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NPPA का दवाओं पर नियंत्रण: अब नहीं बढ़ेंगी गैर-अनुसूचित दवाओं की कीमतें

NPPA का दवाओं पर नियंत्रण

NPPA ने उपभोक्ताओं को दवाओं की भारी कीमत बढ़ोतरी से बचाने के लिए, गैर-अनुसूचित दवाओं पर मूल्य नियंत्रण उपायों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। यह कदम आम तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं की कीमतों में अनियंत्रित वृद्धि को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है। औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) के अनुसार, निर्माता इन दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में एक वर्ष में 10% से अधिक की वृद्धि नहीं कर सकते। इस नए नियम से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ बनाना है और अत्यधिक मुनाफाखोरी पर रोक लगाना है।

  • डीपीसीओ, 2013 के अनुच्छेद 20 का कड़ाई से पालन करना होगा।
  • निर्माता वार्षिक एमआरपी में 10% से अधिक की वृद्धि नहीं कर सकते हैं।
  • उल्लंघन पर ब्याज सहित अधिक वसूली गई राशि जमा करनी होगी और जुर्माना भी देना होगा।

गैर-अनुसूचित फ़ॉर्मूलों पर कड़ी निगरानी

सरकार ने अब NPPA का दवाओं पर नियंत्रण बढ़ा दिया है। अब NPPA का दवाओं पर नियंत्रण गैर-अनुसूचित फ़ॉर्मूलों पर भी लागू होगा, जो प्रत्यक्ष मूल्य नियंत्रण से बाहर हैं। इन ब्रांडों को किसी भी मूल्य संशोधन की तुरंत NPPA के एकीकृत फार्मास्युटिकल डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली (आईपीडीएमएस) पर रिपोर्ट करनी होगी। NPPA ने एक ही दवा को अलग-अलग ब्रांड नामों से बेचने वाले निर्माताओं पर भी शिकंजा कसा है। ऐसे ब्रांडों के एमआरपी में 10% से अधिक का अंतर नहीं हो सकता है, जिससे मूल्य निर्धारण में एकरूपता सुनिश्चित होती है।

  • Cऔर एस्कोरिल जैसे ब्रांड गैर-अनुसूचित फ़ॉर्मूले हैं।
  • इन दवाओं का भारत के दवा बाजार में लगभग तीन-चौथाई हिस्सा है।
  • आईपीडीएमएस पर मूल्य संशोधन की रिपोर्ट करना अनिवार्य कर दिया गया है।

उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई

NPPA ने 22 जुलाई को निर्माताओं, उद्योग संघों और हितधारकों को एक पत्र जारी किया है। इसमें साफ कहा गया है कि प्रावधानों का उल्लंघन करने पर डीपीसीओ और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने गैर-अनुसूचित दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी पर कड़ी नज़र रखने का फैसला किया है। इससे मरीजों को chronic diseases की दवाओं की बढ़ती कीमतों से राहत मिलेगी।

  • निर्माता को जुर्माने के साथ ब्याज भी जमा करना होगा।
  • डीपीसीओ, 2013 और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।
  • सितंबर 2024 तक 9980.6 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

उद्योग की प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा

भारतीय औषधि निर्माता संघ (आईडीएमए) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विरंची शाह ने कहा कि उनके सदस्य पहले से ही डीपीसीओ 2013 का पालन कर रहे हैं। उन्होंने एक ही फॉर्मूले को अलग-अलग ब्रांड नामों से बेचने पर एमआरपी को एक समान रखने पर चिंता जताई। सरकार का यह कदम स्वास्थ्य सेवा को सभी के लिए किफायती बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। इस निगरानी से भारत के 50 अरब डॉलर के दवा बाजार में पारदर्शिता आएगी और उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ेगा।

  • कई ब्रांडों की कीमतों को एक समान करना परिचालन संबंधी समस्या हो सकती है।
  • इस संबंध में उद्योग निकाय आगे स्पष्टीकरण की मांग करेगा।
  • NPPA का दवाओं पर नियंत्रण इस दिशा में एक अहम कदम है।

कुछ दवाओं की कीमतें हुई कम

NPPA का दवाओं पर नियंत्रण केवल गैर-अनुसूचित दवाओं तक ही सीमित नहीं है। NPPA ने प्रमुख दवा कंपनियों द्वारा बेची जाने वाली 35 आवश्यक दवाओं की खुदरा कीमतों में भी कमी की है। ये सभी कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं कि दवाएँ जनता के लिए सुलभ और वहनीय रहें। भारत दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवा प्रदाता है और यह कदम उसकी साख को और मजबूत करेगा।

  • कम की गई कीमतों में एसिक्लोफेनाक और पैरासिटामोल शामिल हैं।
  • खुदरा विक्रेताओं को अद्यतन मूल्य सूची प्रमुखता से प्रदर्शित करनी होगी।
  • इन कीमतों में जीएसटी शामिल नहीं है, जिसे बाद में जोड़ा जा सकता है।

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