“मेटा इंस्टाग्राम विवाद भारत” गलती स्वीकार की, अब सीधे I4C को रिपोर्टिंग
मेटा इंस्टाग्राम विवाद भारत सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मेटा (Meta) इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों और कंटेंट को लेकर चौतरफा घिर गई है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के कड़े रुख के बाद मेटा ने अपनी प्रशासनिक व तकनीकी कमियों को स्वीकार कर लिया है। कंपनी अब ऐसे सभी गंभीर मामलों की सीधी जानकारी भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमत हो गई है।
बुधवार को मेटा इंडिया के प्रबंध निदेशक अरुण श्रीनिवास सहित शीर्ष अधिकारियों को लगातार दूसरी बार आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार ने स्पष्ट किया है कि मेटा को अब केवल “मध्यस्थ (Intermediaries)” नहीं माना जा सकता, बल्कि वह एक “सेवा प्रदाता (Service Provider)” है, क्योंकि उसके एल्गोरिदम यह तय करते हैं कि कौन-सा कंटेंट उपयोगकर्ताओं तक पहुंचेगा।
अब US नहीं, भारत के I4C पोर्टल पर होगी सीधी रिपोर्टिंग
अब तक मेटा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों को मुख्य रूप से अमेरिकी संस्था ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (NCMEC)’ को प्रेषित करता था। लेकिन भारत सरकार के दबाव के बाद कंपनी ने अपनी प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है।
सीधी रिपोर्टिंग पाइपलाइन: मेटा अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत संचालित ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C)’ के पोर्टल पर सीधे मामलों की रिपोर्ट दर्ज कराएगा।
भारत में पहली बार: मेटा पहली ऐसी अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनी बन गई है जिसने भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ इस प्रकार का सीधा रिपोर्टिंग तंत्र स्थापित किया है।
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BBC Eye की खोजी रिपोर्ट से हुआ था खुलासा
यह पूरा विवाद बीबीसी आई (BBC Eye) की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद शुरू हुआ।
टेलीग्राम लिंक और विज्ञापन: रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों के जरिए उपयोगकर्ताओं को ऐसे टेलीग्राम चैनलों तक पहुंचाया जा रहा था, जहां बाल यौन शोषण सामग्री (CSEAM) मौजूद थी।
ऐल्गोरिदमिक रिकमेंडेशन: रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि प्लेटफॉर्म का रिकमेंडेशन सिस्टम इस प्रकार के आपत्तिजनक कंटेंट की विजिबिलिटी को बढ़ावा दे रहा था।
प्रशासनिक कार्रवाई: इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए NCPCR ने 3 जुलाई को मेटा को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और बाद में औपचारिक जांच शुरू की।
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‘लीगल इम्युनिटी’ पर सरकार का कड़ा संदेश
सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि जब कोई प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम के माध्यम से कंटेंट का प्रचार-प्रसार करता है, तो वह कानून के तहत मिलने वाली कानूनी छूट (Legal Immunity या Safe Harbour Protection) का दावा नहीं कर सकता। हालांकि, कानूनी व्याख्या का अंतिम अधिकार न्यायपालिका के पास है, लेकिन सरकार का रुख बेहद सख्त है।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और दिल्ली पुलिस भी इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या मेटा ने ‘पॉक्सो एक्ट’ (POCSO Act) के तहत अनिवार्य रिपोर्टिंग के प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया है या नहीं। सरकार ने दोहराया है कि ऑनलाइन बच्चों की सुरक्षा एक बुनियादी सिद्धांत है और इस पर किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हाल ही में आईटी नियमों के कड़े अनुपालन और डेटा प्राइवेसी से जुड़ी चिंताओं के कारण बढ़ा मेटा इंस्टाग्राम विवाद भारत में डिजिटल नीतियों की समीक्षा और सरकारी दिशानिर्देशों पर नई बहस छेड़ चुका है।
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