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ओम बिरला का खुलासा: PM मोदी पर सदन के भीतर हमले की थी साजिश?

ओम बिरला का खुलासा

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 5 फरवरी 2026 को सदन के भीतर एक अत्यंत चौंकाने वाला बयान दिया, जिसने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। ओम बिरला का खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने किसी भी संभावित अप्रिय घटना को रोकने के लिए पिछले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में न आने की व्यक्तिगत सलाह दी थी। बिरला ने साझा किया कि उन्हें पक्की जानकारी मिली थी कि कुछ कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की सीट के पास जाकर कोई “अभूतपूर्व घटना” या “अप्रत्याशित हरकत” कर सकते हैं।

यह जानकारी इतनी गंभीर थी कि सदन की गरिमा और देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को संभावित नुकसान से बचाने के लिए अध्यक्ष को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। प्रधानमंत्री, जो सदन के नेता के रूप में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने वाले थे, उन्होंने अध्यक्ष के सुझाव पर सहमति व्यक्त की और इस तरह एक बड़े टकराव को टाला जा सका।

सदन में अभूतपूर्व व्यवहार और लोकतांत्रिक परंपराओं पर ‘काला धब्बा’

कार्यवाही के दौरान बिरला ने सदन को दिन भर के लिए स्थगित करते हुए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि कुछ सदस्यों ने चैंबर में ऐसा व्यवहार किया था जो अपनी गंभीरता में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक रूप से अनुचित था। बिरला ने जोर देकर कहा कि संविधान अध्यक्ष को एक गरिमापूर्ण पद प्रदान करता है और भारत के इतिहास में कभी भी राजनीतिक मतभेदों ने सदन के कार्यालय की मर्यादा से समझौता नहीं किया है। हालांकि, बुधवार को विपक्षी सदस्यों का आचरण—विशेषकर स्पीकर के कार्यालय में—देश की लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए एक “काले धब्बे” जैसा था। अध्यक्ष ने कहा कि जब सदन के नेता को जवाब देना था, तब कांग्रेस पार्टी के सदस्यों द्वारा पीएम की सीट घेरने की योजना की पक्की जानकारी होना संसद के इतिहास में एक दुर्भाग्यपूर्ण मोड़ है।

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नाटकीय दृश्य: महिला सांसदों द्वारा पीएम की सीट की घेराबंदी और बैनर प्रदर्शन

सदन में यह तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब बुधवार को नाटकीय दृश्य देखने को मिले। विपक्षी महिला सांसद सत्ता पक्ष की बेंचों की ओर बढ़ीं और बड़े बैनर लेकर प्रधानमंत्री की कुर्सी के चारों ओर खड़ी हो गईं। इन बैनरों पर “जो सही है, वही करो” जैसे नारे लिखे थे। वरिष्ठ पत्रकार पल्लवी घोष के दावों और सदन के सूत्रों के अनुसार, ऐसी विश्वसनीय जानकारी थी कि कांग्रेस पीएम पर शारीरिक हमला करने या अनुचित स्थिति पैदा करने की योजना बना रही थी, और इस हमले की आड़ में महिला सांसदों को आगे भेजा गया था।

ओम बिरला का खुलासा इसी पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि सांसदों ने जिस तरह पीएम की कुर्सी के पास पहुंचने की कोशिश की, उसे पूरे देश ने देखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पीकर के तौर पर यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे सदन की मर्यादा और इसकी उच्च परंपराओं की रक्षा करें।

राहुल गांधी के भाषण पर रोक और विपक्ष का शोरगुल भरा विरोध

सदन में चल रहे इस भारी हंगामे के पीछे एक प्रमुख कारण राहुल गांधी के भाषण पर लगी रोक भी थी। विपक्ष इस बात का विरोध कर रहा था कि स्पीकर ने राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित किताब से सामग्री पढ़ने की अनुमति नहीं दी। इसी के विरोध में विपक्षी सांसद “नरेंद्र-सरेंडर” के नारे वाले पोस्टर और प्रधानमंत्री की तस्वीर लेकर सदन के वेल में घुस गए। बिरला ने विपक्षी सदस्यों द्वारा पोस्टर लहराने और पैम्फलेट लाने पर कड़ी आपत्ति जताई और चेतावनी दी कि सदन इस तरह नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष की नारेबाजी के बीच प्रधानमंत्री का सदन में बोल न पाना किसी भी तरह से सही नहीं है और यह संसदीय गरिमा को कम करने की एक सोची-समझी कोशिश है।

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प्रियंका गांधी वाड्रा का पलटवार: दावों को बताया ‘सरासर झूठ’

अध्यक्ष के बयानों पर कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए इन आरोपों को “सरासर झूठ” करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पर किसी के हाथ उठाने या उन्हें चोट पहुंचाने की योजना का कोई सवाल ही नहीं उठता। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी स्पीकर के “पीछे छिप रहे हैं” और वे स्पीकर से यह सब कहलवा रहे हैं क्योंकि उनमें सदन में आने की हिम्मत नहीं थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर तीन महिला सांसद बेंच के सामने खड़ी थीं, तो उसे हमला बताना बकवास है। प्रियंका ने कहा कि जब विपक्ष के सदस्यों को अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी, तो वे विरोध जरूर करेंगे।

बिना समापन भाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पारित: एक असामान्य घटना

सदन की कार्यवाही में गुरुवार को एक बहुत ही असामान्य घटनाक्रम देखने को मिला। विपक्ष की लगातार नारेबाजी और ‘नरेंद्र-सरेंडर’ के पोस्टरों के बीच, लोकसभा ने प्रधानमंत्री के पारंपरिक समापन भाषण के बिना ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया। आम तौर पर प्रधानमंत्री बहस का समापन करते हुए विस्तृत जवाब देते हैं, लेकिन ओम बिरला का खुलासा होने के बाद पैदा हुई स्थिति के कारण यह संभव नहीं हो सका। हालांकि, यह पहली बार नहीं है; बिरला ने याद दिलाया कि 2004 में भी तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह विपक्ष के हंगामे के कारण धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब नहीं दे पाए थे। पीएम मोदी की अनुपस्थिति में ही सदन ने प्रस्ताव को पारित किया और कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया।

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स्पीकर के कार्यालय में दुर्व्यवहार की निंदा और सुरक्षा प्रोटोकॉल

ओम बिरला ने सदन के चैंबर के साथ-साथ अपने कार्यालय में हुए आचरण की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि महिला सांसदों का स्पीकर के कार्यालय में इस तरह प्रवेश करना और वहां व्यवहार करना संसदीय गतिविधियों के लिए अनुचित था। “आप सदन की गरिमा को कम करना चाहते हैं,” बिरला ने विपक्षी सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बजट सत्र 2026 के दौरान ऐसी कोई भी घटना लोकतांत्रिक परंपराओं को गंभीर रूप से कमजोर करती। ओम बिरला का खुलासा यह भी दर्शाता है कि सुरक्षा इनपुट कितने गंभीर थे कि उन्हें प्रधानमंत्री को सदन से दूर रहने का आग्रह करना पड़ा। उन्होंने सदन के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए सभी दलों से सहयोग का आह्वान किया।

भविष्य की चेतावनी और राज्यसभा में पीएम का संबोधन

सदन स्थगित करने से पहले स्पीकर ने विपक्षी सदस्यों को चेतावनी दी कि अगर वे पोस्टर और पैम्फलेट लाना बंद नहीं करते, तो सदन आज और कल भी नहीं चलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे की कार्यवाही सदस्यों के व्यवहार पर निर्भर करेगी। जबकि लोकसभा में पीएम मोदी का भाषण रद्द कर दिया गया, उनके गुरुवार शाम को राज्यसभा को संबोधित करने का कार्यक्रम तय रहा। सदन के भीतर की यह घटना लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। बिरला ने कहा कि इतिहास गवाह है कि राजनीतिक मतभेद कभी सदन के कार्यालय तक नहीं पहुंचे थे, लेकिन कल जो हुआ वह एक काला धब्बा है जिसकी भरपाई सहयोग और मर्यादा से ही संभव है।

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