“नेपाल बाढ़ बचाव अभियान” बाढ़ के 11 दिन बाद 60 वर्षीय महिला को निकाला
नेपाल बाढ़ बचाव अभियान नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण मची भारी तबाही के बीच एक हैरान कर देने वाला चमत्कार सामने आया है। नुवाकोट जिले के बिदुर शहर (बेत्रावती क्षेत्र) में चार मंजिला इमारत की ऊपरी मंजिल पर मिट्टी, कीचड़ और मलबे के नीचे 11 दिनों तक फंसी रहने के बाद 60 साल की एक बुजुर्ग महिला को सुरक्षित जिंदा बाहर निकाल लिया गया है।
आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) की टीम ने स्निफर डॉग्स (खोजी कुत्तों) की मदद से महिला की स्थिति का पता लगाया और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें बचा लिया। इस घटना को नेपाल में जारी भीषण मानवीय संकट के बीच उम्मीद की एक दुर्लभ और बड़ी किरण माना जा रहा है।
खिड़की से रास्ता बनाकर निकाला बाहर, हेलीकॉप्टर से भेजा अस्पताल
नेपाल पुलिस द्वारा जारी किए गए वीडियो संदेश और आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बचाई गई महिला की पहचान चंद्रिका श्रेष्ठ (60) के रूप में हुई है। जब आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) की नौ सदस्यीय बचाव टीम मौके पर पहुंची, तो महिला बेहोशी की स्थिति में कीचड़ में ढकी हुई थीं।
बचाव कर्मियों ने पहले खिड़की के आसपास जमा भारी गाद और मलबे को हटाया, जिसके बाद महिला तक पहुंच बनाई गई। जब उन्हें कंबल और जैकेट में लपेटा गया, तो धीरे-धीरे उन्हें होश आया। प्रारंभिक चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के लिए उन्हें तत्काल हेलीकॉप्टर के जरिए त्रिशूली स्थित नेपाली सेना की मैथिली बैरक ले जाया गया। APF के डिप्टी प्रवक्ता शैलेंद्र थापा ने बताया कि बेहतर और उन्नत इलाज के लिए उन्हें काठमांडू के मुख्य अस्पताल में रेफर किया गया है।
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टनल में फंसे लोगों का भी रेस्क्यू; चीनी नागरिक सुरक्षित निकला
बचाव अभियान केवल इमारतों तक ही सीमित नहीं है। अपर त्रिशूली 1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (Upper Trishuli 1 Hydroelectric Project) की साइट पर भी बचाव कर्मियों को बड़ी सफलता मिली है। ऑडिट 4 टनल (सुरंग) के बेहद खतरनाक हिस्से में फंसे एक चीनी नागरिक को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस बचाव के साथ ही पिछले दो दिनों के भीतर सुरंग के जोखिम भरे हिस्सों से तीन लोगों को सफलतापूर्वक निकाला जा चुका है।
फिलहाल खोजी अभियान को तेज करने के लिए नेपाली सेना, पुलिस और नेपाल स्काउट्स के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय टनलिंग विशेषज्ञ भी आधुनिक एवं विशेष मशीनों के साथ मैदान में उतर चुके हैं।
26 अगस्त को एवलांच के बाद भोटेकोशी नदी में आया था उफान
यह भीषण प्राकृतिक आपदा 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के समीप बर्फ और चट्टानों के अचानक खिसकने (एवलांच) के कारण शुरू हुई थी। सीमावर्ती क्षेत्र से दक्षिण की ओर तीव्र गति से बहने वाली भोटेकोशी नदी अपने साथ जलप्रलय लेकर आई। इस बाढ़ की चपेट में आने से कई जिलों में सड़कें, पक्के मकान, गाड़ियां, बड़े पुल और कई जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह तबाह हो गईं।
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1,300 से अधिक मौतें, 5,000 लोग अब भी लापता
नेपाल सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस जलप्रलय में अब तक 1,300 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। वहीं बेत्रावती, धुंगे और भट्टार जैसे सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 5,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतें भारी कीचड़ और मलबे के नीचे पूरी तरह समा गई हैं।
उत्तरी और मध्य नेपाल में आई इस तबाही से कई अंदरूनी इलाकों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों ने अब तक 13,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया है। एजेंसियां लगातार जलजले के बीच फंसे अन्य संभावित जीवित लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।
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नेपाल बाढ़ बचाव अभियान के तहत सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन की टीमें फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का निरंतर प्रयास कर रही हैं।
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