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 “शिक्षक दिवस राष्ट्रीय पुरस्कार” राष्ट्रपति मुर्मू ने 82 शिक्षकों को दिया पुरस्कार,

शिक्षक दिवस राष्ट्रीय पुरस्कार

देशभर में शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर शिक्षा जगत से जुड़ी महान हस्तियों और उत्कृष्ट योगदान देने वाले गुरुओं को सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन परिसर में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश भर के 82 बेहतरीन शिक्षकों को ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026’ से नवाजा।

इस अवसर पर उन्होंने प्राथमिक शिक्षा की मजबूती और ड्रॉपआउट रेट (स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर) को नगण्य बनाने में अध्यापकों के अथक प्रयासों की जमकर सराहना की।

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में लिखे गए एक विशेष लेख को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते हुए शिक्षकों की भूमिका को मानवता का निर्माण करने वाला पवित्र कार्य करार दिया।

राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन: “स्कूली शिक्षा ही पूरी व्यवस्था की नींव”

पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि स्कूली शिक्षा पूरी शिक्षा प्रणाली की वास्तविक नींव होती है। बचपन में बच्चों को दिए जाने वाले संस्कार, नैतिक मूल्य और दिशा उनके संपूर्ण जीवन का आधार बनते हैं।

राष्ट्रपति ने अपने भाषण में प्रमुख बातें रेखांकित कीं:

शुरुआती संस्कार अत्यधिक प्रभावी: ज्ञान और तकनीकी कौशल जीवन के किसी भी पड़ाव पर सीखे जा सकते हैं, लेकिन बचपन में बोए गए अच्छे व्यवहार और मूल्यों के बीज सबसे अधिक असरदार और स्थायी होते हैं।

समान अवसर का सशक्त माध्यम: भारतीय संविधान में निहित समान अवसर के अधिकार को वास्तविक धरातल पर उतारने का सबसे शक्तिशाली जरिया शिक्षा ही है।

कमजोर वर्गों पर विशेष ध्यान: अध्यापकों की यह नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है कि वे आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों, पहली पीढ़ी के शिक्षार्थियों, ग्रामीण इलाकों के बच्चों, शर्मीले और विशेष आवश्यकता वाले (दिव्यांग) छात्रों में आत्मविश्वास का संचार करें।

राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए देश को दुनिया की ‘कौशल राजधानी’ (Skill Capital) और ‘ज्ञान महाशक्ति’ (Knowledge Superpower) बनाना हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकता है। यह लक्ष्य केवल एक विश्वस्तरीय और समावेशी शिक्षा प्रणाली के जरिए ही प्राप्त किया जा सकता है।

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पीएम मोदी ने शेयर किया राष्ट्रपति का लेख, बताया मार्गदर्शन का मार्गदर्शक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के विचारोत्तेजक लेख को साझा करते हुए कहा कि यह आलेख अध्यापन को केवल एक पेशा नहीं, बल्कि स्वतंत्र सोच और जिज्ञासा को जन्म देने वाला एक पवित्र मिशन मानता है।

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि राष्ट्रपति के इस लेख में शिक्षकों से आग्रह किया गया है कि वे विद्यार्थियों को ऐसे नागरिक के रूप में गढ़े जो:

सांस्कृतिक विरासत: भारत की समृद्ध परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहें।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: अंधविश्वासों से परे वैज्ञानिक सोच और तार्किक क्षमता विकसित करें।

अंत्योदय का आदर्श: समाज के अंतिम व्यक्ति तक कल्याण की भावना रखें।

पर्यावरण संरक्षण व राष्ट्र प्रथम: प्रकृति की रक्षा करते हुए ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प को प्राथमिकता दें।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षक अपनी प्रेरणा, कौशल और मूल्यों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को नया आकार देते हैं।

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    82 उत्कृष्ट शिक्षकों को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

    इस वर्ष विभिन्न श्रेणियों में असाधारण प्रदर्शन करने वाले कुल 82 शिक्षाविदों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिनका विवरण इस प्रकार है:

    स्कूली शिक्षा: देश के विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से 48 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूली शिक्षक।

    उच्च शिक्षा संकाय: उच्च शिक्षण संस्थानों से उत्कृष्ट शोध और अध्यापन के लिए 21 प्रोफेसर व संकाय सदस्य।

    कौशल विकास: कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (Ministry of Skill Development and Entrepreneurship) के अंतर्गत आने वाले 13 उत्कृष्ट प्रशिक्षक।

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    समारोह के अंत में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत के प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना ही देश को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने का एकमात्र मार्ग है।

    शिक्षक दिवस राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाता है। राष्ट्रपति द्वारा दिए जाने वाले इस सर्वोच्च सम्मान का मुख्य उद्देश्य देश भर के शिक्षकों की कड़ी मेहनत, नवाचार और प्रतिबद्धता को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है।

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