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“यूएस रशियन ऑयल सैंक्शंस” बिल पास: भारत पर 100% तक टैरिफ खतरा,

यूएस रशियन ऑयल सैंक्शंस

यूएस रशियन ऑयल सैंक्शंस अमेरिकी कांग्रेस ने रूसी ऊर्जा उत्पादों के बड़े खरीदारों पर नकेल कसने के लिए एक कड़ा प्रतिबंध विधेयक पास कर दिया है। ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ नाम का यह बिल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक का दंडात्मक शुल्क (Tariff) लगाने का अधिकार देता है।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में यह विधेयक 262-159 के भारी बहुमत से पारित हुआ, जिसे सीनेट पहले ही अपनी मंजूरी दे चुकी है। अब यह कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है।

इस कानून का सीधा प्रभाव भारत और चीन जैसे उन बड़े देशों पर पड़ सकता है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करते हैं। हालांकि, इस विधेयक में राष्ट्रपति को उन देशों को छूट देने (Waiver) का अधिकार भी दिया गया है जो रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता कम करने के प्रयास कर रहे हैं।

भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार वार्ता पर असर

यह नया घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच पिछले एक साल से अधिक समय से द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर बातचीत चल रही है।

G20 बैठक में बातचीत संभव: भारत और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच 30 सितंबर से 1 अक्टूबर के दौरान विस्कॉन्सिन में होने वाली G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान इस मुद्दे पर द्विपक्षीय चर्चा होने की संभावना है।

भारत का स्पष्ट रुख: भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कई बार स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी व्यापार समझौते पर तभी आगे बढ़ेगा जब भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में स्पष्ट टैरिफ लाभ मिलेगा।

अतिरिक्त शुल्क की आशंका: वर्तमान में भारतीय सामानों पर अमेरिका के ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत पहले से ही 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लागू है। यदि नए कानून के तहत दंडात्मक टैरिफ लगाया जाता है, तो भारतीय निर्यात पर करों का बोझ अत्यधिक बढ़ जाएगा।

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    रूसी कच्चे तेल का गणित और विशेषज्ञों की राय

    वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के दौरान भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत रही है। भारत लगातार यह तर्क देता रहा है कि अपनी 1.4 अरब की आबादी को किफायती दर पर ऊर्जा उपलब्ध कराना उसका राष्ट्रीय हित है।

    ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, यह विधेयक भारत को एकतरफा शर्तों पर व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर करने की एक रणनीतिक कोशिश है। भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को स्थिर रखने में मदद की है।

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    उन्होंने जोर देकर कहा कि दंडात्मक शुल्क लगाने से न केवल भारतीय निर्यातकों बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी नुकसान होगा और इससे वैश्विक व्यापार आपूर्ति श्रृंखला बाधित होगी।

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    फिलहाल, इस कानून के पारित होने के बाद सभी की निगाहें व्हाइट हाउस के अगले कदम और आगामी G20 व्यापार बैठक पर टिकी हैं। पश्चिमी देशों द्वारा लागू किए गए यूएस रशियन ऑयल सैंक्शंस का असर न केवल कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों पर पड़ रहा है, बल्कि इससे विकासशील देशों की आयात नीतियों पर भी असर देखने को मिल रहा है।

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