“नेपाल चीन बाढ़ अलर्ट” ईशा फाउंडेशन के 80 सदस्य लापता;
नेपाल चीन बाढ़ अलर्ट नेपाल और चीन (तिब्बत) सीमा क्षेत्र में प्रकृति का भयानक कहर देखने को मिल रहा है। रसुवा जिले में ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के कारण आई विनाशकारी बाढ़ के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने एक और भयानक जल प्रलय की चेतावनी जारी कर दी है।
नेपाल-चीन बॉर्डर के पास नदियों के संगम पर एक विशाल ‘बैरियर झील’ (अस्थायी प्राकृतिक बांध) बन गई है, जिसके अगले तीन दिनों में फटने की अत्यधिक आशंका जताई जा रही है।
इस आपदा के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव (सद्गुरु) के ईशा फाउंडेशन के 80 सदस्यों के ग्यिरोंग इमिग्रेशन केंद्र के पास बाढ़ की चपेट में आने और लापता होने की दुखद खबर सामने आई है।
चीन की चेतावनी: 3 दिनों में टूट सकती है बैरियर झील
चीन के जल संसाधन मंत्रालय और चाइना सेंट्रल टेलीविज़न (CCTV) की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम पर भूस्खलन के मलबे से एक खतरनाक बैरियर झील बन गई है।
पानी का खतरनाक स्तर: गुरुवार सुबह तक इस अस्थाई झील में लगभग 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका था और यह पहले ही ओवरफ्लो (छलकने) लगी है।
अतिरिक्त जलभराव की आशंका: मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 72 घंटों में झील में 30 लाख क्यूबिक मीटर अतिरिक्त पानी जमा हो सकता है। अत्यधिक दबाव के कारण यह प्राकृतिक बांध कभी भी टूट सकता है।
नेपाल आपदा प्रबंधन (NDRRMA) का अलर्ट: नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने पुष्टि की है कि रसुवागढ़ी सीमा से 18 किमी ऊपर लेंडे नदी का प्रवाह अवरुद्ध होने से 0.11 वर्ग किलोमीटर में जलाशय बन गया है। निचले तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने और उच्च सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है।
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पहली बाढ़ का कारण: ग्लेशियर खिसकना और अचानक आया मलबे का सैलाब
इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) और प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पहली बाढ़ का वैज्ञानिक कारण स्पष्ट हुआ है:
एवलांच और भूस्खलन: रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में अत्यधिक ऊंचाई से भारी मात्रा में बर्फ, चट्टानें और मलबा खिसक कर लेंडे खोला (नदी) में गिर गया।
अस्थाई बांध का निर्माण: मलबे ने नदी के स्वाभाविक प्रवाह को रोक दिया, जिससे एक तात्कालिक बांध बन गया।
विस्फोटक जल प्रवाह: पानी का दबाव बढ़ते ही यह अस्थायी बांध अचानक टूट गया, जिससे महज 30 मिनट के भीतर निचली नदियों में जलस्तर 7 से 9 मीटर तक बढ़ गया। इस सैलाब ने तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई और कई मौसम निगरानी केंद्र बह गए।
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ईशा फाउंडेशन के 80 सदस्य लापता: भावुक हुए सद्गुरु
तिब्बत के सागा में स्थित कैंप से अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव बेहद भावुक हो गए। उन्होंने आंखों में आंसू लिए इस घटना को “अत्यंत भयानक और अभूतपूर्व” बताया।
इमिग्रेशन भवन में थे श्रद्धालु: सद्गुरु ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर लौट रहा ईशा का S3 ग्रुप ग्यिरोंग स्थित इमिग्रेशन बिल्डिंग में मौजूद था। सुबह 9:05 बजे ग्रुप लीडर ने इमिग्रेशन पहुंचने का संदेश भेजा था, लेकिन ठीक 9 मिनट बाद (9:14 बजे) आई भीषण बाढ़ उस पूरी इमारत को बहा ले गई।
अंतर्राष्ट्रीय नागरिक शामिल: लापता 80 सदस्यों (34 पुरुष और 46 महिलाएं) में भारत के अलावा अमेरिका (22), कनाडा (12), ऑस्ट्रेलिया (11), ब्रिटेन (9), जर्मनी (4), फ्रांस, स्पेन, रूस, दक्षिण अफ्रीका और नेपाल समेत 18 देशों के नागरिक शामिल हैं। पास के होटल में ठहरे 3 वॉलांटियर्स और एक डॉक्टर का भी अब तक कोई सुराग नहीं मिला है।
बचाव कार्य में बाधाएं: सड़कों के पूरी तरह ध्वस्त होने और संचार सेवाएं ठप होने के कारण राहत दल मौके पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। सद्गुरु ने बताया कि भारतीय, चीनी और अमेरिकी दूतावासों के माध्यम से राहत एवं बचाव दल भेजने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं।
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संकट का दायरा और अनिश्चितता
भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सीमा के दोनों ओर भारी तबाही हुई है। नेपाल की ओर आधिकारिक तौर पर सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि आशंका जताई जा रही है कि हताहतों और लापता लोगों की कुल संख्या 1,500 के पार पहुंच सकती है।
फिलहाल, सीमावर्ती इलाकों में लगातार हो रही बारिश और नई बैरियर झील के फटने का खतरा राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रशासन ने सभी संवेदनशील इलाकों में आपातकालीन अलर्ट लागू कर दिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी तबाही की आशंका, राहत-बचाव अभियानों और आपदा प्रबंधन टीमों की तैनाती के बीच जानें नेपाल चीन बाढ़ अलर्ट की पूरी इनसाइड स्टोरी नेपाल चीन बाढ़ अलर्ट, हिमनद झीलों के फटने के खतरे, भूस्खलन की चेतावनी और दो-तरफा समन्वय पर नेपाल चीन बाढ़ अलर्ट का पूरा विश्लेषण
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