NEET UG 2026 री-एग्जाम तारीखों का एलान, पेपर लीक में राजनीति गर्म
NEET UG री-एग्जाम देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट यूजी 2026’ (NEET UG 2026) के रद्द होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। एनटीए ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि रद्द की जा चुकी इस परीक्षा का आयोजन दोबारा (Re-Exam) 21 जून, 2026 को पूरे देश और विदेश के विभिन्न केंद्रों पर पेन-एंड-पेपर मोड में किया जाएगा।
एक तरफ जहां छात्र दोबारा परीक्षा की तैयारियों में जुट गए हैं, वहीं दूसरी तरफ इस परीक्षा को लेकर देश में राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पेपर लीक के बार-बार दोहराए जाने पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की है।
NEET UG 2026 री-एग्जाम शेड्यूल: छात्रों को मिलेंगे 15 मिनट अतिरिक्त
NTA द्वारा जारी नए नोटिफिकेशन के अनुसार, नीट यूजी पुनर्परीक्षा 21 जून, 2026 को दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित की जाएगी। इस बार बोर्ड ने परीक्षार्थियों के मानसिक दबाव को कम करने और पारदर्शी तरीके से पेपर पूरा करने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय देने का फैसला किया है।
जो उम्मीदवार अपने पहले से चुने गए परीक्षा शहर में बदलाव करना चाहते हैं, उनके लिए आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर करेक्शन विंडो 15 मई से खोल दी गई है, जो 21 मई, 2026 तक सक्रिय रहेगी। इस अवधि में जो छात्र शहर नहीं बदलेंगे, उनका पुराना केंद्र ही मान्य रहेगा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि 21 जून को होने वाली यह परीक्षा पूरी तरह से निशुल्क होगी और छात्रों से दोबारा कोई आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा। परीक्षा के एडमिट कार्ड 14 जून, 2026 तक आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड कर दिए जाएंगे। इस वर्ष परीक्षा के लिए लगभग 22.79 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया है।
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CBI की जांच का दायरा बढ़ा: बॉटनी शिक्षिका समेत 9 लोग गिरफ्तार
कथित तौर पर 3 मई को आयोजित हुई नीट परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया था। सीबीआई ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक देश के 5 अलग-अलग राज्यों से 9 मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।
इस रैकेट में सबसे बड़ा नाम पुणे की बॉटनी शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मांधरे का सामने आया है, जिन्हें NTA ने परीक्षा विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया था। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मनीषा मांधरे को 14 दिनों की सीबीआई हिरासत (30 मई 2026 तक) में भेज दिया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, मनीषा मांधरे ने रिटायर्ड केमिस्ट्री लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे के साथ मिलकर भारी भरकम रकम के बदले परीक्षा से पहले ही वाट्सएप (WhatsApp) और टेलीग्राम (Telegram) के जरिए प्रश्न पत्र और उत्तर लीक किए थे। सीबीआई को इस सिंडिकेट में एनटीए के ही कुछ अंदरूनी अधिकारियों और कर्मचारियों के शामिल होने का गहरा अंदेशा है।
‘आप धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त क्यों नहीं कर रहे?’ – विपक्ष हमलावर
इस परीक्षा लीक कांड ने सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया है। कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। राहुल गांधी ने साल 2024 और 2026 के पेपर लीक के पैटर्न की तुलना करते हुए सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा:
“मिस्टर मोदी, देश आपसे कुछ सवाल पूछ रहा है – उनका जवाब दीजिए! पेपर लीक बार-बार क्यों हो रहे हैं? इस ‘परीक्षा पर चर्चा’ के मुद्दे पर आप बार-बार चुप क्यों हैं? आप उस शिक्षा मंत्री को बर्खास्त क्यों नहीं कर रहे हैं जो बार-बार नाकाम साबित हो रहे हैं?”
विपक्ष का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वैचारिक दखल के कारण देश के बड़े विश्वविद्यालयों और परीक्षा संस्थाओं की विश्वसनीयता खत्म हो रही है और 22 लाख से अधिक होनहार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
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सत्तारूढ़ दल का पलटवार: ‘भ्रम की राजनीति छोड़ें राहुल’
विपक्ष के तीखे हमलों के जवाब में भारतीय जनता पार्टी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और संवेदनशील घटना तो माना, लेकिन साथ ही कांग्रेस पर इस गंभीर मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप मढ़ दिया।
बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी संजय मयूख ने कहा कि सरकार छात्रों के हित के लिए प्रतिबद्ध है और इसी वजह से परीक्षा को तुरंत रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया गया है। उन्होंने राहुल गांधी को खोखले आरोप लगाने के बजाय आत्ममंथन करने की सलाह दी।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
साल 2024 में ग्रेस मार्क्स और हजारीबाग लीक विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्रणालीगत चूक न मानते हुए परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था। लेकिन साल 2026 में दोबारा वही कहानी दोहराई जाना यह साबित करता है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के भीतर गहरी प्रशासनिक और तकनीकी खामियां हैं।
देश के सर्वोच्च मेडिकल संस्थानों में दाखिले से जुड़ी इस परीक्षा की शुचिता अगर बार-बार भंग होगी, तो देश के भविष्य और डॉक्टरों की योग्यता पर सवाल उठना लाजिमी है। सरकार को केवल परीक्षा दोबारा कराने तक सीमित न रहकर, परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को अचूक बनाना होगा। NEET UG री-एग्जाम को लेकर बड़ा फैसला ।
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