मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में बड़ी कामयाबी: विक्रोली में उतरा 350 टन कटरहेड,
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट विक्रोली भारत की पहली महत्वाकांक्षी मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना ने बुनियादी ढांचा निर्माण के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व मील का पत्थर हासिल कर लिया है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के इंजीनियरों ने मुंबई के पूर्वी उपनगर विक्रोली में सुरंग निर्माण की सबसे बड़ी और आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) के अगले हिस्से यानी 350 टन वजनी ‘कटरहेड’ को सफलतापूर्वक जमीन के नीचे उतार दिया है।
यह घटना केवल एक मशीन के पुर्जे को स्थापित करना भर नहीं है, बल्कि यह भारत के सिविल इंजीनियरिंग इतिहास के उस नए अध्याय की शुरुआत है, जिसके तहत देश में पहली बार समुद्र और नदी के तल को चीरकर हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन दौड़ाने की तैयारी की जा रही है। ₹1.08 लाख करोड़ की लागत वाली इस पूरी परियोजना का यह भूमिगत हिस्सा सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
इंजीनियरिंग का अजूबा: 250 एसयूवी कारों के बराबर भारी है यह कटरहेड
NHSRCL द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रविवार को नीचे उतारा गया यह कटरहेड 13.6 मीटर व्यास (डायमीटर) का है। इस विशालकाय पुर्जे का वजन लगभग 250 मध्यम आकार की पैसेंजर एसयूवी कारों के बराबर है। आकार और वजन में अत्यधिक भारी होने के कारण इसे एक साथ साइट पर लाना असंभव था, इसलिए इसे पांच अलग-अलग खेपों (बिल्डिंग ब्लॉक्स) में विक्रोली शाफ्ट साइट पर पहुंचाया गया।
यहाँ मुख्य इंजीनियरों की देखरेख में लगभग 1,600 किलोग्राम की अत्यधिक सटीक और उच्च-स्तरीय (High-Precision) वेल्डिंग तकनीक का उपयोग करके इसे एक मजबूत कटरहेड के रूप में असेंबल किया गया। यह कटरहेड दरअसल 3,000 टन से भी अधिक भारी मुख्य टीबीएम मशीन के आगे की ढाल (शील्ड) की शुरुआती असेंबली का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण था।
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एक ही सुरंग में अप-डाउन ट्रैक: इस महामशीन की तकनीकी ताकत
भारत में रेलवे या मेट्रो परियोजनाओं के लिए अब तक जितने भी भूमिगत टनलिंग कार्य हुए हैं, उनमें आमतौर पर ‘अप’ और ‘डाउन’ लाइनों के लिए दो अलग-अलग जुड़वां (ट्विन) सुरंगें खोदी जाती हैं। लेकिन इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में इस्तेमाल हो रही टीबीएम देश की अब तक की सबसे बड़ी रेल टनलिंग मशीन है।
इसके 13.6 मीटर चौड़े विशाल व्यास को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसके द्वारा खोदी जाने वाली एक ही अकेली सुरंग के भीतर बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की आने और जाने वाली (अप और डाउन) दोनों पटरियां एक साथ समा सकेंगी।
इस मशीन के कटरहेड यूनिट में 84 कटर डिस्क लगाए गए हैं जो सामने आने वाली सबसे कठोर चट्टानों को भी मक्खन की तरह काटने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा, इसमें 124 स्क्रैपर और 16 बकेट लिप्स लगाए गए हैं, जो सुरंग के मुहाने पर जमा होने वाले मलबे को समेटकर सीधे पाइपलाइन सिस्टम के जरिए बाहर फेंकने का काम करेंगे।
ठाणे क्रीक के नीचे देश की पहली समुद्र के नीचे वाली सुरंग
मुंबई में बनने वाले इस पूरे भूमिगत हिस्से की कुल लंबाई 21 किलोमीटर है, जिसके 16 किलोमीटर के हिस्से को बनाने के लिए ऐसी दो विशालकाय टीबीएम मशीनों को असेंबल किया जा रहा है।
इस अंडरग्राउंड नेटवर्क का सबसे रोमांचक और चुनौतीपूर्ण हिस्सा ठाणे क्रीक (ठाणे खाड़ी) के नीचे बनने वाली 7 किलोमीटर लंबी सुरंग है। यह भारत के इतिहास में पहली बार होगा जब कोई रेल लिंक पूरी तरह से समुद्र के नीचे से गुजरेगा।
वर्तमान में जो टीबीएम विक्रोली में तैयार की गई है, वह विक्रोली शाफ्ट से बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में बन रहे अंडरग्राउंड बुलेट ट्रेन टर्मिनल स्टेशन की तरफ लगभग 6 किलोमीटर की दूरी तक पाताल का सीना चीरेगी। यह सफर बेहद संवेदनशील है क्योंकि मशीन को घनी आबादी वाले शहरी इलाकों, गगनचुंबी इमारतों की नींव और मीठी नदी के ठीक नीचे से होकर गुजरना है।
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम: इमारतों की सुरक्षा के लिए लगाए गए रीयल-टाइम सेंसर
चूंकि सुरंग की खुदाई मुंबई के सबसे व्यस्त और घने शहरी ढांचे के नीचे से होनी है, इसलिए सुरक्षा को लेकर NHSRCL किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठा रहा है। खुदाई के दौरान जमीन की मामूली हलचल या कंपन से आस-पास की इमारतों को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए अत्याधुनिक सुरक्षा और मॉनिटरिंग सिस्टम तैनात किए गए हैं।
सुरंग के मार्ग के ऊपर स्थित इलाकों में ‘सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स’ (SSP), ‘ऑप्टिकल डिस्प्लेसमेंट सेंसर्स’ (ODS), ‘टिल्ट मीटर’ और ‘स्ट्रेन गेज’ लगाए गए हैं जो चौबीसों घंटे जमीन के दबाव और खिंचाव पर नजर रखेंगे।
इसके साथ ही, टनलिंग के दौरान पैदा होने वाले सूक्ष्म कंपनों और भूकंपीय तरंगों को मापने के लिए संवेदनशील ‘सीस्मोग्राफ’ भी लगाए गए हैं। इनका रीयल-टाइम डेटा सीधे कंट्रोल रूम को जाएगा, जिससे किसी भी खतरे की स्थिति में काम को तुरंत नियंत्रित किया जा सकेगा।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर शुरुआत में कई तरह की राजनीतिक और प्रशासनिक अड़चनें सामने आई थीं, लेकिन विक्रोली में इस महामशीन का उतरना यह दर्शाता है कि परियोजना अब पूरी गति से धरातल पर उतर रही है।
जापान की प्रसिद्ध ‘शिंकनसेन’ (Shinkansen) हाई-स्पीड रेल तकनीक पर आधारित यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद न केवल मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय को बेहद कम कर देगा, बल्कि भारतीय तकनीकी कौशल को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देगा।
इस बेहद जटिल अंडरग्राउंड और अंडरवाटर सुरंग का निर्माण भारतीय इंजीनियरों के लिए अग्निपरीक्षा जैसा है, जिसमें सफलता देश के इंफ्रास्ट्रक्चर के भविष्य को बदल देगी। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट विक्रोली: तेजी से बढ़ रहा है बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट विक्रोली का काम
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