जबकि वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के साथ उसका गठबंधन उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सका। एनसीपी, समाजवादी पार्टी और अन्य छोटे दलों का प्रदर्शन भी सीमित रहा। 54.64 लाख से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिसमें 11 हजार से अधिक लोगों ने नोटा (NOTA) का विकल्प चुना।
भविष्य की चुनौती: संगठन का पुनर्गठन और संकल्प
राज ठाकरे ने अपनी पोस्ट के अंत में कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि “आइए अपनी पार्टी और संगठन को फिर से बनाएं!” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संघर्ष लंबे समय तक चलते हैं और मराठी गौरव की लड़ाई में हार मान लेना उनके स्वभाव में नहीं है। जहां महायुति ने कोस्टल रोड और मेट्रो एक्वा लाइन जैसी विकास परियोजनाओं के दम पर जीत हासिल की है, वहीं राज ठाकरे अब भी अपनी क्षेत्रीय पहचान की राजनीति पर अडिग हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन मराठी अस्मिता का मुद्दा हमेशा जीवित रहेगा। अब देखना यह है कि क्या राज ठाकरे अपनी पार्टी को फिर से खड़ा कर 2029 की चुनौतियों के लिए तैयार कर पाएंगे।
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