मुंबई में फर्जी IAS गिरफ्तार बिहार के शख्स का गेस्ट हाउस ड्रामा
मुंबई में फर्जी IAS गिरफ्तार मुंबई क्राइम ब्रांच ने बिहार के वैशाली जिले के चंद्रमोहन प्रसाद रामबली सिंह (32) को धर दबोचा है। यह शख्स खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी बताकर बांद्रा स्थित कस्टम विभाग के आलीशान सरकारी गेस्ट हाउस में मौज कर रहा था। उसकी यह काल्पनिक जिंदगी एक नाटकीय मोड़ पर खत्म हुई, जब उसका झूठ बेनकाब हो गया।
- सिंह ने कभी यूपीएससी परीक्षा पास नहीं की थी।
- वह 2017 में सिविल सेवा की तैयारी के लिए दिल्ली गया था।
- दोस्तों के IAS-IRS बनने के बाद परिवार के दबाव में उसने झूठ गढ़ा।
मुख्य बिंदु :
- मुंबई में फर्जी IAS अधिकारी पकड़ा गया, बिहार निवासी बन बैठा था अफसर।
- बांद्रा के सरकारी गेस्ट हाउस में VIP की तरह रह रहा था आरोपी।
- नकली पहचान पत्र में खुद को गृह मंत्रालय का अधिकारी बताया गया।
- गश्त के दौरान दहिसर पुलिस ने फर्जी IAS को रंगे हाथों पकड़ा।
- गाड़ी पर ‘भारत सरकार’ का बोर्ड देखकर पुलिस को हुआ शक।
- पूछताछ में किया कबूल- कभी UPSC पास नहीं की, झूठ से बचा सम्मान।
- भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में केस दर्ज, 3 जुलाई तक हिरासत में।
कैसे हुआ पर्दाफाश?
28 जून को दोपहर करीब 1 बजे, दहिसर यूनिट 12 के कांस्टेबल लक्ष्मण बागवे और इंस्पेक्टर बालासाहेब राउत नियमित गश्त पर थे। उन्हें एक सफेद स्विफ्ट डिजायर में घूम रहे व्यक्ति की सूचना मिली, जो खुद को वरिष्ठ सरकारी अधिकारी बता रहा था। सूचना पर कार्रवाई करते हुए, उन्होंने मलाड के औद्योगिक क्षेत्र में सिल्वर ओक होटल के पास वाहन को रोका। कार के आगे “भारत सरकार” का बोर्ड लगा था, जिसने अधिकारियों का ध्यान खींचा था।
- गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे सिंह ने आत्मविश्वास से पहचान पत्र दिखाया।
- पहचान पत्र में उसे गृह मंत्रालय में “सहायक निदेशक (सुरक्षा)” बताया गया था।
- अधिकारियों को तुरंत पहचान पत्र में विसंगतियां दिखीं, जिससे संदेह गहराया।
धोखे का खुलासा और स्वीकारोक्ति
संदिग्ध लगने पर सिंह को पूछताछ के लिए दहिसर अपराध शाखा कार्यालय ले जाया गया। गहन पूछताछ के दौरान सिंह ने अपना सारा राज खोल दिया। उसने स्वीकार किया कि वह IAS अधिकारी नहीं है और उसने केवल अपनी इज्जत बचाने के लिए अपने गांव में यह झूठ बोला था। उसने बताया कि उसके कुछ दोस्त 2022 में IAS और IRS अधिकारी बन गए थे, जबकि वह परीक्षा पास नहीं कर सका था।
- सिंह ने तीन दिन की छुट्टी के लिए मुंबई आने का प्लान बनाया था।
- उसने एक सरकारी कर्मचारी दोस्त की मदद से गेस्ट हाउस बुक किया।
- उसने स्थानीय ड्राइवर, 24 वर्षीय फरदीन सैफी को किराए पर लिया था।
ट्रैफिक पुलिस से भी भागा था
ड्राइवर सैफी ने बाद में पुलिस को एक चौंकाने वाली जानकारी दी। उसने बताया कि सिंह अपनी गिरफ्तारी से एक दिन पहले दादर में ट्रैफिक पुलिस को भी चकमा दे चुका था। ट्रैफिक उल्लंघन के लिए रोके जाने पर उसने अपना नकली IAS पहचान पत्र दिखाकर ट्रैफिक जुर्माने से बच निकला था। यह जानकारी इस बात का सबूत है कि मुंबई में फर्जी IAS गिरफ्तार होने से पहले भी अपने धोखे का इस्तेमाल कर चुका था।
- पुलिस ने सिंह के सामान की तलाशी ली।
- उन्हें संदिग्ध पहचान पत्र के साथ 16 विजिटिंग कार्ड मिले।
- दो मोबाइल फोन, एक आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और नकदी भी बरामद हुई।
खुद बनाया था जाली पहचान पत्र
सिंह ने पुलिस को बताया कि उसने पहचान पत्र “स्वयं द्वारा डिज़ाइन किया” था। उसने कई लोगों को अपने काल्पनिक ओहदे के बारे में विश्वास दिलाया था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह प्रतिरूपण कितना गहरा था और क्या किसी और ने सिंह को इस धोखे को अंजाम देने में मदद की थी। कार मालिक और जिसने कार बुक की थी, वे भी जांच के दायरे में हैं।
- सिंह पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ।
- धाराओं में 204 (सार्वजनिक सेवक होने का दिखावा करना), 336 (2) (जालसाजी), 336 (3) (झूठा दस्तावेज बनाना), और 340 (नकली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना) शामिल हैं।
- उसे 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
अभी तक कोई आर्थिक धोखाधड़ी नहीं
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभी तक सिंह ने किसी को भी आर्थिक रूप से धोखा नहीं दिया है। हालांकि, एक अधिकारी ने कहा, “नकली आईडी के साथ IAS अधिकारी होने का दिखावा करते हुए मुंबई में घूमना कोई छोटी धोखाधड़ी नहीं है।” इस मामले से एक बार फिर साबित होता है कि ऐसे धोखेबाज लोगों की सादगी का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।



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