“अयोध्या राम मंदिर निर्माण”वित्तीय पारदर्शिता पर चंपत राय का बड़ा खुलासा,
श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा अपने तीन दिवसीय दौरे पर अयोध्या पहुंचे हैं। अयोध्या आगमन के तुरंत बाद उन्होंने राम जन्मभूमि परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों का बारीकी से निरीक्षण और जायजा लिया। उनका यह दौरा मंदिर निर्माण समिति की महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले हो रहा है।
परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि ‘पूर्ण स्मृति स्तंभ’ का अधिकांश कार्य पूरा कर लिया गया है और अब केवल शीर्ष पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का आधिकारिक लोगो (Logo) लगाना शेष है। उन्होंने आश्वस्त किया कि मंदिर परिसर का शेष निर्माण कार्य निर्धारित योजना और समयसीमा के अनुसार सुचारू रूप से आगे बढ़ रहा है।
चंपत राय का 9 पन्नों का खुला पत्र: मंदिर प्रशासन पर बड़ा खुलासा
दूसरी ओर, मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित गड़बड़ियों और चोरी के आरोपों के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने एक विस्तृत 9 पन्नों का खुला पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के कामकाज, प्रशासनिक ढांचे, विशेषज्ञों की भूमिका, श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध मुफ्त सुविधाओं और वित्तीय पारदर्शिता पर विस्तार से प्रकाश डाला है।
चंपत राय ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि भव्य राम मंदिर के निर्माण से जुड़े सभी महत्वपूर्ण और नीतिगत फैसले नृपेंद्र मिश्रा की अध्यक्षता वाली मंदिर निर्माण समिति के माध्यम से ही लिए गए थे। उन्होंने कहा कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान जब भी कोई तकनीकी या व्यावहारिक चुनौती सामने आई, नृपेंद्र मिश्रा ने तुरंत संबंधित क्षेत्र के शीर्ष विशेषज्ञों को अयोध्या आमंत्रित किया और उनकी सलाह पर समाधान निकाला।
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निर्माण एजेंसियों का चयन और विशेषज्ञों का योगदान
पत्र में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि मंदिर निर्माण का मुख्य श्रेय नृपेंद्र मिश्रा के नेतृत्व को जाता है। महामारी (कोविड-19) के दौर में जून 2020 से शुरू हुआ यह विशाल पाषाण मंदिर निर्माण कार्य जून 2026 तक सफलतापूर्वक संपन्न होकर राष्ट्र व समाज को समर्पित कर दिया गया।
चंपत राय के अनुसार:
प्रमुख निर्माण कंपनी: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के सुझावों को ध्यान में रखते हुए निर्माण की जिम्मेदारी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को सौंपी गई।
प्रोजेक्ट मैनेजमेंट: टाटा कंसल्टेंसी इंजीनियर्स (TCE) को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में शामिल किया गया।
आर्किटेक्ट्स: मुख्य मंदिर के लिए अहमदाबाद के प्रसिद्ध आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा की सेवाएं जारी रखी गईं (जिन्हें 1986 में अशोक सिंघल ने चुना था), जबकि परिसर के अन्य ढांचों के लिए नोएडा की ‘डिज़ाइन एसोसिएट्स’ को चुना गया।
विशेषज्ञों की सेवा: एनबीसीसी (NBCC) के पूर्व चेयरमैन और वरिष्ठ सिविल इंजीनियर अनूप मित्तल समिति के नियमित सदस्य के रूप में तकनीकी सलाह देते रहे। राय ने बताया कि अधिकतर विशेषज्ञों ने बिना किसी मानदेय के केवल ‘सेवा भाव’ से अपना योगदान दिया।
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भक्तों के लिए पूर्णतः निःशुल्क सुविधाएं और ‘सुगम दर्शन’
दान और व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चंपत राय ने श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट द्वारा दी जाने वाली सभी सेवाएं पूरी तरह से मुफ्त हैं।
मुफ्त पासेज: दर्शन पास, आरती पास और प्रसाद के लिए श्रद्धालुओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
विशेष श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन: 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों, दिव्यांगों, गर्भवती महिलाओं और 5 वर्ष से छोटे बच्चों वाली माताओं के लिए ‘सुगम दर्शन पास’ की व्यवस्था है। आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने पर यह पास बिना किसी सिफारिश या बाहरी प्रभाव के सीधे प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा परिसर में मुफ्त व्हीलचेयर की सुविधा भी उपलब्ध है।
पुजारियों की भूमिका: मंदिर के पुजारी केवल धार्मिक अनुष्ठानों, राग-भोग, वेदों के पाठ और विष्णु सहस्रनाम के जाप में लीन रहते हैं। वे दर्शन कराने में कोई हस्तक्षेप नहीं करते और न ही श्रद्धालुओं से किसी प्रकार की दक्षिणा स्वीकार करते हैं।
वित्तीय पारदर्शिता: कैशलेस लेनदेन और कड़ा ऑडिट सिस्टम
वित्तीय प्रबंधन पर लगे आरोपों का खंडन करते हुए चंपत राय ने पत्र में ट्रस्ट की सख्त वित्तीय नीतियों की जानकारी दी:
चेकबुक रहित बैंक खाते: ट्रस्ट के खाते भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) में हैं, लेकिन ट्रस्ट ने जानबूझकर चेकबुक की सुविधा नहीं ली है।
100% डिजिटल लेनदेन: सभी भुगतान केवल प्रत्यक्ष बैंक ट्रांसफर (Net Banking/RTGS/NEFT) के माध्यम से किए जाते हैं। नकद (Cash) में कोई भी व्यावसायिक लेन-देन नहीं होता।
सख्त ऑडिट प्रक्रिया: ट्रस्ट की आंतरिक जांच (Internal Audit) दिल्ली की एक प्रतिष्ठित फर्म द्वारा की जाती है, जिसके बाद प्रसिद्ध फर्म ‘वी. शंकर अय्यर एंड कंपनी’ द्वारा वैधानिक ऑडिट (Statutory Audit) संपन्न किया जाता है।
सरकारी नियमों का पालन: ट्रस्ट जीएसटी, टीडीएस, स्टाम्प ड्यूटी, लेबर सेस, पीएफ और ईएसआई सहित सभी सरकारी करों और वैधानिक शुल्कों का समय पर भुगतान करता है।
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मामले की पृष्ठभूमि और नृपेंद्र मिश्रा की प्रतिक्रिया
यह पत्र ऐसे समय में आया है जब दान प्रबंधन को लेकर लगे आरोपों के बाद प्रशासनिक जांच तेज हुई थी। सूत्रों के अनुसार, विशेष जांच टीम (SIT) की अंतिम रिपोर्ट में ट्रस्ट के अधिकारियों को किसी भी गड़बड़ी में आरोपी नहीं पाया गया है, जबकि कथित चोरी के मामले में आठ बाहरी असामाजिक तत्वों की पहचान की गई है।
दूसरी ओर, जब पत्रकारों ने नृपेंद्र मिश्रा से चंपत राय के इस 9 पन्नों के पत्र और उसमें उल्लिखित कंपनियों व नियुक्तियों के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने अभी तक वह पत्र नहीं देखा है। मिश्रा ने कहा, “मैंने वह पत्र नहीं देखा है; आप लोग बेवजह विवाद खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं।”
अयोध्या में चल रही मंदिर निर्माण समिति की आगामी बैठक और चंपत राय के इस स्पष्टीकरण के बाद राम मंदिर प्रशासन, पारदर्शिता और आगामी योजनाओं पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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